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बेहद घातक हो सकती है ड्राइविंग के समय आने वाली झपकी, इसके पीछे हैं ये बड़ी वजह

ड्राइविंग के दौरान झपकी का आना न सिर्फ आपके बल्कि दूसरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। यह सब होता है Obstructive Sleep Apnea की वजह से।

नई दिल्‍ली । कई बार हाईवे पर एक्‍सीडेंट की एक बड़ी वजह ड्राइवर को नींद की झपकी आना भी होता है। भारत के विभिन्‍न राजमार्गों पर हर रोज 400 एक्‍सीडेंट होते हैं। हर साल करीब डेढ़ लाख लोग इनमें अपनी जान गंवा देते हैं। 2017 के आंकड़ों के मुताबिक हर दस मिनट में तीन लोगों की मौत होती है। 2017 की ही बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 4,64,910 कुल एक्‍सीडेंट हुए जिनमें 1,47,913 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 2016 में यही आंकड़ा 1,50,785 था।

हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय के इन आंकड़ों में देश-भर की सभी छोटी-बड़ी सड़कों को शामिल किया गया है। बहरहाल, हम यहां पर आपको हादसों के पीछे एक बड़ी वजह की जानकारी दे रहे हैं, जो हमारे और आपके शरीर से जुड़ी हुई है। यह इसलिए भी जरूरी हैं क्‍योंकि हमारे देश के हाईवे इस तरह के हादसों के लिए बदनाम होते जा रहे हैं। ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं है बल्कि दुनिया के कई देशों में सड़क हादसों की यह एक बड़ी वजह है।
बेहद घातक है ड्राइविंग के समय झपकी आना

गाड़ी चलाते समय नींद की झपकी आना कई लोगों के लिए बड़ी समस्‍या है। लेकिन यदि आप ड्राइवर के पेशे में हैं तो यह आपके और अन्‍य लोगों के लिए बेहद घातक है। लिहाजा हम सभी के लिए इस समस्‍या की इस बड़ी के कारणों को जानना बेहद जरूरी है। दरअसल, इसके पीछे पर्याप्‍त नींद न होना होता है। जानकार इस बीमारी को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप ऐप्निया बताते हैं। पर्याप्‍त नींद न आने की बड़ी वजह मोटापा होता है। इसकी वजह से सांस लेने में दिक्‍कत होती है जिसकी वजह से अकसर नींद टूट जाती है। ऐसे में ये लोग रात में पर्याप्‍त नींद नहीं ले पाते हैं।

अब हम आपको बता देते हैं कि आखिर ये होता क्‍यों है। दरअसल, जब गले में मौजूद सांस की नली संकरी हो जाती है तो सांस लेने में परेशानी आने लगती है। इसकी वजह से सोते समय नींद टूट जाया करती है और बेचैनी बनी रहती है। ऐसा होने पर शरीर में खुद से एड्रीनेलिन नामक हार्मोन का स्राव होना शुरू हो जाता है। इसकी वजह से धड़कनें तेजी से धड़कनें लगती हैं। रात में खर्राटें का आना भी इसकी ही एक वजह होती है। ऐप्निया के शिकार लोगों को गहरी नींद लेने में दिक्‍कत होती है। इसके चलते उनका शरीर और मसतिष्‍क थकान महसूस करता रहता है। यही वजह है कि जब ऐसे लोग ड्राइविंग सीट पर होते हैं तो उन्‍हें नींद की झपकी आने लगती है, जिसे माइक्रोस्लीप कहते हैं।

जानकार मानते हैं कि माइक्रोस्लीप का पता लगाना कुछ मुश्किल होता है। लेकिन इसको पहचानने के लक्षणों पर यदि समय रहते गौर कर लिया जाए तो इससे छुटकारा लेने में यह सहायक साबित हो सकता है। माइक्रोस्‍लीप वाले लोगों की पलक बेहद जल्‍दी-जल्‍दी झपकती हैं।

