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देवउठनी एकादशी को जरूर सुनें यह कथा, होगी स्वर्ग की प्राप्ति

Dev Uthani Ekadashi Katha कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस दिन देवउठनी एकादशी कथा सुनने से स्वर्ग मिलता है।

Dev Uthani Ekadashi Katha: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। इस वर्ष देवउठनी एकादशी 08 नवंबर को है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा विधि विधान से करते हैं। ऐसी मान्यता है​ कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से उठते हैं और पूर्णिमा तक आंवले के पेड़ पर ही निवास करते हैं। इस दिन देवउठनी एकादशी की कथा सुनने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

प्रचीन काल में एक राजा के राज्य में एकादशी के दिन सभी लोग व्रत रखते थे। किसी को अन्न देने की मनाही थी। एक दिन दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के दरबार में नौकरी मांगने आया। राजा ने कहा कि नौकरी मिलेगी, लेकिन शर्त है कि एकादशी के दिन अन्न नहीं मिलेगा।

नौकरी के लालच में उसने शर्त मान ली। एकादशी के दिन उसने भी फलाहार किया लेकिन उसकी भूख नहीं मिटी। उसने राजा से कहा कि उसे खाने के लिए अन्न दिया जाए, फल से उसकी भूख नहीं मिटेगी। वह भूख के मारे मर जाएगा।

तब राजा ने शर्त की बात याद दिलाई। फिर भी वो नहीं माना। तब राजा ने उसे चावल, दाल, आटा आदि दिलाया। वह रोज की तरह नदी में स्नान करने के बाद भोजन बनाने लगा। खाने के समय उसने एक थाली भोजन निकाला और ईश्वर को भोजन के लिए आमंत्रित किया। उसके निमंत्रण पर भगवान विष्णु पीताम्बर में वहां आए और भोजन किया। भोजन के पश्चात वे वहां से चले गए। फिर वह व्यक्ति अपने काम पर चला गया।

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