एडवेंचर से भरपूर चकराता आकर कम बजट में भी कर सकते हैं 2 से 3 दिन जमकर मस्ती

इस भीषण गर्मी में शांत और प्रदूषणमुक्त माहौल और अनछुए प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थान की तलाश में हैं तो देहरादून के करीब स्थित चकराता और जौनसार-बावर पहली में भा जाएंगे।

नई दिल्ली, स्टार सवेरा ।

यह एक छोटे और सुंदर पहाड़ी नगर के रूप में नजर आता है। रोजमर्रा की जिंदगी और महानगरों के शोर से दूर कुछ पल शांति से बिताने वालों के लिए यह ठिकाना खास है। वैसे, यदि आप कुदरती खूबसूरती के साथ-साथ कुछ रोमांचक खेलों के लिए भी ऐसी किसी जगह की तलाश में हैं तो जौनसार बावर का यह इलाका यानी चकराता माकूल लगेगा। कैंपिंग करनी हो या राफ्टिंग या फिर ट्रेकिंग, यहां हर चीज की सुविधा मिलेगी। रैपलिंग, रॉक क्लाइंबिंग का विचार हो, तो इनके लिए भी परफेक्ट जगह है यह। आनंद का फुल पैकेज मिलता है यहां। इस जगह पर ऐतिहासिक, पुरातात्विक, सामाजिक और सांस्कृतिक वैभव बिखरा हुआ है। यहां आते ही आप कह उठेंगे कि यही तो है हमारे ख्वाबों की दुनिया!

यमुना, टोंस व पावर नदी के बीच बसे जौनसार-बावर का इलाका 463 वर्ग मील में फैला हुआ है। जमना (यमुना) नदी के पार होने के कारण यह क्षेत्र जमना पार का इलाका कहलाता है जो बाद में जौनसार नाम से प्रचलित हो गया। उत्तर दिशा वाले क्षेत्र को पावर नदी के कारण बावर कहा जाने लगा। इसके पूर्व में यमुना नदी, उत्तर दिशा में उत्तरकाशी व हिमाचल का कुछ क्षेत्र, पश्चिम में टोंस नदी और दक्षिण में पछवादून-विकासनगर क्षेत्र पड़ता है और इसी क्षेत्र में बसा है चकराता नामक छावनी क्षेत्र भी। जौनसार-बावर आएं तो आपको यहां के पारंपरिक मकान चकित करेंगे, जो कि आम मकानों से बेहद अलग होते हैं। पत्थर और लकड़ी से बने ये मकान पगोड़ा शैली में बने हैं। इन मकानों की ढलावदार छत पहाड़ी स्लेटी पत्थर की बनी होती हैं। दो, तीन या चार मंजिल वाले इन मकानों की हर मंजिल पर एक से चार कमरे बने होते हैं। सर्दी में ये मकान सर्द नहीं होते हैं। एक और खास बात। इन मकानों के निर्माण में ज्यादातर देवदार की लकड़ी का इस्तेमाल होता है। उस पर की गई महीन नक्काशी देखते ही बनती है।

ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए जौनसार-बावर की खूबसूरत वादियां खास तौर पर अनुकूल हैं। स्थानीय निवासी नेशनल शूटर पंकज चौहान कहते हैं, जब सीजन अनुकूल रहता है तो यहां पर्यटकों की भीड़ लग जाती है। साहसिक पर्यटन के लिहाज से चकराता की पहाडियां ट्रेकिंग व रेपलिंग के शौकीनों के लिए मुफीद मानी जाती हैं। यहां पर्यटकों को चकराता के पास मुंडाली, बुधेर, मोइला टॉप, खंडबा, किमोला फॉल और आसपास की चोटियों पर ट्रेकिंग व रेपलिंग कराई जाती है। स्थानीय लोखंडी होटल संचालित करने वाले रोहन राणा बताते हैं, बुधेर के पास गुफा व छोटी-बड़ी चोटियों की श्रृंखला है। गर्मियों में यहां ट्रैकिंग के लिए विभिन्न शहरों व महानगरों से सैलानी पहुंचते हैं। यहां पर्यटकों को ट्रेकिंग, रेफलिंग कराने के लिए प्रशिक्षित युवा रखे गए हैं।

समुद्र तल से करीब सात हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चकराता को अंग्रेजों ने छावनी क्षेत्र के रूप में बसाया था। 55वीं सिरमौर रेजीमेंट के कर्नल एच.रॉबर्ट ह्यूम ने वर्ष 1869 में चकराता छावनी की स्थापना की। इससे पूर्व वर्ष 1815 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जौनसार-बावर को अपने अधीन ले लिया था। इस दौरान मसूरी से चकराता की पहाडिय़ों से होकर शिमला तक पैदल मार्ग बनाया गया। वर्ष 1927 में चकराता कैलाना छावनी में जिम्नेजियम सिनेमा की दो शाखाएं थीं, जहां केवल गर्मियों में ही सिनेमा दिखाया जाता था। इसके अवशेष आज भी हैं जो इस क्षेत्र को खूबसूरत यादों का घर बनाते हैं। यहां पुराने दौर के बने हुए रोमन कैथोलिक व स्कॉटिश चर्च भी हैं जो यहां आने वालों को बीते समय की कहानी सुनाते नजर आते हैं।

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