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NGT ने मांगी राज्यों से कचरा प्रबंधन व वायु प्रदूषण से जुड़ी जानकारी, किया जवाब-तलब

एनजीटी ने कहा कि प्रस्तुत रिपोर्ट में कचरे की निकासी और प्रबंधन के बीच भारी अंतर। केंद्र शासित प्रदेशों से भी प्रदूषित नदियों के पुनरुद्धार पर जानकारी मांगी गई है।

नई दिल्ली, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से ठोस कचरा प्रबंधन, नदियों के प्रदूषित हिस्सों के पुनरुद्धार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर जानकारी मांगी है। यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) मुख्य सचिवों से एकत्र करेगा।

एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सीपीसीबी ने जो रिपोर्ट सौंपी है वह प्रकार व परिमाण के लिहाज से पूर्ण नहीं है और उपलब्ध जानकारी में मल-मूत्र की निकासी और उसके प्रबंधन के बीच भारी अंतर है। पीठ ने कहा, ‘सीपीसीबी ने ‘अच्छा’, ‘औसत’, ‘खराब’ और ‘कोई जानकारी नहीं’ की श्रेणी में जानकारी उपलब्ध कराई है, जो किसी गुणात्मक विश्लेषण पर नहीं, बल्कि मुहैया कराई गई जानकारी पर आधारित है।’

ठोस कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर पीठ ने कहा है कि नगरपालिका क्षेत्र में निकलने वाले कचरे की मात्र, कचरे की प्रकृति के हिसाब से उसे अलग-अलग करने और उसके प्रबंधन के साथ ही पहले से जमा कचरे के बारे में जानकारी की जरूरत है। नदियों के 351 प्रदूषित हिस्सों के पुनरुद्धार के संदर्भ में एनजीटी ने कहा है कि राज्यों को निर्देशों के अनुपालन के बारे में जानकारी मुहैया करानी है। इसमें स्थाई और अस्थाई उपचार की व्यवस्था और नदियों में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए किए गए उपाय इत्यादि शामिल हैं।

पीठ ने मुख्य सचिवों को यह निर्देश दिया है कि वो जिन शहरों में वायु की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, वहां कार्य योजना के क्रियान्वयन की स्वयं निगरानी करें और सीपीसीबी को इसकी जानकारी दें। इससे पहले एनजीटी ने कहा था कि सीपीसीबी के डाटा के मुताबिक देश में चार हजार से ज्यादा पुराने कचरे के ढेर पड़े हैं, जिनका तत्काल प्रबंधन अति आवश्यक है, क्योंकि इससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

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