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वायनाड के राहत कैंप पहुंचे राहुल, प्रधानमंत्री व मुख्‍यमंत्री से मांगी मदद

राहुल गांधी वायनाड (Wayanad) के कैथापोयिल (Kaithapoyil) के एक राहत कैंप पहुंचे।

उन्‍होंने कहा कि मैंने मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री से क्षेत्र के लोगों की मदद करने के लिए कहा है।
वायनाड, एएनआइ। Rahul Gandhi in Kaithapoyil Wayanad राहुल गांधी इन दिनों केरल के लोकसभा क्षेत्र वायनाड के दौरे पर हैं। वह सोमवार को वायनाड (Wayanad) के कैथापोयिल (Kaithapoyil) के एक राहत कैंप पहुंचे। उन्‍होंने लोगों से कहा कि आपका सांसद होने के नाते मैंने मुख्‍यमंत्री को फोन करके यहां की समस्‍याएं बताई और उनसे यथासंभव मदद करने का आग्रह किया। मैंने प्रधानमंत्री से भी बात की और यहां आई प्राकृतिक आपदा के बारे में जानकारी दी। मैंने केंद्र सरकार से भी मदद करने के लिए कहा है।

इससे इतर राहुल गांधी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा है कि मेरा संसदीय क्षेत्र वायनाड बाढ़ से तबाह हो गया है, हजारों लोग बेघर हो चुके हैं जिन्‍हें राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। हमें तत्काल पानी की बोतलों, चटाई, कंबल, अधो वस्त्र, धोती, नाइटगाउन, बच्चों के कपड़े, चप्पल, सेनेटरी नैपकिन, साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, डेटॉल, सर्फ, ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन आदि सामानों की सख्‍त जरूरत है। राहुल ने लोगों से राहत सामग्रियों को मलप्पुरम जिले में बनाए गए केंद्रों में भेजने के लिए कहा है।

राहुल ने कल ट्वीट करके कहा था कि अगले कुछ दिनों तक मैं अपने लोकसभा क्षेत्र वायनाड में रहूंगा, जो बाढ़ से तबाह हो चुका है। मैं वायनाड में राहत शिविरों का दौरा करूंगा और जिला और राज्य के अधिकारियों के साथ राहत उपायों की समीक्षा करूंगा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (P Vijayan) ने कहा था कि वायनाड राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला था और उन्होंने अनुमान लगाया था कि बाढ़ के कारण अकेले जिले में लगभग 11 लोग मारे गए थे।

बता दें, केरल में बाढ़ से हालात बेकाबू हो दगए हैं। केरल में बाढ़ और बारिश की सबसे अधिक मार वायनाड और कोझिकोड पर पड़ी है। यहां करीब 25-25 हजार लोग बेघर हुए हैं। वायनाड में बाढ़ में फंसे एक नवजात बच्चे को सेना के जवानों ने सुरक्षित निकाला है। राज्य में वर्षाजनित घटनाओं में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है। आठ जिलों में आठ अगस्त से भूस्खलन की 80 घटनाएं हो चुकी हैं। केरल की कई ट्रेनें रद कर दी गई हैं। केरल में 1.25 लाख लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

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