हर संसारी प्राणी अपनी सुरक्षा के लिए शरण की खोज करता है…

प्राणी उपयुक्त शरण मिलने पर उसे स्वीकार भी कर लेता है। बहिर्दर्शी व्यक्ति अपने पारिवारिक जनों को शरण मानता है।

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