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जल्द हो सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए प्रोत्साहनों की घोषणा

सूत्रों ने बताया कि नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में बनी एक उच्च स्तरीय समिति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चर्स के लिए प्रोत्साहनों के प्रस्ताव तैयार कर रही है।

नई दिल्ली नितिन प्रधान। देश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का हब बनाने के क्रम में सरकार मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन की नीति तैयार कर रही है। करीब दो हफ्ते में इस आशय की रिपोर्ट तैयार हो जाने की उम्मीद है। मोबाइल हैंडसेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ी मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों को इसके तहत नियम कायदों से हटकर भी प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव होगा। इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए राज्यों को भी इसमें भागीदार बनाया जा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री की तरफ से बुलाई गई कंपनी प्रमुखों की बैठक में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने इस बात के संकेत भी दिए। सूत्रों के मुताबिक राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग इकाई लगाने की इच्छुक कंपनियों के लिए जमीन और बिजली की कीमत को कम से कम 10 वर्ष तक स्थिर रखने का प्रस्ताव भी शामिल होगा। केंद्र इस बात को सुनिश्चित करेगा कि जो राज्य अपने यहां इस तरह की इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं उन्हें जमीन की कीमत और बिजली की दरों को दस वर्ष के लिए फ्रीज करना होगा। इसी शर्त पर राज्य इस स्कीम में भागीदारी कर पाएंगे।

सूत्रों ने बताया कि नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में बनी एक उच्च स्तरीय समिति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चर्स के लिए प्रोत्साहनों के प्रस्ताव तैयार कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद के परामर्श के बाद इस रिपोर्ट को जारी किया जाएगा। इसके तहत ‘चैंपियंस ऑफ एक्सपोर्ट’ की पहचान की जाएगी जिन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाने का प्रस्ताव समिति की रिपोर्ट में शामिल हो सकता है।

प्रसाद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में करीब 54 कंपनियों के प्रमुखों और इस क्षेत्र से जुड़ी आठ एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के अंत में प्रसाद ने कहा कि इंडस्ट्री की तरफ से आए सभी सुझावों पर सरकार विचार करेगी और उसके बाद प्रोत्साहनों का एलान करेगी। उन्होंने कहा कि इस बैठक से एक बात स्पष्ट हो गई है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक व मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

इस क्षेत्र से बड़े स्तर पर निर्यात में वृद्धि की जा सकती है। उपकरण और मोबाइल हैंडसेट के अतिरिक्त भारत को कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी एक्सपोर्ट हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। उन्होंने मंत्रलय के सचिव अजय प्रकाश साहनी से एक टास्कफोर्स गठित कर इंडस्ट्री के लिए प्रोत्साहनों पर विचार करने को कहा।

प्रसाद ने कहा कि टास्कफोर्स यह पता लगाये कि इंडस्ट्री को क्या प्रोत्साहन दिये जा सकते हैं और किनमें मुश्किल आएगी। सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने विभिन्न सुझाव दिये। नोकिया के प्रतिनिधि ने कहा कि भारत को अमेरिका और चीन के बीच छिड़े टैरिफ वार का लाभ उठाना चाहिए।

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