अंतरिक्ष में कैसे किया जा सकता है सेक्स, जानें, क्या जवाब दिया पूर्व NASA प्रमुख ने

इस विवादास्पद सवाल को लेकर हमने बात की जनरल चार्ल्स बोल्डन से, जो चार अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े रहे हैं, और आठ साल तक NASA के प्रमुख रह चुके हैं.

अंतरिक्ष यात्रा पहले के मुकाबले सस्ती होती जा रही है, और अब तो प्राइवेट अमेरिकी कंपनियों के पास क्रू मॉड्यूल मौजूद हैं, जिनके ज़रिये वे इंसानों को अंतरिक्ष में सैर के लिए ले जाने की तैयारी कर रही हैं. लेकिन इस तरक्की से जुड़ा एक सवाल भी है, जो विशेषज्ञों को लगातार परेशान कर रहा है कि जब आज नहीं तो कल, अंतरिक्ष में इंसानों की बस्ती को हकीकत बन ही जाना है, तो गुरुत्वाकर्षण के बिना ढेरों रेडिएशन वाले उस ‘दुश्मन’ वातावरण में इंसान सेक्स कैसे कर पाएगा.

अब भारत भी ‘गगनयान’ के साथ मानव को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में लगा हुआ है, और अमेरिका प्राइवेट रॉकेटों के ज़रिये अंतरिक्षयात्रियों को भेजने जा रहा है, क्योंकि इंसान अब अंतरिक्ष में मौजूद ग्रहों (उपग्रहों) पर बसने का विचार बना रहा है, तो मानव जीवन को बनाए रखने से जुड़े सवालों के जवाब तलाश करना भी ज़रूरी हो चला है. इस विवादास्पद सवाल को लेकर हमने बात की जनरल चार्ल्स बोल्डन से, जो चार अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े रहे हैं, और आठ साल तक NASA के प्रमुख रह चुके हैं. इस समय जनरल चार्ल्स बोल्डन भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग का प्रचार-प्रसार करने के लिए भारत आए हुए हैं.

स्टार सवेरा के साइंस एडिटर पल्लव बागला ने NASA के पूर्व प्रमुख, दिग्गज अंतरिक्ष यात्री तथा मौजूदा समय में अमेरिका के अंतरिक्ष मामलों के विज्ञान दूत से इन्हीं सवालों के जवाब हासिल करने की कोशिश की, कि इंसान गुरुत्वाकर्षण के बिना अंतरिक्ष में सेक्स कैसे कर पाएगा, या बच्चे कैसे पैदा करेगा.

प्रश्न : यदि हम किसी दूसरे ग्रह या चांद पर जाकर बस जाते हैं, तो बच्चे कैसे पैदा करेंगे…?

उत्तर : हम्म… ओह, अगर आपको बच्चे पैदा करने होंगे, तो उसी तरह करने होंगे, जिस तरह हम पैदा हुए… यह एक पुरुष और महिला के बीच का मामला है, और आप जानते ही हैं, सब हो जाता है…

जहां तक मेरी जानकारी है, मुझे नहीं लगता, इस मुद्दे पर कुछ ज़्यादा रिसर्च की गई है कि यह कैसे होगा, क्योंकि यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसे अंतरिक्ष में बाथरूम जाना… हम कोई नई चीज़ ईजाद नहीं करते हैं, सच यही है कि क्रू माइक्रो-ग्रैविटी में रहता है, और इसीलिए उन्हें खुद को स्थिर रखना सबसे ज़रूरी है… हम टॉयलेट की साइड पर छोटे-छोटे हैंडल लगा देते हैं, उन्हें घुमाओ, बस… वे स्प्रिंग-लोडेड होते हैं, और आपकी जांघ पर टिके रहते हैं… आप इसी तरह का कुछ कर सकते हैं, जो आप वहां करते हैं… जब आप बाथरूम जाते हैं, हम एक फैन सिस्टम की मदद से सक्शन पैदा करते हैं, जो एक बहुत छोटे वैक्यूम क्लीनर जैसा होता है…

हम उन हालात में ढल जाते हैं, जिनमें हम रहते हैं… धरती पर हम जो कुछ भी कर पाते हैं, उसे अंतरिक्ष में करने से रोकने या मुश्किल बना देने वाली बात है कि वहां गुरुत्वाकर्षण नहीं होता… लेकिन जब भी कुछ करने का वक्त आता है, लोग कोई न कोई रास्ता निकाल ही लिया करते हैं…

प्रश्न : आपसे साफ-साफ पूछते हैं, कोई अंतरिक्ष में यौन संबंध कैसे बना सकता है…?

