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बेहतर दवाएं तैयार करने में मदद करेगा नया मॉडल, बच्चों के सामाजिक व्यवहार पर भी शोध

इस मॉडल की मदद से नई दवाएं बनाने की प्रक्रिया को भी तेज करना संभव होगा।

नई दिल्ली, वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसकी मदद से नई दवाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है। यह मॉडल विभिन्न रसायनों के बीच होने वाली क्रिया का प्रतिरूप तैयार करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं ने बताया, ‘वैज्ञानिक आमतौर पर ट्रायल एंड एरर का तरीका अपनाते हैं।

इसके तहत प्रयोग के दौरान अलग-अलग रसायनों के बीच क्रियाएं कराते हुए नतीजों का आकलन करना होता है, जिसमें प्रयोग कई बार फेल भी होता है। अब इस मॉडल की मदद से कंप्यूटर के जरिये बिना रसायनिक क्रिया कराए ही उसके नतीजों का सटीक अनुमान लगाना संभव है।’

इस मॉडल की मदद से नई दवाएं बनाने की प्रक्रिया को भी तेज करना संभव होगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह मॉडल कैंसर, एचआइवी और ऑटो इम्यून बीमारियों के इलाज के नए तरीके और नई दवाएं खोजने में मदद कर सकता है। अभी जिन प्रयोगों को पूरा होने में वर्षो लग जाते हैं, यह मॉडल उन्हें कम समय में ही पूरा करने का रास्ता बनाएगा।

शुरुआत से ही रखें बच्चों के सामाजिक व्यवहार पर नजर

हम अपने आसपास अक्सर ऐसे कुछ लोगों को देखते हैं, जिन्हें किसी की भावनाओं की कद्र नहीं होती। ऐसे लोग खुद भी भावशून्य होते हैं। नियमों को तोड़ना और अराजक हो जाना उन्हें गलत नहीं लगता। हालिया शोध में पाया गया है कि ऐसी आदतें बचपन से ही होती हैं और अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो बच्चों में बदलाव भी संभव है। वैज्ञानिकों ने बताया कि कुछ बच्चे किसी की भावना को नहीं समझ पाते हैं।

साथ ही कुछ बातों को महसूस करने में भी उन्हें दिक्कत आती है। अक्सर किसी खास परिस्थिति में ऐसे बच्चे सही प्रतिक्रिया नहीं दे पाते हैं। इस स्थिति में अगर माता-पिता, अध्यापक एवं अन्य करीबी लोग बच्चे को बार-बार झिड़कते और डांटते हैं, तो बच्चे का व्यवहार और ज्यादा प्रभावित होता है। ऐसे में बच्चे को भावनात्मक सहयोग देकर इससे उबरने में उसकी मदद की जा सकती है। – एएनआइ

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