उत्तराखंड : मुकेश अंबानी के बेटे को बीजेपी सरकार ने दी जिम्मेदारी, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी में मिला यह पद

उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने उद्योगपति मुकेश अंबानी(Mukesh Ambani) के बेटे अनंत अंबानी( Anant Ambani) को बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर कमेटी (Badrinath Kedarnath Temple Committee) का सदस्य नियुक्त किया है.

खास बातें

  • उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार का फैसला
  • बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी में शामिल होंगे अनंत अंबानी
  • मुकेश अंबानी के छोटे बेटे हैं अनंत अंबानी

नई दिल्ली, स्टार सवेरा ।

उत्तराखंड में बीजेपी सरकार ने उद्योगपति मुकेश अंबानी(Mukesh Ambani) के बेटे अनंत अंबानी( Anant Ambani) को बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर कमेटी (Badrinath Kedarnath Temple Committee) का सदस्य नियुक्त किया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह नियुक्ति की है. चार धाम में शामिल इस मंदिर का समस्त प्रबंधन और प्रशासन यही कमेटी करती है, जिसमें अनंत को जगह मिली है. अनंत अंबानी मुकेश के छोटे बेटे हैं. उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ धाम मंदिर के कपाट करीब छह महीने तक बंद रहने के बाद 9 मई को फिर से खुलेंगे. अधिकारियों ने महाशिवरात्रि के दिन ये जानकारी दी.कपाट खोलने की तारीख और समय की घोषणा महाशिवरात्रि के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में की गई.

पुजारियों ने मंत्रोच्चारण और शंखध्वनि के बीच यह घोषणा की. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर के एक अधिकारी ने कहा, “केदारनाथ मंदिर 9 मई को सुबह 5.35 बजे फिर से खुल जाएगा.”केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री, जिन्हें सामूहिक रूप से चारधाम कहा जाता है, हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद हो जाते हैं और छह महीने के अंतराल बाद अप्रैल-मई में फिर से खोल दिए जाते हैं.

बद्रीनाथ यानी बद्रीनारायण मंदिर उत्तराखंड के चमोली जनपद में अलकनन्दा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है. मंदिर के इर्द-गिर्द बसे नगर को बद्रीनाथ कहा जाता है. इसी तरह केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है. हिमालय पर्वत की गोद में स्थित यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग में शम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से एक है. आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था. उत्तराखंड में केदारनाथ और बद्रीनाथ दो प्रधान तीर्थ हैं. ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है तो उसकी यात्रा निष्फल मानी जाती है.

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