PPF से बेहतर है EPF का रिटर्न, जानिए कैसे बढ़ा सकते हैं इसमें निवेश

एंप्लॉई प्रोविडेंट पर वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 8.65 फीसद का ब्याज दिया जा रहा है

नई दिल्ली, स्टार सवेरा ।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड निवेश के साथ-साथ टैक्स सेविंग का भी एक प्रचलित माध्यम है। इसकी ब्याज दरें सरकार द्वारा हर तिमाही तय की जाती है। यह लघु बचत योजना उन लोगों के लिए ज्यादा उपयुक्त है जो नौकरीपेशा नहीं हैं। PPF लंबी अवधि में मोटा फंट जुटाने का एक अच्छा जरिया है। इसी प्रकार जो नौकरीपेशा हैं उनके वेतन से हर महीने एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड में एक खास राशि जमा की जाती है। अगर नौकरीपेशा व्यक्ति चाहें तो वह इनकम टैक्से बचाने के साथ-साथ पीपीएफ की तुलना में ज्यादा रिटर्न भी अर्जित कर सकते हैं।

जिस कंपनी या फर्म में 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं उन्हें EPF स्कीम में शामिल किया जाता है। इसका सीधा सा मतलब है कि इसका फायदा सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों को मिलता है। है। EPF में जितनी रकम कर्मचारी की तरफ से डाली जाता है उतनी ही राशि नियोक्ता की तरफ से भी जमा करवाई जाती है।

आप चुनिंदा बैंकों और पोस्ट ऑफिस में अपना PPF खाता खुलवा सकते हैं। PPF खाते में आपको न्यूनतम 500 रुपये साल में जमा करवाने होते हैं। इस खाते में आपके द्वारा जमा की गई रकम पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक के डिडक्शन यानी कटौती का लाभ मिलता है।

एंप्लॉई प्रोविडेंट पर वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 8.65 फीसद का ब्याज दिया जा रहा है। वहीं, पब्लिक प्रोविडेंट फंड की ब्याज दरें वर्तमान में 6 फीसद है। अगर आप ज्यादा ब्याज पाने के साथ-साथ इनकम टैक्स का लाभ भी चाहते हैं तो वोलंटरी प्रोविडेंट फंड यानी VPF का सहारा ले सकते हैं।

आप जिस कंपनी या फर्म में नौकरी करते हैं वहां आपके EPF के लिए नियोक्ता आपकी सैलरी से एक खास रकम काटता है। अगर आप PPF की तुलना में ज्यादा रिटर्न चाहते हैं तो आप नियोक्ता से कह कर अपने ईपीएफ खाते में ज्यादा रकम जमा करा सकते हैं। यही एक्ट्रा रकम वीपीएफ की श्रेणी में आती है। इस पर ईपीएफ के बराबर ही रिटर्न मिलता है साथ ही इनकम टैक्स में कटौती का लाभ मिलता है। इसमें आप अधिकतम सालाना डेढ़ लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं।

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