कर्नाटक : CM कुमारस्वामी ने फेंका ऐसा पासा कि बीजेपी को भी भेजने पड़े अपने विधायक होटल के अंदर, 10 बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर को मंगलवार तक बाग़ी विधायकों के इस्तीफ़े या उनके निलंबन पर किसी भी तरह का फ़ैसला लेने पर रोक लगा दी है. लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने सदन में ये कहकर सबको चौंका दिया कि वो विश्वासमत हासिल करने को तैयार हैं.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर को मंगलवार तक बाग़ी विधायकों के इस्तीफ़े या उनके निलंबन पर किसी भी तरह का फ़ैसला लेने पर रोक लगा दी है. लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने सदन में ये कहकर सबको चौंका दिया कि वो विश्वासमत हासिल करने को तैयार हैं. उनके इतना कहते ही बीजेपी ने अपने विधायकों को होटल में भेजने का फ़ैसला किया ताकि उन्हें खरीद फ़रोख्त से बचाया जा सके. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधान सभा के स्पीकर को मंगलवार तक बागी विधयकों के इस्तीफे या उनके निलंबन पर किसी भी तरह का फैसला लेने पर रोक लगा दी है.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  • कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन और विपक्षी दल बीजेपी विधानसभा में संभावित विश्वास मत के पहले अपने विधायकों पर नजर रखे हुए हैं. उन्हें विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका है. कांग्रेस के 79 विधायकों में से 13 विधायकों ने विधानसभा से अपना इस्तीफा दे दिया है.
  • कांग्रेस ने अपने करीब 50 विधायकों को नगर के बाहरी इलाके स्थित क्लार्क एक्जॉटिका कन्वेंशन रिसॉर्ट भेज दिया है. वहीं, सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और अन्य मंत्री नगर स्थित अपने आवास में ठहरे हुए हैं.
  • बेंगलुरू के बाहर और आसपास के इलाके के विधानसभा क्षेत्रों से आने वाले विधायकों को रिसॉर्ट भेजा गया है. हालांकि कई विधायक विधानसभा भवन के पीछे सिटी सेंटर स्थित विधान सौध में ठहरे हुए हैं.
  • जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) भी नंदी पहाड़ी के समीप गोल्फशायर रिसॉर्ट में अपने करीब 30 विधायकों पर नजर बनाए हुए है. जेडीएस के तीन विधायकों के इस्तीफा देकर छह जुलाई को मुंबई चले जाने के बाद सात जुलाई से ये विधायक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं.
  • बीजेपी ने भी शुक्रवार को अपने सभी विधायकों को बेंगलुरू के नजदीक स्थित एक रिसॉर्ट में रखने का फैसला किया है. भाजपा प्रवक्ता जी. मधुसूदन ने बताया, “हमें अपने विधायकों को एक रिसॉर्ट भेजने को बाध्य होना पड़ा है ताकि उनसे एक जगह परामर्श व विचार-विमर्श किया जा सके और उन्हें कांग्रेस व जेडीएस के किसी नेता से बातचीत करने से रोका जा सके.”
  • अध्यक्ष के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन का कुल संख्याबल 116 (कांग्रेस-78, जद(एस)-37 और बसपा-1) है. दो निर्दलीय उम्मीदवारों का भी सरकार को समर्थन प्राप्त था,
  • लेकिन, उन्होंने सोमवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उधर, भाजपा के पास 107 विधायक हैं. 224 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 113 विधायकों का समर्थन जरूरी है. अगर 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो गठबंधन का संख्याबल घटकर 100 रह जाएगा.
  • इससे पहले शुक्रवार को सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी थीं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक़ कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने 10 बागी विधायकों से मुलाकात तो की लेकिन उनके इस्तीफ़े पर फैसला नहीं लिया. उन्होंने अदालत को बताया कि इस्तीफों पर फैसले के लिए और वक़्त चाहिए
  • वहीं मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के वकील ने कहा कि अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना ही नहीं चाहिए था. कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर की तरफ से राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. इस याचिका में एक शब्द भी ऐसा नही है जिसपर आर्टिकल 32 के तहत सुनवाई की जाए.
  • इसके बाद अदालत ने बागी विधायकों के इस्तीफ़े या उनके ख़िलाफ़ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई पर मंगलवार तक रोक लगा दी. अब अदालत मंगलवार को पहले अपनी और विधान सभा अध्यक्ष की सीमाओं को तय करेगी.

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