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महाराष्ट्र तक पहुंची टिड्डियां, यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और हरियाणा में अलर्ट, मानसून से पहले न‍हीं हुआ कंट्रोल तो.

टिड्ड‍ियों ने महाराष्ट्र पर भी धावा बोल दिया है। संकट पर मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश राजस्थान उत्तराखंड पंजाब और हरियाणा ने अलर्ट जारी किया है। वैज्ञानिकों ने भी चेतावनी दी है

नई दिल्ली, टिड्डी दल राजस्थान के रास्ते मध्य प्रदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र में प्रवेश कर गए हैं। इस बार इनका आकार बड़ा भी है। लॉकडाउन के चलते पूरी तरह से रोकथाम नहीं हो पाने से इनका मूवमेंट भी बढ़ा है। यही वजह है कि खतरे को भांपते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा ने अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही इनके निस्तारण के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उप्र में टिड्डियों को भगाने के बजाय नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि यदि मानसून से पहले इनको खत्‍म नहीं किया गया तो भविष्‍य के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

मध्‍य प्रदेश के जिलों में नियंत्रण के लिए कीटनाशक का छिड़काव लगातार किया जा रहा है। इस कार्रवाई में बचे हुए टिड्डियों के झुंड सीधी-सिंगरौली होते हुए उत्तर प्रदेश और बैतूल के रास्ते महाराष्ट्र प्रवेश कर गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के आते-आते टिड्डी पर पूरी तरह नियंत्रण हो जाएगा। मध्‍य प्रदेश के 30 से ज्यादा जिले टिड्डियों से प्रभावित हैं। मंदसौर और नीमच के रास्ते मध्य प्रदेश में आए टिड्डी दल पर केंद्र और राज्य सरकार की टीमें लगातार नजर रख रही हैं।

हवा के बदली दिशा के बावजूद बुधवार को भी कई छोटे टिड्डी दल झांसी की ओर उड़ते देख गए। एक छोटा दल सोनभद्र तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश राज्य कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार झांसी जिले की मोठ व गरौठा तहसील क्षेत्र में टिड्डियों ने हमला किया परंतु संख्या अधिक न होने के कारण फसलों को कम नुकसान हो पाया। नियंत्रण टीमों ने ग्रामीणों के सहयोग से टिड्डियों को भगा दिया।

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही का कहना है कि टिड्डियां नुकसान न करने पाएं, इसलिए उनको भगाने के बजाय रासायनिक दवाओं का छिडक़ाव कर नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। झांसी में 40 प्रतिशत टिड्डियों को नष्ट करने में कामयाबी भी मिली है।

टड्डियों का झुंड आगरा और हमीरपुर के करीब आ पहुंचा है। बुधवार देर शाम तक हमीरपुर के बेतवा नदी के तट पर हरियाली के चलते इनके रुकने की आशंका को देखते हुए हमीरपुर में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। हमीरपुर से कानपुर देहात और फिर उन्नाव के रास्ते इनके लखनऊ में प्रवेश करने की आशंका जताई जा रही है। इसके चलते सभी को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्‍तर प्रदेश के कृषि निदेशक सौराज सिंह ने कहा कि टिड्डियों का मध्य प्रदेश की ओर अधिक जोर होने के बावजूद सीमावर्ती जिलों में पूरी सतर्कता बरती जा रही है। झांसी से भगाए गए टिड्डी दल के जालौन और हमीरपुर की ओर बढ़ने की आशंका है। इसलिए दोनों जिलों में हाई अलर्ट किया गया है।

पाकिस्तान और राजस्थान सीमा से सटे होने के कारण इनका खतरा पंजाब को भी है। फाजिल्का जिले में पहले भी कई गांवों में टिड्डियों को देखा भी गया है, लेकिन जितना यहां देखा गया है, यह किसी बड़े झुंड से टूटा हुआ हिस्सा ही है। पंजाब सरकार ने फरीदकोट, फाजिल्का व बठिंडा में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

सीमावर्ती राज्यों से टिड्डी दल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमा तक चढ़ आया है। मौसम में गरमी के प्रकोप से इनका हमला और तेज हो गया है। राजस्थान और हरियाणा के मेवात होते हुए टिड्डियों का दल राजधानी दिल्ली ओर बढ़ रहा है। टिड्डियों को खत्‍म करने के लिए भारत ने टिड्डी उन्मूलन के लिए ईरान और अफगानिस्तान को मदद करने का दिया भरोसा है। हालांकि प्रभावित क्षेत्रीय देशों की बुलाई बैठक में पाकिस्तान ने हिस्सा नहीं लिया है।

टिड्डियों के हरियाणा की तरफ रुख करने से प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों को हाई-अलर्ट पर रखा गया है। सभी जिलों में दवाइयों का भंडारण किया जा चुका है।

प्रदेश के कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल ने कहा कि कृषि विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। राहत की बात यह है कि हवा के रुख के साथ टिड्डी दल राजस्थान-गुजरात चला गया है। हरियाणा में इक्का-दुक्का जगहों पर टिड्डी को देखा गया है। हरियाणा कृषि विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएचएयू) के कीट विज्ञानियों का कहना है कि अभी टिड्डी दल हरियाणा सीमा से 135 किलोमीटर दूर है।

इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आइसीएआर) के महानिदेशक डॉक्टर टी महापात्र का कहना है कि इन टिड्डी दलों के प्रकोप का कोई असर रबी सीजन की गेहूं, दलहन व तिलहन वाली फसलों पर नहीं हुआ है।

डॉक्टर महापात्र ने कहा कि जून व जुलाई के दौरान मानसून के आने से उनका प्रजनन बहुत बढ़ जाएगा, जो खरीफ की फसलों के लिए बड़ा खतरा है। मानसून से पहले इन्हें खत्म करना जरूरी है। इस समय इन क्षेत्रों में 700 से अधिक ट्रैक्टरों को कीटनाशकों के छिड़काव के लिए लगा दिया गया है। अब तक इन टिड्डी दलों ने 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा खेतों पर हमला किया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें टिड्डी दलों के भारतीय सीमा में प्रवेश से पहले ही रबी सीजन की फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी थी, लिहाजा कोई नुकसान नहीं हुआ है। राजस्थान व गुजरात में टिड्डी दलों को कुछ हरी वनस्पतियां नहीं मिलने की दशा में उनका दल तेजी से आगे बढ़ा है। तेज हवाओं से उनके उड़ने की रफ्तार बढ़ जाती है।

यही कारण है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जिलों तक दिखने लगे हैं। केंद्रीय व राज्य एजेंसियां इस दिशा में कारगर तरीके से काम कर रही हैं। वहीं लोकस्ट वार्निग ऑर्गनाइजेशन (एलडब्ल्यूओ) के अधिकारियों का कहना है कि उत्तरी राज्यों में सक्रिय टिड्डी दलों का सफाया जल्दी ही कर लिया जाएगा।

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