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आज रात सूर्य होंगे उत्तरायण, जानें कब है मकर संक्रांति, पोंगल, षटतिला एकादशी

Vrat Evam Tyohar 2020 इस मास के अगले सात दिनों में महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं जिसमें मकर संक्रांति पोंगल कालाष्टमी षटतिला एकादशी व्रत आदि शामिल हैं।

आज माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। अंग्रेजी कैलेंडर के जनवरी माह का यह तीसरा सप्ताह है। इस मास के अगले सात दिनों में महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं, जिसमें मकर संक्रांति, पोंगल, कालाष्टमी, षटतिला एकादशी व्रत आदि शामिल हैं। इस सप्ताह में ही खरमास का भी समापन हो जाएगा, जिसके बाद से मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त प्राप्त होने लगेंगे।

आइए जानते हैं कि इस सप्ताह (14 जनवरी से 21 जनवरी) कौन कौन से महत्वपूर्ण व्रत, पर्व एवं त्योहार किस दिन आने वाले हैं।

14 जनवरी: दिन- मंगलवार: निरयण सूर्य उत्तरायण, धनु (खर) मास समाप्त।

सूर्य उत्तरायण: 14 जनवरी दिन मंगलवार की रात 02 बजकर 08 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसक साथ ही सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। सूर्यदेव का मकर से कर्क की ओर जाना उत्तरायण कहलाता है और कर्क से मकर की ओर सूर्यदेव का जाना दक्षिणायन होता है। यह 6-6 माह का होता है।

खर मास समापन: मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास समाप्त हो जाएगा। 16 दिसंबर 2019 से शुरू हुए खर मास में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। अब मकर संक्रांति के बाद से मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार आदि के लिए शुभ मुहूर्त मिलेंगे।

15 जनवरी: दिन- बुधवार: मकर संक्रान्ति, खिचड़ी पर्व, पोंगल, संक्रान्ति का विशेष पुण्यकाल सूर्योदय से 08:32 तक।

खिचड़ी पर्व: मकर संक्रान्ति के दिन खिचड़ी खाने की परंपरा है, इसलिए इसे खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। इस दिन गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी का मेला लगता है, जो एक माह तक चलता है।

पोंगल: मकर संक्रांति और लोहड़ी के जैसे ही दक्षिण भारत में पोंगल का त्योहार मनाया जाता है। पोंगल का त्योहार फसल और किसानों से जुड़ा है। तमिल में पोंगल का अर्थ है उफान। यह त्योहार चार दिनों तक मनाते हैं। यह तमिल माह ‘तइ’ की पहली तारीख से प्रारंभ होता है, इसी दिन तमिल नववर्ष का भी प्रारंभ होता है।

17 जनवरी: दिन- शुक्रवार: श्री रामानन्दाचार्य जयन्ती, कालाष्टमी।

श्री रामानन्दाचार्य जयन्ती: आदि जगदगुरु स्वामी रामानंदाचार्य का जन्म तीर्थ प्रयागराज में हुआ था। जिस पावन स्थली पर उनका जन्म हुआ, उसे उनके अनुयायी स्वामी रामानंदाचार्य प्राकट्य धाम के नाम से पुकारते हैं। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, स्वामी रामानंद के रूप में भगवान श्रीराम स्वयं पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।

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