इसके अलावा उन्‍हें उबासी या जुम्‍हाई भी जल्‍दी जल्‍दी आती है। ऐसे लोग जल्‍दी बातों को जल्‍द ही भूलने लग जाते हैं और उनकी नजरें भी कमजोर हो जाती हैं। जानकारों की राय में इन सभी के अलावा ड्राइविंग सीट पर बैठे हर शख्‍स का दिमाग बेहद चौकन्‍ना होता है और हर वक्‍त उसकी निगाह सड़क पर बनी रहती है। ऐसे में उसकी समरसता और लंबे समय तक शरीर का एक ही पॉजीशन में बने रहना व्‍यक्ति को माइक्रोस्‍लीप का शिकार बना देता है। इसके अलावा इन लोगों के स्‍वभाव में चिड़चिड़ापन में आने लगता है। यह लोग इसकी वजह से मोटापे से भी घिरते चले जाते हैं। ऐसे व्‍यक्तियों में लेप्टिन नाम के हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। साथ ही शरीर अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और शुगर की खपत करने लगता है।

आपको बता दें कि नींद का पूरा न होना ही आगे बढ़कर दिल की बीमारियों से जुड़ जाता है। ऐसे लोगों का ब्‍लडप्रेशर काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह से शरीर की तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचता है। जानकारोंं की मानें तो नींद के दौरान शरीर में खुद ऐसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं जो आपको तरोताजा बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन नींद के पूरा न होने पर ये अधूरी रह जाती हैं और घातक साबित होती हैं। नींद के दौरान हमारा मसतिष्‍क कई तरह से काम करता है। मस्तिष्क के एमाईलॉएड बीटा नामक प्रोटीन होता है जो अगर दिमाग में जमा होता रहे तो भविष्य में यह अल्जाइमर या और कई दिमागी बीमारियों का कारण बन सकता है। नींद के दौरान हमारा मसतिष्‍क इस तरह के कचरे की सफाई करता है।

अब हम आपको उन बातों के बारे में बता देते हैं जिनके माध्‍यम से आप बेहतर और पूरी नींद ले सकते हैं।

यदि माइक्रोस्‍लीप से परेशान हैं तो बेहतर है कि सोने से कुछ समय पहले गुनगुने पानी से नहा लें। इससे आपके शरीर की मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को भी आराम मिलेगा। ऐसा करने से शरीर के तापमान में गिरावट आएगी, जो अच्‍छी नींद आने में सहयोग का कारण बनेगा।

अकसर किसी दूसरे की वजह से भी हमारी नींद में खलल पड़ जाता है। ऐसे में अकेले सोना बेहतर विकल्‍प है।

रात में अच्‍छी नींद के लिए यह जरूरी है कि सोने से पहले किसी तरह की कोई भी एक्‍सरसाइज न करें। इससे मसतिष्‍क को शांत रहने में मदद मिलती है।

बेहतर नींद के लिए जरूरी है कि खाने और सोने के समय में भी बदलाव करें। सोने से करीब 4 घंटे पहले खाना खा लें। खाने के तुरंत बाद सोने से हमारे पेट में मौजूद एसिड फूड पाइप में पहुंच जाता है जिसकी वजह से सीने में जलन होती है, जो नींद में खलल पैदा करती है। 

इन सभी के अलावा कुछ चीजों का सेवन करने से भी बेहतर नींद का आनंद लिया जा सकता है। इसमें चेरी काफी सहायक है। इसमें मेलाटोनिन होता है शरीर के आंतरिक चक्र को नियमित करता है। इसके अलावा दूध का सेवन भी रात में बेहतर नींद का जरिया हो सकता है।

दूध में ट्रिप्‍टोफान और सिरोटोनिन होता है जो नींद के लिए अच्‍छा होता है। इसके अलावा केले में मौजूद मैग्न‍िशि‍यम और पोटैशि‍यम अच्छी नींद को बढ़ावा देते हैं। इसी तरह से बादाम भी बेहतर नींद लेने में सहायक है। इसमें मैग्न‍िशयिम होता है जो केले की ही तरह मांस-पेशि‍यों में होने वाले खिंचाव और तनाव को कम करता है। 

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