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IPL 2021 के नहीं होगा क्रिकेटरों का मेगा ऑक्शन, BCCI के सामने हैं ये चुनौतियां

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 13वें सीजन के लिए ऑक्शन दिसंबर 2019 में हुआ था। ये एक मिनी ऑक्शन था, क्योंकि 2021 के सीजन के लिए दिसंबर 2020 में मेगा ऑक्शन होना था, जिसमें टीमें फिर से बनाई जातीं, लेकिन अब ये संभव नहीं है। दरअसल, कोरोना वायरस महामारी की वजह से ऐसा हुआ है, क्योंकि आइपीएल 2020 की शुरुआत 29 मार्च से होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और लीग को सितंबर-नवंबर तक के लिए टालना पड़ा। ऐसे में अगले साल होने वाले आइपीएल के लिए मेगा ऑक्शन होना लगभग असंभव हो गया है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआइ भी तमाम परेशानियों से बचने के लिए इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के 2021 के संस्करण से पहले निर्धारित क्रिकेटरों की मेगा नीलामी की मेजबानी नहीं करेगी। कोविड -19 ने सुनिश्चित किया है कि नीलामी, जिसमें सभी फ्रेंचाइजी को अपनी टीमों का पुनर्निर्माण करना था, उसे अब अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जा रहा है। एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि खिलाड़ी अगले साल भी आइपीएल में इन्हीं खिलाड़ियों के साथ उतरेंगी। जरूरत पड़ने पर खिलाड़ी बदले जा सकते हैं।19 सितंबर से यूएई में शुरू होने जा रहे आइपीएल 2020 का फाइनल मुकाबला 10 नवंबर को खेला जाएगा, जबकि 2021 का आइपीएल अपने निर्धारित समय यानी अप्रैल-मई में खेला जाएगा। ऐसे में बीसीसीआइ के पास कुछ ही महीनों का समय है। इस बीच बीसीसीआइ कब आइपीएल का मेगा ऑक्शन कराएगी। इस पर संशय बना हुआ था, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो बीसीसीआइ ने 2021 आइपीएल मेगा ऑक्शन को अनिश्चितकाल के लिए टाल गिया है।

BCCI के सामने हैं ये चुनौतियां

एक टीम को एक सीजन के ऑक्शन पर्स की वैल्यू 85 करोड़ रुपये मिलती है, लेकिन इस समय टीमों के पास उतना पैसा नहीं होगा, क्योंकि 2020 के आइपीएल से टीमें उतना नहीं कमा पाएंगी। इसके अलावा भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट करना और फिर ऑक्शन कराना बहुत लंबी प्रक्रिया है। वहीं, फ्रेंचाइजी को बोली की तैयारी करने के लिए 4-6 महीने का समय लगता है, जिसमें नीलामी की रणनीति बनती है। ऐसे में बीसीसीआइ को भी ये स्वीकार करना होगा कि ये आसान नहीं है।

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