एसआईआर पर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विरोध दर्ज कराया। दोनों ने कहा कि जब बीएलओ सुसाइड कर रहे थे तब मतदाता नाम जोड़ने, काटने की तिथि क्यों नहीं बढ़ाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के बाद तिथि क्यों बढ़ा कर 15 की जगह 19 जनवरी की? हमें भाजपा के 10 बीएलए ने लिखकर दिया है कि हमने फॉर्म जमा नहीं करवाया। हमारे नाम से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। इस घपले के खिलाफ कांग्रेस कोर्ट में जाएगी और हम जगह जगह मुकदमे दर्ज कराएंगे।
दोनों ने कहा कि राजस्थान में एसआईआर की ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस विचारधारा के वोटर्स के नाम कटवाने के लिए प्रिंटेड फॉर्म-7 एसडीएम, तहसीलदार और जिला कलक्टर के यहां पहुंचा दिए। डोटासरा ने आरोप लगाया कि राजस्थान में 45 लाख वोट काटने की सिफारिश की गई है। 15 जनवरी तक आपत्तियां मांगी गई, लेकिन 3 जनवरी को भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष आए और एजेंडा सेट किया कि कांग्रेस समर्थकों के नाम कैसे हटाएं? 17 दिसंबर से 14 जनवरी तक भाजपा के 937 बूथ लेवल एजेंट ने 211 नाम जोड़ने और 5994 नाम काटने का आवेदन किया।
कांग्रेस के 110 बूथ लेवल एजेंट ने 185 फॉर्म जोड़ने और दो नाम हटाने का आवेदन किया, जो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी है। लेकिन 13 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जयपुर आते हैं और 4 घंटे भाजपा नेताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास पर बैठक करते हैं। उसके बाद गुप्त रूप से फर्जी कंप्यूटराइज फॉर्म हर विधानसभा क्षेत्र में 15 से 20 हजार पहुंच जाते हैं।
फॉर्म की फोरेंसिक जांच हो
नेता प्रतिपक्ष जूली ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि जितने भी प्रिंटेड फॉर्म राजस्थान में आए हैं, उन सबकी फोरेंसिक जांच हों। फॉर्म कहां छपे और कौन इन्हें जयपुर लाया? ये सभी फॉर्म एक ही जगह छापे हैं। छापने के बाद जयपुर भेजे गए। इसकी जांच होनी चाहिए।
इधर… राठौड़ बोले-अफवाह फैला रहे हैं कांग्रेसी नेता
जयपुर/नई दिल्ली | भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान पर पलटवार किया है। राठौड़ ने कहा कि डोटासरा का यह स्वभाव बन चुका है कि वे बिना तथ्य और प्रमाण के मनगढ़ंत बातें करें और जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास करें। अफवाह फैलाना और अनर्गल बयानबाजी करना अब उनकी राजनीति का स्थायी हिस्सा बन गया है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण, जिसे एसआईआर कहा जाता है, कोई नई प्रक्रिया नहीं है। कांग्रेस सरकार में भी यह प्रक्रिया कई बार अपनाई गई है। वर्ष 1992 में एसआईआर हुआ, इसके बाद 2002, 2003 और 2004 में भी कई राज्यों में कांग्रेस सरकारों के दौरान मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया गया। ऐसे में आज इस प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने डोटासरा के बयान की निंदा करते हुए कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया कानून के तहत निर्धारित है, जिसमें किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से हो, आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है और हर आपत्ति की विधिवत जांच की जाएगी।