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क्या होता है एडजस्टमेंट डिसॉर्डर, एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण, बचाव और उपचार

दूसरों के साथ तालमेल न बिठा पाना भी एक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्या है जिसे एडजस्मेंट डिसॉर्डर कहा जाता है। क्यों होता है ऐसा आइए जानें एक्सपर्ट के साथ।

नए माहौल के साथ सामंजस्य स्थापित करने में सभी को थोड़ी दिक्कत हो सकती है लेकिन सामान्य स्थितियों में ऐसी समस्या जल्द ही दूर हो जाती है। मुश्किल तब आती है, जब कोई व्यक्ति नए परिवेश के साथ एडजस्टमेंट की कोशिश नहीं करता या ऐसा करने में उसे बहुत तकलीफ होती है। अगर कोई व्यक्ति छह महीने के बाद भी नए माहौल के अनुकूल स्वयं को ढालने में असमर्थ हो तो ऐसी मनोदशा को एडजस्मेंट डिसॉर्डर कहा जाता है।

ब्रेन की संरचना को भी इसके लिए जि़म्मेदार माना जाता है। कुछ लोगों में जन्मजात रूप से तनाव झेलने की क्षमता बहुत कम होती है। ऐसे लोगों को यह समस्या हो सकती है।

आधुनिक जीवनशैली की वजह से पैदा होने वाली व्यक्तिवादी सोच इस समस्या के लिए जि़म्मेदार है। दरअसल नई पीढ़ी के लोग दूसरों के साथ अपना स्पेस और टाइम शेयर करने को तैयार नहीं होते। ऐसे आदत को वजह से लोगों को एडजस्टमेंट की समस्या हो सकती है। टीनएजर्स में माता-पिता के झगड़े, स्कूल में टीचर्स या दोस्तों के व्यवहार से जुड़ी कोई परेशानी या शारीरिक बदलाव से जुड़ी चिंता के कारण भी यह समस्या पैदा हो सकती है।

किसी तनावपूर्ण स्थिति में जाने के कुछ महीने बाद लोगों में विद्रोही व्यवहार, अनावश्यक चिंता, उदासी, एकाग्रता में कमी, स्वयं को लाचार महसूस करना, आत्मविश्वास का कमज़ोर पडऩा आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा एडजस्मेंट डिसॉर्डर से पीडि़त लोगों में कुछ शारीरिक लक्षण भी नज़र आते हैं। जो इस प्रकार हैं, अनिद्रा, मांसपेशियों में खिंचाव, दर्द या सूजन, अनावश्यक थकान, पाचन-क्रिया में गड़बड़ी आदि।

शादी, होम शिफ्टिंग या करियर संबंधी बदलाव के लिए पहले से ही मानसिक रूप से तैयार रहने की कोशिश करें।

परिवार के सदस्यों, दोस्तों, पड़ोसियों या कलीग्स की भी यह जि़म्मेदारी बनती है कि वह अपने शालीन व्यवहार से नए माहौल में आने वाले व्यक्ति को सहज महसूस करवाए।
अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार में ज्य़ादा उदासीनता नज़र आए तो परिवार के सदस्यों को उसके साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए। अगर इन कोशिशों के बावज़ूद कोई व्यक्ति की आदतों में बदलाव न आए एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

आमतौर पर काउंसलिंग और कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरेपी से यह समस्या दूर हो जाती है। शारीरिक लक्षणों जैसे, अनिद्रा और पाचन-तंत्र से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए मरीज़ को कुछ दवाएं भी दी जाती हैं। उपचार के बाद व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव नज़र आने लगता है।

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