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दिल्ली में प्रवासी मजदूरों के लिए 300 बसें चलाना चाहती है कांग्रेस, सीएम केजरीवाल से मांगी इजाजत

अनिल चौधरी ने सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा कि कांग्रेस अपने संबंधित राज्यों में प्रवासी श्रमिकों के आवागमन की सुविधा के लिए 300 बसें तैनात करना चाहती है।

नई दिल्ली, दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है। अनिल चौधरी ने केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा कि कांग्रेस प्रवासी श्रमिकों के आवागमन की सुविधा के लिए राजधानी की सीमाओं पर 300 बसें चलाना चाहती है। इन बसों का खर्च दिल्ली कांग्रेस की तरफ से वहन किया जाएगा। उन्होंने इन बसों को चलाने के लिए मंजूरी देने के लिए सीएम से मांग की है।

अनिल चौधरी ने पत्र में लिखा है कि पैदल जा रहे मजदूरों के लिए दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कांग्रेस बसें चलाना चाहती है। ताकि अपने-अपने घरों को जाने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो।
अनिल चौधरी ने सीएम को अवगत कराया है कि ये 300 बसें उन्हें स्कूली बस और अन्य माध्यमों से प्राप्त हो रही हैं जोकि लॉकडाउन की वजह से अभी बंद हैं। सीएम केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा गया है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के निर्देश पर दिल्ली कांग्रेस प्रवासी मजदूरों की मदद करना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने ये पत्र 18 मई 2020 को लिखा है।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी और उपाध्यक्ष जयकिशन ने बिना किसी पूर्व सूचना के कई स्कूलों में बंटने वाले खाने को बंद करने के दिल्ली सरकार के फैसले का विरोध किया है।

सोमवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से लाखों मजदूर एवं उनके परिवार भुखमरी की कगार पर हैं। जिन स्कूलों में खाना आया तो वह बहुत ही कम था, सभी को नहीं मिल पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो खाना आया भी, वह घटिया क्वालिटी का था।

उन्होंने कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों, रैनबसेरों में लोग केवल इसी खाने पर निर्भर हैं। लेकिन सरकार की चिंता पेट्रोल, डीजल, शराब पर कोरोना टैक्स लगाकर खजाना भरने की है।

पैदल अपने घर लौट रहे कामगारों पर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) नेता इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं, भाजपा ने आप नेता पर पलटवार किया है। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बिधूड़ी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दिल्ली के 72 लाख लोगों के लिए प्रतिमाह 8 किलो गेहूं, 2 किलो चावल और एक किलो दाल मुफ्त उपलब्ध कराई है, लेकिन दिल्ली सरकार यह राशन गरीबों तक नहीं पहुंचा सकी।

केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने भी कहा है कि अप्रैल महीने के लिए केंद्र द्वारा जारी राशन का महज एक फीसद ही दिल्ली में वितरित हुआ है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को घर तक पहुंचाने के लिए श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। रेल मंत्रलय व जिस राज्य में मजदूर जा रहे हैं वहां की सरकार को मिलकर किराया देना है।

दिल्ली सरकार को सिर्फ मजदूरों को रेलवे स्टेशन तक पहुंचाना है। सरकार यह काम करने में भी विफल रही है। दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर 62 हजार लोगों ने घर जाने के लिए आवेदन किया है। पिछले कई दिनों तक वेबसाइट भी ठप रही है। इस अव्यवस्था से परेशान होकर लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पर चल रहे हैं। दिल्ली सरकार को तत्काल इन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए कदम उठाना चाहिए।

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