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उर्वरक उद्योग के लिये कच्चे माल पर आयात शुल्क घटा सकती है सरकार

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2018-19 में देश का आयात में करीब 9 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह बढ़कर 507.44 अरब डॉलर रहा।

नई दिल्ली, सरकार आगामी बजट में उर्वरक इंडस्ट्री में काम आने वाले कच्चे माल पर आयात शुल्क को कम करने को बारे में विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार देश में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठा सकती है। सूत्रों के अनुसार, डाई अमोनियम फास्फेट (DAP) में उपयोग होने वाले रॉक फास्फेट और सल्फर जैसे कच्चे माल पर आयात शुल्क को कम करने से घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

वर्तमान में इस प्रकार के आयात पर 5 फीसद के हिसाब से शुल्क लिया जाता है। बता दें कि भारत अपनी कुल डीएपी की जरूरत का करीब 95 फीसद हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात करता है। यूरिया की बात करें, तो देश में यूरिया की कुल जरूरत का करीब 30 फीसद आयात होता है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर की अवधि में भारत में कच्चे और तैयार उर्वरक का आयात 8.47 फीसद बढ़कर 6.2 अरब डॉलर रहा है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2018-19 में देश का आयात में करीब 9 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह बढ़कर 507.44 अरब डॉलर रहा।

उधर वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सुझाव दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि आयात बिल में कमी लाने को लेकर 300 जिंसों पर मूल सीमा शुल्क को युक्तिसंगत किया जाना चाहिए। इसके अलावा वाणिज्य मंत्रालय ने रद्दी कागज और लुग्दी पर आयात शुल्क हटाने का प्रस्ताव भी वित्त मंत्रालय को दिया है। वर्तमान में रद्दी कागज पर आयात शुल्क 10 फीसद और लुग्दी पर 5 फीसद है।

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