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मौसम के बिगड़े मिजाज का खामियाजा भुगत रहे हैं किसान, गेहूं खरीद की रफ्तार हुई धीमी

सरकारी खरीद एजेंसियों के साथ निजी प्रतिष्ठानों को भी दलहन तिलहन और गेहूं की खरीद की रफ्तार को लगाम लग गई है।

नई दिल्ली, कोविड-19 की महामारी से जूझ रहे किसानों को अब मौसम के बिगड़े मिजाज का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अचानक बारिश होने से उन्हें रबी सीजन की उपज को मंडियों में बेचने में दिक्कतें होने लगी है। सरकारी खरीद एजेंसियों के साथ निजी प्रतिष्ठानों को भी दलहन, तिलहन और गेहूं की खरीद की रफ्तार को लगाम लग गई है।

पंजाब व हरियाणा समेत उत्तर प्रदेश की कई मंडियों में बाहर पड़ा गेहूं बारिश के कारण भीग गया। कोरोना के चलते लागू लॉकडाउन की वजह से मंडियों में सरकारी खरीद पहली अप्रैल की जगह 15 अप्रैल से शुरू हो सकी।

केंद्रीय एजेंसियों के साथ राज्य सरकारों की खरीद एजेंसियों ने भी कोरोना की चुनौतियों से निपटने के लिए खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाकर गेहूं की खरीद की रफ्तार बढ़ाने की योजना बनाई। पहले सप्ताह में गेहूं खरीद की रफ्तार बहुत तेज थी, लेकिन पिछले दो तीन दिनों से बारिश से खरीद प्रभावित हुई है।

पंजाब में गेहूं की खरीद पिछले साल के मुकाबले कहीं बहुत अधिक हो चुकी है। पिछले साल जब खरीद पहली अप्रैल को चालू हुई थी, तब कुल 21.8 लाख टन गेहूं की खरीद हुई। इस बार 15 अप्रैल से चालू हुई खरीद के बावजूद 35 लाख टन से अधिक की खरीद हो चुकी है।

लेकिन बारिश से रफ्तार थम गई है। हरियाणा में गेहूं की खरीद अब तक 14 लाख टन से अधिक हो गई है। जबकि पिछले साल अब तक 52 लाख टन से अधिक गेहूं खरीद लिया गया था। जबकि उत्तर प्रदेश में इस दौरान ढाई लाख टन गेहूं की खरीद हुई है, जो पिछले साल के आधी है। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश में 12.35 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।

इसी तरह राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में दलहन फसलों की खरीद चालू है। मौसम विभाग के मुताबिक बारिश का यह दौर पूरे अप्रैल महीने तक जारी रहेगा। तेज आंधी के साथ कहीं कहीं ओले भी पड़ सकते हैं। हालांकि बारिश छिटपुट ही रहेगी। पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान के कुछ हिस्से और समूचे एनसीआर में बौछारें पड़ेंगी। 26 अप्रैल को हुई बरसात का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों के साथ मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में रहा है।

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