पाकिस्‍तान के पास चीन के लिए बड़ी टोकन मनी है आतंकी मसूद अजहर,

नई दिल्ली, स्टार सवेरा

पाकिस्‍तान में बैठे जैश ए मुहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के मुद्दे पर लगातार चौथी बार भारत को हार का सामना करना पड़ा है। चीन ने इसमें एक बार फिर से रोड़ा अटकाया है। 2007, 2016, 2017 और फिर 2019 में लगातार चीन उसको लेकर बड़ी अड़चन के तौर पर विश्‍व समुदाय के सामने आया है। लिहाजा यहां पर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर ऐसा क्‍यों है कि चीन एक आतंकी को बचाने के लिए अपनी साख को भी दांव पर लगाने से बाज नहीं आ रहा है। आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें कि जानकार इस बात को लेकर एकमत दिखाई देते हैं कि आतंकियों को पाकिस्‍तान चीन के लिए एक टोकन मनी के तौर पर इस्‍तेमाल करता है। बहरहाल, हम आपको अब वो तीन बड़ी वजह के बारे में भी बता देते हैं जिसकी वजह से चीन पूरी दुनिया चढ़ी त्‍योरियां भी सहने को मजबूर है।

वजह नंबर-।
चीन ने पाकिस्‍तान में बनने वाले आर्थिक गलियारे पर करीब 60 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। इसके अलावा भी वह पाकिस्‍तान को अरबों डॉलर का कर्ज दे रहा है। चीन और पाकिस्‍तान के बीच बनने वाला यह आर्थिक गलियारा चीन के उस महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है जिससे वह जरिए वह मिडिल ईस्‍ट जिसको भारत पश्चिम एशिया कहता है, के बाजार तक अपनी पहुंच बनाना है। इसके अलावा चीन के लिए पाकिस्‍तान भी एक बाजार है। इस गलियारे चीन ने आर्थिक रूप से बदहाली का शिकार हो रहे पाकिस्‍तान को संपन्‍न होने के सपने दिखाए हैं। इस प्रोजेक्‍ट के पूरा होने की गारंटी के तौर पर पाकिस्‍तान की टेरर कंपनियां जिसमें जैश ए मुहम्‍मद भी शामिल है टोकन मनी के तौर पर काम कर रही हैं। दरअसल, चीन पाकिस्‍तान में आतंकियों, आईएसआई और सेना की गठजोड़ का गणित बखूबी जानता है। चीन इस बात से भी बखूबी वाकिफ है कि पाकिस्‍तान की कोई भी सरकार इन्‍हीं के द्वारा गठित की जाती है और इनके ही इशारे पर काम भी करती है। सेना से इतर पाकिस्‍तान की सरकार नहीं जा सकती है। सेना के साथ आतंकी नेटवर्क का गठजोड़ भारत समेत अफगानिस्‍तान और ईरान तक में आतंकी हमलों को अंजाम देता है। ऐसे में चीन किसी भी सूरत से इतनी बड़ी रकम पर खतरे के बादल नहीं मंडराने देना चाहता है। लिहाजा इन आतंकियों को चीन के खिलाफ न भड़कने देने की गारंटी के तौर पर चीन मसूद और उस जैसे आतंकियों के खिलाफ संयुक्‍त राष्‍ट्र में कोई प्रस्‍ताव पास नहीं होने देता है।

वजह नंबर-2
चीन और पाकिस्‍तान के बीच बन रहे इस आर्थिक गलियारे में करीब 20 से 30 हजार चीनी नागरिक विभिन्‍न तरीके से जुड़े हैं। यह पाकिस्‍तान की जमीन पर हर वक्‍त मौजूद रहते हैं। इनमें यूं तो चीन के जवान भी शामिल हैं, लेकिन पाकिस्‍तान की जमीन पर जो ताकत वहां के आतंकियों को मिली हुई है वह ताकत उनके पास नहीं है। पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी की फैक्ट्रियों और इनके सीईओ बने आतंकी आकाओं को प्रतिबंधित कर चीन किसी भी सूरत से अपने 30 हजार नागरिकों पर मौत की तलवार नहीं लटकवाना चाहता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में मसूद के खिलाफ प्रस्‍ताव को पास न होने देने के पीछे यह भी एक बड़ी वजह है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि पाकिस्‍तान में यूनाइटेड जेहाद काउंसिल में पाकिस्‍तान में मौजूद सभी आतंकी फैक्ट्रियां सदस्‍य हैं। यह काउंसिल कब और कहां आतंकी हमला करना है यह तय करता है। इसके अलावा आतंकियों की तैनाती, उनकी नियुक्ति और उन्‍हें हथियार मुहैया करवाने का फैसला भी यही कांउसिल लेती है। चीन पाकिस्‍तान स्थित आतकी संगठनों पर कार्रवाई को हरी झंडी देकर कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता है।

वजह नंबर-3
चीन पाकिस्‍तान और वहां स्थित आतंकी संगठनों की पूरी जानकारी रखता है। इसके अलावा चीन अपने पश्चिम में मौजद उइगर मुस्लिमों को अपने लिए खतरा बताता आया है। इसके अलावा वह बार-बार इन्‍हें अपनी धरती पर आतंकी बताता आया है। चीन को इस बात का भी डर है कि कहीं मसूद या उस जैसे किसी भी आतंकी पर प्रतिबंध लगाकर वह पश्चिम में उइगरों के साथ मिलकर चीन को दहला सकते हैं। चीन नहीं चाहता है कि पाकिस्‍तान के आतंकी उसकी धरती पर खून की होली खेलें। इसके लिए वह इस बात को जरूरी मानता है कि वह मसूद समेत दूसरे आतंकियों के खिलाफ संयुक्‍त राष्‍ट्र में आने वाले किसी भी प्रस्‍ताव को पास न होने दें।

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