उत्तर : मुझे उम्मीद है, बिल्कुल उसी तरह, जैसे हम धरती पर सेक्स करते हैं, लेकिन पक्का नहीं कह सकता…

प्रश्न : लेकिन गुरुत्वाकर्षण के बिना…?

उत्तर : इसीलिए मैंने कहा, आप कोई न कोई रास्ता खोज लेंगे…

प्रश्न : तो आपको बांध देना पड़ेगा…?

उत्तर : मैं नहीं जानता, क्योंकि वह शख्स मैं नहीं होऊंगा… इंसान हर काम का तरीका खोज ही लेता है… आपको डॉ रूथ (वेस्थीमर) से बात करनी चाहिए, क्योंकि जब मैं पहली बार डॉ रूथ से मिला था, मैंने यह बात उनसे की थी, और मैं तब भी उतना ही भौंचक्का रह गया था, जितना आज हूं…

इस तरह की अफवाहें अक्सर उड़ती रही हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में अंतरिक्ष यात्री सेक्स करते रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से NASA हमेशा इसका खंडन करता रहा है. ISS दरअसल अरबों डॉलर के खर्च से बनाई गई ऐसी प्रयोगशाला है, जो लगातार धरती की परिक्रमा करती रहती है, औऱ जिसमें हर समय मानव मौजूद रहे हैं. ISS पिछले 18 साल से धरती की निचली कक्षा में चक्कर काट रहा है.

एयरस्पेस फिज़ीशियन तथा NASA के अंतरिक्ष यात्री डॉ माइकल आर. बैरेट का कहना है कि आजकल चुने जाने वाले अधिकतर अंतरिक्ष यात्री काफी परिपक्व लोग होते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में शांत रहना जानते हैं. बैरेट यह भी कहते हैं कि गुरुत्वाकर्षण-रहित अंतरिक्ष में गर्भ धारण करना और गर्भावस्था हरगिज़ नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अब तक हम जीवविज्ञान को पूरी तरह नहीं समझते हैं. लेकिन बैरेट के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती है “उच्च रेडिएशन के संपर्क में गैरज़रूरी रूप से रहना, जब कोई धरती के सुरक्षाकवच से बाहर होता है…” दरअसल, पृथ्वी हमें जीवन को सहारा देने वाला आदर्श ‘गोल्डिलॉक्स वातावरण’ उपलब्ध कराती है.

इन सवालों के अलावा जनरल चार्ल्स बोल्डन का मानना है कि एक भारतीय युवक या युवती को श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष में भेजने का भारत का सपना पूरा होने की काफी संभावना है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ के. सिवन ने ‘गगनयान मिशन’ के बारे में कहा कि ‘जब निकट भविष्य में अंतरिक्ष में मौजूद ग्रहों-उपग्रहों पर इंसानी बस्ती बनेंगी ही, तो भारत भी पीछे नहीं रहना चाहता है…’ उम्मीद है कि ISRO अब मानव जीव विज्ञान पर भी दोगुनी गति से काम कर रहा होगा, क्योंकि भले ही वे शानदार रॉकेट और उपग्रह बनाते हैं, लेकिन मानव जीवविज्ञान के क्षेत्र में वे उतने मज़बूत अब तक नहीं रहे हैं.भारत जो सैटेलाइट और अंतरिक्ष यान बनाता है, मानव अंतरिक्ष में जाकर बसने के लिए शर्तिया उन्हीं का इस्तेमाल करेगा, लेकिन अंतरिक्ष में पहुंचकर वह बच्चे कैसे पैदा कर पाएगा, यह अब भी एक अनुत्तरित सवाल है.

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