कोरोना खत्म महामारी के बहाने बढ़ाया विमानों का किराया:2019 में मात्र 1.63 करोड़ खर्च हुए, इस साल बढ़कर 90.7 करोड़ किराया चुकाया

मध्यप्रदेश में सरकारी विमान और हेलिकॉप्टर के किराए पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। विधानसभा में कांग्रेस के दो विधायकों प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय के सवाल के जवाब में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

2021 की तुलना में विमानों का किराया 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। विधानसभा में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा दी गई जानकारी ने सरकार के विमानन खर्च की पूरी तस्वीर उजागर कर दी।

11 महीनों में ही विमान कंपनियों को 90.7 करोड़ दिए

विधानसभा में दी गई जानकारी बताती है कि जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान किराये पर 290 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि सिर्फ जनवरी से नवंबर 2025 में निजी कंपनियों को 90.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

सीएम मोहन के कार्यकाल में विमानों के किराए पर 143 करोड़ खर्च हुए

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि वर्ष 2019 में विमान किराये पर खर्च जहां मात्र 1.63 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष था, वही खर्च 2025 में उछलकर 90.7 करोड़ प्रतिवर्ष हो गया। सीएम मोहन यादव के कार्यकाल में जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के दौरान 143 करोड़ रुपये विमान किराये पर खर्च हुए।

कोविड के बहाने 2023 में किराया बढ़ाया

विधानसभा में दस्तावेज़ के अनुसार सरकार ने किराया बढ़ाने के लिए ये वजहें बताईं—

  • कोविड के बाद पर्यटन बढ़ गया
  • विमानों की मांग बढ़ गई
  • कोविड के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ
  • लोकसभा चुनाव आने वाले हैं इसलिए मांग और बढ़ेगी
  • ईंधन और मेंटेनेंस महंगा हो गया है।

विमानों और हेलिकॉप्टर किराया 30% तक बढ़ाया

2023 में किराया बढ़ाने के पीछे दिए गए तर्कों के आधारों पर अलग-अलग श्रेणी के विमानों और हेलीकॉप्टरों का किराया 20% से 30% तक बढ़ा दिया गया। उदाहरण के तौर पर 2022–23 में 4.45 लाख प्रति घंटा वाला किराया बढ़कर 2024 में 5.70 लाख प्रति घंटा हो गया। 3.50 लाख प्रति घंटा वाला किराया बढ़कर 4.75 लाख प्रति घंटा हो गया। हेलीकॉप्टरों का किराया कुछ श्रेणियों में 5.29 लाख रुपये प्रति घंटा तक पहुँच गया।

सरकार का विमान 4 साल पहले हुआ दुर्घटनाग्रस्त, सिर्फ एक हेलिकॉप्टर

दूसरी ओर, विधायक पंकज उपाध्याय के सवाल पर दी गई जानकारी में यह सामने आया कि सरकार के पास फिलहाल सिर्फ एक हेलीकॉप्टर उड़ान योग्य है। सरकारी विमान मई 2021 में दुर्घटनाग्रस्त होकर ग्वालियर एयरबेस पर खड़ा है और उड़ान योग्य नहीं है।

खर्च बढ़ता गया, सरकारी विमानों के बजाय किराए के एयरक्राफ्ट पर बढ़ रही निर्भरता

विधानसभा में आए दस्तावेज़ बताते हैं कि विमान किराये पर निर्भरता लगातार बढ़ती गई, जबकि सरकारी विमानों की स्थिति और खराब होती गई। यही वजह है कि— विमानों का बेड़ा छोटा हुआ, किराया बढ़ता गया, और निजी कंपनियों पर खर्च कई गुना बढ़ गया।

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