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अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 1.1 फीसद घटा, मैन्युफैक्चिरिंग सेक्टर में आई कमी

अगस्त में IIP में गिरावट दर्ज की गई यह 1.1 फीसद कम हो गया 2018 में औद्योगिक उत्पादन में 4.8 फ़ीसद की वृद्धि दर्ज की गई थी।

नई दिल्ली, घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती गहराने के संकेत हैं। मैन्युफैक्चिरिंग, बिजली और खनन क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन की वजह से अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन 1.1 फीसद घट गया। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। अगस्त, 2018 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 4.8 फ़ीसद की वृद्धि दर्ज की गई थी।

अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन 1.2 फ़ीसद घट गया। अगस्त, 2018 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के उत्पादन में 5.2 फीसद वृद्धि दर्ज की गई थी। IIP में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 77 फीसद है।

वहीं, बिजली क्षेत्र का उत्पादन 0.9 फीसद कम हो गया। अगस्त, 2018 में बिजली क्षेत्र के उत्पादन में 7.6 फीसद वृद्धि दर्ज की गई थी। खनन क्षेत्र के उत्पादन की वृद्धि 0.1 फीसद पर स्थिर रही। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त की अवधि के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 2.4 फीसद रह गई है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 5.3 फीसद रही थी।

अर्थव्यवस्था को सुस्ती से उबारने के लिए सरकार की तरफ से हाल के दिनों में ताबड़तोड़ फैसले किए गए हैं। बावजूद इसके इंडस्ट्री की रफ्तार में अब तक सुधार के संकेत नहीं हैं। त्योहारों का सीजन होने के बावजूद उद्योग, खास तौर पर वाहन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में अब तक मांग में खास ब़़ढोतरी नहीं देखी गई है। रिजर्व बैंक ने भी हाल की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.10 फीसद कर दिया है। मांग ब़़ढाने के लिए रिजर्व बैंक मुख्य नीतिगत दर रेपो रेट में लगातार कटौती कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वित्त वषर्ष 2024–25 तक पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। मोदी–2.0 सरकार के 50 दिन पूरे होने के मौके पर जारी रिपोर्ट कार्ड में दावा किया था कि यह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। बीते वित्त वषर्ष यानी 2018–19 की अंतिम तिमाही (जनवरी–मार्च) में देश की आर्थिक विकास दर घटकर 5.8 फीसद रह गई थी। यह इसका करीब पांच साल का निचला स्तर है।

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