वैष्णों देवी ही नहीं दिल्ली के पास मां के ये 7 मंदिर भी हैं प्रसिद्ध

हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत बड़ा महत्व हैं. इस दौरान माता के भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए पूरे नौ दिनों का उपवास रखते हैं.

नई दिल्ली, स्टार सवेरा ।

माना जाता है कि मां दुर्गा प्रसन्न होने पर भक्तों को मनचाहा फल प्रदान करती हैं. इऩ नौ दिनों में माता के कई ऐसे भक्त हैं जो दर्शन के लिए वैष्णों देवी जाते हैं. लेकिन हर किसी के लिए माता के दर्शन करने के लिए वैष्णों देवी जाना संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में आप दिल्ली के आसपास बने माता के इन मंदिरों में जाकर मां का आशीष पा सकते हैं
माना जाता है कि न सिर्फ वैष्णों देवी बल्कि इन मंदिरों में भी जो व्यक्ति सच्चे सच्चे दिल से मां की अराधना करता है, मां उसकी हर मुराद जरूर पूरी करती हैं. आइए जानते हैं वैष्णों देवी के अलावा मां दुर्गा के वो कौन से ऐसे 7 प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां मां के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है.

ज्वाला जी मंदिर-हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में बना ज्वाला जी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. बता दें, इस मंदिर में मां दुर्गा के नौ
रूपों महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज,विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजीदेवी के नाम की
ज्योति लगातार जलती रहती है. यहां पहुंचे श्रद्धालुओं को यहां
मौजूद सभी देवियों के दर्शन ज्योति रूप में होते हैं. बता दें,
माता सती की जीभ यहां गिरने की वजह से यह मंदिर 51
शक्तिपीठों में शामिल है.

मनसा देवी- उत्तराखंड
मान्यता है कि माता के इस मंदिर में जो भी भक्त सच्चे दिल से आता है उसकी सभी मनोकामनाएं मां जरूर पूरी करती हैं. यही वजह है कि मां के इस मंदिर को मनसा देवी कहकर पुकारा जाता है. इस मंदिर में आने वाले भक्त यहां मौजूद एक पेड़ की टहनी पर अपनी मन्नत का धागा बांधते हैं. इच्छा पूरी होने पर यह धागा खोल दिया जाता है.

पाटन देवी-उत्तर प्रदेश
माता का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है. कहा जाता है कि इस स्थान पर माता सती का दायां कंधा गिरा था. इस मंदिर को माता के भक्त पातालेश्वरी देवी के नाम से भी जानते हैं. मान्यता है कि यही वो स्थान है जहां सीता धरती की गोद में समाकर पाताल लोक चली गईं थी. जिसकी वजह से इस स्थान का नाम पावालेश्वरी देवी रखा गया.
नैना देवी मंदिर-हिमाचल प्रदेश
नैना देवी का मंदिर मां दुर्गा के प्रसिद्ध 51 शक्ति पीठों में से एक है. मान्यता है इस स्थान पर माता सती के नेत्र गिरे थे. यहां वैष्णोें माता के अलावा काली माता और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं. मंदिर में एक गुफा भी है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है.

करणी माता मंदिर-राजस्थान

इस मंदिर की अपनी एक खास पहचान है. माता के इस मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है. कहा जाता है कि इस मंदिर में करीब 20 हजार चूहे रहते हैं. इस मंदिर में करणी माता की प्रतिमा स्थापित की गई है.
अम्बाजी मंदिर-गुजरात
अम्बाजी मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल सबसे प्रमुख मंदिर है .कहा जाता है कि यहां माता सती का हृदय गिरा था.इस मंदिर में मां की कोई प्रतिमा नहीं रखी हुई है. यहां केवल श्री चक्र की पूजा की जाती है. यह मंदिर गुजरात का सबसे प्रमुख मंदिर है.

कामाख्या मंदिर-असम
51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर में माता सती की योनी गिरी थी. कहा जाता है कि इस मंदिर में रक्त में डूबे हुए कपड़े का प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है. मान्यता है कि तीन दिन तक जब मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं उस दौरान मंदिर में एक सफेद रंग का कपड़ा बिछा दिया जाता है जो कि मंदिर के पट खोलने तक लाल हो जाता है.

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