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देश में Chronic Obstructive Pulmonary Disease के 3 करोड़ मरीज, ऐसे करें बचाव

यह बीमारी प्रमुख रूप से धूमपान करने वालों को होती है लेकिन धूमपान न करने वाले भी इसका शिकार हो सकते हैं।

नई दिल्‍ली । देश में दमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे मरीजों की समस्या स्मॉग या प्रदूषित वातावरण में और भी बढ़ जाती है। इन मरीजों को अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर के परामर्श से इनहेलर और दवाओं की मात्रा सुनिश्चित करवानी चाहिए।

सीओपीडी वाले सजग रहें

स्मॉग की स्थिति क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की स्थिति को बदतर बना सकती है। देश में सीओपीडी के लगभग तीन करोड़ मरीज हैं। यह बीमारी प्रमुख रूप से धूमपान करने वालों को होती है, लेकिन धूमपान न करने वाले भी इसका शिकार हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से बॉयोमास ईंधन का उपयोग करने वाली महिलाएं व परोक्ष धूमपान (पैसिव स्मोकिंग) से प्रभावित व्यक्ति शामिल हैं।

मानक के अनुरूप मास्क जैसे एन-95 का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर मास्क का इस्तेमाल नहींकर पा रहे हैं तो अपने पास रूमाल या गमछा रखें और उसे नाक को कवर करते हुए बांध लें। शाम को घर पहुंचकर गर्म पानी से भाप लें, जो आपकी सांस नली को साफ करने का काम करती है।

आंखों में जलन साथ ही आंखों से पानी आ सकता है। इससे बचाव के लिए आंखों पर चश्मा लगाएं।
छींक आना, नाक में खुजली होना, नाक बहना व नाक बंद होना इस समस्या के आम लक्षण हैं। गर्म पानी की भाप लेना इसमें कारगर सिद्ध होता है।

गले में खराश और खांसी पैदा हो सकती है। इसके लिए गुनगुने पानी से गरारे करना लाभकारी होता है।

यह प्रदूषण फेफड़ों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होता है। यह प्रदूषण सांस की कई बीमारियों का भी कारक है।

हाई ब्लड प्रेशर तथा लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने से हार्ट अटैक की आशंका भी अन्य स्वस्थ लोगों की तुलना में काफी बढ़ जाती है।

लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने से खुजली एवं त्वचा का कैंसर भी हो सकता है।

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