RBI ने की रीपो रेट में कटौती: लोन, एफडी, डेट फंड्स पर क्या करना फायदेमंद

केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नए गवर्नर की अगुवाई में रीपो रेट घटाने का ऐलान किया। इसका फायदा उठाने के लिए लोन लेने वालों के साथ-साथ एफडी एवं डेट फंड्स के निवेशकों को क्या करना चाहिए?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रीपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती + करते हुए इसे 6.25% करके कई लोगों को हैरान कर दिया है जो कि 18 महीने में इस तरह की पहली कटौती है। खाने-पीने की चीजों के दाम में थोड़ी राहत दिखाई देने और पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमत स्थिर रहने के कारण महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में है। इसके अलावा, बजट में दिए गए कई प्रस्ताव, जैसे टैक्स रिबेट में बढ़ोतरी के कारण डिस्पोजेबल इनकम में वृद्धि होने की संभावना है। इसलिए, निजी खर्च में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए RBI ने यह कटौती की है

नए गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व में सेन्ट्रल बैंक के मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने इस कटौती के पक्ष में 4-2 से वोट दिए। इस कटौती के कारण केंद्रीय बैंक ने अपना नजरिया ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ से बदलकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया है। सेन्ट्रल बैंक को जनवरी-मार्च के दौरान उपभोक्ता मूल्य में 2.8% और अप्रैल से सितम्बर तक 3.2 से 3.4 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है जो कि इसके 4 प्रतिशत की महंगाई के लक्ष्य से काफी नीचे है।

आम आदमी इस कटौती पर खुश होंगे, खास तौर पर नया लोन लेने वाले और निवेशक, जो रियल एस्टेट में अपना पैसा लगाने की सोच रहे हैं। कुछ दिन पहले निकले अंतरिम बजट के कारण अपने कब्जे वाली दूसरी प्रॉपर्टी पर से काल्पनिक किराए पर लगने वाला टैक्स हट गया है जिससे प्रॉपर्टी की बिक्री से होने वाले मुनाफे की रकम को एक के बजाय दो मकानों में निवेश करने का मौका मिल गया है। इससे एक बार फिर रियल एस्टेट में लोगों की दिलचस्पी बढ़ जाएगी। इस कटौती के कारण यह और ज्यादा फायदेमंद हो जाएगा।

जिन्होंने होम लोन ले रखा है, उनके लिए यह रेट कटौती सिर्फ तभी फायदेमंद होगी जब बैंक MCLR में भी कटौती करेंगे और जब आपके लोन का रिसेट डेट आ जाएगा। MCLR से जुड़े लोन के मामले में EMI की गणना वर्तमान ब्याज दर के आधार पर किया जाता है। इसका मतलब है कि यदि आपका बैंक ब्याज दर में भी कटौती कर देता है तो आपकी EMI कम हो सकती है जिसका कैलकुलेशन वर्तमान या कम हो चुकी ब्याज दर के आधार पर किया जाएगा।

जिन्हें होम लोन लेना है
अगर आपको लोन लेना है तो आपके पास दो रास्ते हैं। आप या तो अभी होम लोन ले सकते हैं जो MCLR से जुड़ा है या आप लोन लेने के लिए अप्रैल तक इंतजार कर सकते हैं। अप्रैल से पहले बैंक आतंरिक रूप से ब्याज दर बेंचमार्क जैसे MCLR सेट नहीं कर पाएंगे। उन्हें सभी लोन को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना होगा जो निम्नलिखित में से कोई एक हो सकता है…

RBI का रीपो रेट
-फाइनैंशल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (FBIL) द्वारा प्रस्तुत किए गए भारत सरकार के 91 दिनों के ट्रेजरी बिल का रिटर्न।
-FBIL द्वारा प्रस्तुत किए गए भारत सरकार के 182 दिनों के ट्रेजरी बिल का रिटर्न।
-FBIL द्वारा प्रस्तुत की गई कोई अन्य बेंचमार्क बाजार ब्याज दर।

FD निवेशक क्या करें?
कई बैंकों ने हाल ही में फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज दर बढ़ा दिया था, इसलिए FD में निवेश बनाए रखने में ही फायदा है। एक निवेशक के रूप में आप अपने FD में लम्बे समय तक निवेश बरकरार रखकर अधिक रिटर्न पा सकते हैं।

डेट फंड के निवेशक क्या करें?
ब्याज दर कम होने से निवेशकों को डेट फंड्स में निवेश करने का एक अच्छा मौका मिलता है क्योंकि डेट फंड्स का रिटर्न, ब्याज दर के व्युत्क्रमानुपाती (उल्टा) होता है। यानी, ब्याज दर कम होने पर डेट फंड का नेट ऐसेट वैल्यू (NAV) बढ़ जाता है।**

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