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T20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले कप्तान ने बनाई ये ‘बेहूदा’ रणनीति, औंधे मुंह गिरी टीम इंडिया!

अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले T20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले कप्तान विराट और टीम मैनेजमेंट ने एक बेहूदा रणनीति बनाई है जो फेल साबित हुई है।

नई दिल्ली, 21 मई को वनडे विश्व कप के लिए इंग्लैंड जाने से पहले मुंबई में हुई प्रेस कांफ्रेंस में भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा था कि कुलदीप यादव और युजवेंद्र सिंह चहल हमारे गेंदबाजी आक्रमण के स्तंभ हैं। यह उन्होंने तब कहा था जब इन दोनों गेंदबाजों का ठीक पहले आइपीएल में प्रदर्शन खराब रहा था।

विश्व कप में कुलदीप ने सात मैचों में छह विकेट लिए जबकि चहल ने आठ मैचों में 12 विकेट हासिल किए। विश्व कप के दौरान ऐसे कौन से समीकरण बदले जो विराट एंड कंपनी ने इन दोनों को टी-20 से आराम देने का फैसला कर लिया। डेढ़ महीने पहले विराट जिनको अपने गेंदबाजी आक्रमण का स्तंभ बता रहे थे उसे ही भारत आते ही उन्होंने गिरा दिया।

युवाओं पर निर्भर होगी भारतीय टीम?

ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब सिर्फ युवाओं को मौका देने के लिए टीम के स्थापित खिलाड़ियों को हटाया जाए। सिर्फ युवाओं को मौका देने के लिए 24 वर्षीय कुलदीप और 29 वर्षीय युजवेंद्र को वेस्टइंडीज दौरे की टी-20 टीम और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टी-20 मैचों की सीरीज की टीम से हटा दिया गया।

खास बात यह है कि यह इन दोनों को आराम देने के लिए यह नहीं किया गया है। ऐसा भी नहीं है कि ये दोनों अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप तक इतने बुजुर्ग हो जाएंगे कि प्रत्येक मैच में चार-चार ओवर नहीं फेंक सकेंगे। कलाई के स्पिनर कुलदीप की उम्र तो सिर्फ 24 वर्ष है जबकि फिलहाल टी-20 टीम के सदस्य रवींद्र जडेजा छह दिसंबर को 31 साल के हो जाएंगे।

टीम प्रबंधन ‘कुलचा’ की जगह जिन युवाओं को मौका देने की बात कह रहा है उन पर भी एक नजर डालनी चाहिए। पिछली दो सीरीज में जिन तीन स्पिनरों को मौका दिया गया उसमें वाशिंगटन सुंदर की उम्र 19 तो राहुल चाहर की उम्र 20 वर्ष है। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की नजर में जिन बाकी दो युवा स्पिनरों क्रुणाल पांड्या और रवींद्र जडेजा को जगह दी गई उनकी उम्र क्रमश: 28 और 30 वर्ष है। ये विराट की नजर में युवा हो सकते हैं लेकिन क्रिकेट में इस उम्र के खिलाड़ी को युवा नहीं कहा जा सकता।

कुल मिलाकर जैसे इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप से ठीक पहले युवा विजय शंकर को खिलाने के लिए अंबाती रायुडू का पत्ता काटकर टीम इंडिया ने अपनी लुटिया डुबोई थी कुछ उसी तरह की तैयारी एक बार फिर से शुरू हो गई है। इसका नतीजा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टी-20 मुकाबले में दिखाई भी दे गया जिसमें दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों ने नौ विकेट चटकाए जबकि भारतीय गेंदबाज ‘तथाकथित मौके’ को भुनाते हुए सिर्फ एक विकेट ही हासिल कर सके। अगर इसमें सुधार नहीं किया गया तो ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप में भी इंग्लैंड विश्व कप की झलक देखने को मिल सकती है।

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