दिल्ली से सटे इस गांव का मतदान केंद्र 70 किमी दूर, समस्याओं का अंबार…

ग्रेटर नोएडा में दलेलपुर नाम के गांव में साधारण सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। लोगों को वोट डालने के लिए 70 किमी के एक लंबे सफर को तय करके ग्रेटर नोएडा के ही अजायबपुर गांव जाना होता

नई दिल्ली, स्टार सवेरा ।

देश में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व यानी Loksabha Election 2019 हो रहे हैं। राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र का मंदिर यानि संसद भी है। इसी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में दलेलपुर नाम का एक गांव है। दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद इस गांव की हालत पिछड़े इलाकों से भी बदतर है।

देश को आजाद हुए 71 साल हो गए हैं, लेकिन यहां अभी तक साधारण सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि इस गांव में कोई पुलिस पोस्ट तक नहीं है। ना ही उचित सड़कें, प्राथमिक विद्यालय और ना ही कोई स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां तक कि इस गांव के लोगों को मतदान के लिए भी सड़क मार्ग से 70 किमी और नदी पार करके 16 किमी दूर जाना पड़ता है। इसे कहते हैं चिराग तले अंधेरा…।

बता दें कि दलेलपुर गांव में काफी लोग नजदीकी शहर फरीदाबाद की ओर चले गए। पहले इस गांव में 240 लोग रहते थे, जो कि अब सिर्फ ये आंकड़ा 16 लोगों तक ही सीमित रह गया है। यहां रह रहे लोगों को वोट डालना भी बेहत मुश्किल हो जाता है। एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार के अनुसार यहां के लोगों को वोट डालने के लिए 70 किमी के एक लंबे सफर को तय करके ग्रेटर नोएडा के ही अजायबपुर गांव जाना होता है। इस गांव में मतदाताओं के लिए भी कोई सुविधा नहीं है, जिससे वो अपने मत का इस्तेमाल कर सकें।
हमेशा की तरह, ग्रामीणों में इस बार भी लोकसभा चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं है। गांव के लोगों की मानें तो उनका कहना है कि, ‘कुछ 10 साल पहले यहां लगभग 240 मतदाता थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 16 रह गई है। यहां स्कूल, डिस्पेंसरी, ड्रेनेज सिस्टम की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के निवासी सभी सरकारी कल्याण योजनाओं से वंचित हैं। अधिकारी भी जनगणना या पोलियो ड्राप पिलाने तक के लिए नहीं आते हैं’।

एक निवासी का कहना है कि गांव में कभी कोई नेता या अधिकारी नहीं आता। यहां विकास के लिए भी कोई कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि ‘इस गांव में काफी कम मतदाता हैं, इसलिए कोई चुनाव के समय कोई भी राजनीतिक नेता यहां प्रचार के लिए नहीं आता। हमने पिछले लोकसभा चुनाव में 15 किमी नाव के जरिए यमुना नदी को पार करके मतदान किया, लेकिन इस बार हम वोटिंग करेंगे ये ज़रूरी नहीं हैं।’

 दिल्ली से सटे इस गांव का मतदान केंद्र 70 किमी दूर, समस्याओं का अंबार…
ग्रेटर नोएडा में दलेलपुर नाम के गांव में साधारण सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। लोगों को वोट डालने के लिए 70 किमी के एक लंबे सफर को तय करके ग्रेटर नोएडा के ही अजायबपुर गांव जाना होता

नई दिल्ली, जेएनएन।। देश में लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व यानी Loksabha Election 2019 हो रहे हैं। राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र का मंदिर यानि संसद भी है। इसी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में दलेलपुर नाम का एक गांव है। दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद इस गांव की हालत पिछड़े इलाकों से भी बदतर है।

देश को आजाद हुए 71 साल हो गए हैं, लेकिन यहां अभी तक साधारण सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि इस गांव में कोई पुलिस पोस्ट तक नहीं है। ना ही उचित सड़कें, प्राथमिक विद्यालय और ना ही कोई स्वास्थ्य केंद्र हैं। यहां तक कि इस गांव के लोगों को मतदान के लिए भी सड़क मार्ग से 70 किमी और नदी पार करके 16 किमी दूर जाना पड़ता है। इसे कहते हैं चिराग तले अंधेरा…।

बता दें कि दलेलपुर गांव में काफी लोग नजदीकी शहर फरीदाबाद की ओर चले गए। पहले इस गांव में 240 लोग रहते थे, जो कि अब सिर्फ ये आंकड़ा 16 लोगों तक ही सीमित रह गया है। यहां रह रहे लोगों को वोट डालना भी बेहत मुश्किल हो जाता है। एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार के अनुसार यहां के लोगों को वोट डालने के लिए 70 किमी के एक लंबे सफर को तय करके ग्रेटर नोएडा के ही अजायबपुर गांव जाना होता है। इस गांव में मतदाताओं के लिए भी कोई सुविधा नहीं है, जिससे वो अपने मत का इस्तेमाल कर सकें।

हमेशा की तरह, ग्रामीणों में इस बार भी लोकसभा चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं है। गांव के लोगों की मानें तो उनका कहना है कि, ‘कुछ 10 साल पहले यहां लगभग 240 मतदाता थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 16 रह गई है। यहां स्कूल, डिस्पेंसरी, ड्रेनेज सिस्टम की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के निवासी सभी सरकारी कल्याण योजनाओं से वंचित हैं। अधिकारी भी जनगणना या पोलियो ड्राप पिलाने तक के लिए नहीं आते हैं’।

एक निवासी का कहना है कि गांव में कभी कोई नेता या अधिकारी नहीं आता। यहां विकास के लिए भी कोई कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि ‘इस गांव में काफी कम मतदाता हैं, इसलिए कोई चुनाव के समय कोई भी राजनीतिक नेता यहां प्रचार के लिए नहीं आता। हमने पिछले लोकसभा चुनाव में 15 किमी नाव के जरिए यमुना नदी को पार करके मतदान किया, लेकिन इस बार हम वोटिंग करेंगे ये ज़रूरी नहीं हैं।’

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दूसरे ग्रामवासी ने कहा, ‘पिछले पांच साल में इस गांव में कोई सरकार का अधिकारी नहीं आया। हमने अपने MLA और MP तक भी नहीं देखा हैं। पास के गांव के लोग हमारे बारे में जानते तक नहीं हैं।’ यहां लोगों की सेफ्टी भी एक बड़ा मुद्दा है। बता दें कि यहां लोगों के राशन कार्ड और आधार कार्ड भी नहीं बन पाए हैं।

गौरतलब है कि देश की आजादी को इतने साल हो गए, लेकिन आज भी कुछ गांव ऐसे है जहां साधारण सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। हैरानी की बात को यह है कि दिल्ली से सटे नोएडा का यह हाल है को देश के कोनों-कोनों में बसे गांव का क्या हाल होगा? इस गांव की कानून व्यवस्था की बात करे तो अक निवासी का कहना है कि जुर्म के एक दिन बाद पुलिस पहुंचती है। बताते चले की यहां के लोग अपने नाम पर कोई दो पहिया वाहन भी नहीं ले सकते हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि अगर उत्तरप्रदेश सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर सकती तो उन्हें हरियाणा में भेजने का विचार करें, जहां हमें अच्छी बिजली मिल सके और हमारे बच्चे शहर के स्कूल में पढ़ सकें।

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