चंडीगढ़ नगर निगम में 116 करोड़ का घोटाला:हरियाणा-चंडीगढ़ के अधिका​रियों की भूमिका पर संदेह, कांग्रेस बोली–बचाने में लगे अधिकारी, मेयर ने एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी

चंडीगढ़ नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े लगभग 116.84 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में राजनीति गर्माती जा रही है। चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष एचएस लकी ने कहा कि करोड़ों का घोटाला कोई छोटा कर्मचारी नहीं कर सकता, जब तक उसके पीछे किसी बड़े अधिकारी का हाथ न हो। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि इस करोड़ों के घोटाले में शामिल बड़े अधिकारियों की भूमिका सामने आ सके।

सूत्रों से पता चला है कि शहर के एक होटल में हरियाणा और चंडीगढ़ नगर निगम के बड़े अधिकारियों की बैठक होती रही। इतना ही नहीं, वहां शराब पार्टी होने की भी चर्चा है। यह भी जानकारी सामने आई है कि हरियाणा पुलिस के हाथ सीसीटीवी फुटेज लगी है, जिसमें कई राज छिपे होने की बात कही जा रही है।

वहीं मेयर सौरभ जोशी भी एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने कमिश्नर अमित कुमार से पूरे मामले की जल्द एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के खाते से निकाली गई 116.84 करोड़ रुपये की राशि को 11 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में दिखाया गया, लेकिन बाद में जांच में ये सभी एफडी फर्जी पाई गईं।

गिरफ्तारी के बाद होंगे खुलासे

चंडीगढ़ पुलिस ने नगर निगम के 116.84 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में आर्थिक अपराध शाखा द्वारा नगर निगम में आउटसोर्स पर रखे गए अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और आईडीएफसी सेक्टर-32 के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि के खिलाफ केस दर्ज किया है।

इनमें से एक आरोपी रिभव ऋषि को, जो हरियाणा के सरकारी विभागों के बैंक खातों में हुए 590 करोड़ रुपये के मामले में भी गिरफ्तार किया जा चुका है, पुलिस जल्द हरियाणा से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आएगी। वहीं दूसरा आरोपी अनुभव मिश्रा फरार है और उसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।

किसके संपर्क में था आरोपी

चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लकी ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, उनके मोबाइल फोन की एक साल की कॉल डिटेल निकाली जानी चाहिए। इसके अलावा उनके व्हाट्सएप मैसेज की भी पूरी जांच होनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था। उनका कहना है कि इतना बड़ा घोटाला निचले स्तर का अधिकारी नहीं कर सकता, इसलिए इसमें जिन अधिकारियों की भूमिका है, उनके नाम भी सामने आने चाहिए।

संबधित अधिकारियों के मांगे नाम

मेयर सौरभ जोशी ने कहा जनता के पैसे से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, 116.84 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट मामले की तुरंत जांच के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम कमिशनर से पूरे मामले की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी गई है। मार्च–अप्रैल 2025 के दौरान सीएससीएल के बैंक खातों की निगरानी करने वाले अधिकारियों की पहचान कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस / इकोनॉमिक ऑफेंस विंग इस मामले की जांच कर रही है और सभी संबंधित अधिकारियों को सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएससीएल के सभी बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है।

किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आने पर कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम आयुक्त को पांच कार्य दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जनता का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।

कमिशनर बोले ब्याज समेत मिले पैसे

नगर निगम कमिशनर अमित कुमार ने कहा निगम को ब्याज सहित 121 करोड़ रुपये वापस मिल चुके हैं। बैंकों में लेनदेन के पूरे रिकॉर्ड की जांच की गई है। इसके बाद कुछ खामियां भी सामने आईं। साथ ही अकाउंट ब्रांच के कर्मी की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए पूरे मामले में पुलिस को शिकायत दी गई है और पुलिस जांच में सब सामने आ जाएगा।

विकास वधावा का नाम भी चर्चा में

सूत्रों से पता चला है कि आईडीएफसी बैंक से जुड़े घोटाले में पहले भी चर्चा में रहे विकास वधावा का नाम इस मामले में भी सामने आ रहा है। बताया जाता है कि उसका सेक्टर-17 स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय और नगर निगम कार्यालय में अक्सर आना-जाना था और वह अधिकारियों से मुलाकात करता रहता था। पुलिस के पास इस संबंध में कुछ जानकारी होने की बात कही जा रही है और उससे पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है।

आउटसोर्स कर्मचारी के गायब होने पर खुलासा

बताया जा रहा है कि बैंक की नीति के तहत आईडीएफसी बैंक ने नगर निगम को इस राशि की भरपाई कर दी है। इससे पहले हरियाणा में सामने आए घोटाले के बाद भी बैंक ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए भुगतान किया था। हालांकि इस मामले में बैंक और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर जांच जारी है। हरियाणा में आईडीएफसी बैंक घोटाले का मामला सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कार्यरत एक आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव अचानक गायब हो गया। इसके बाद संदेह होने पर जांच शुरू की गई तो सामने आया कि 116.84 करोड़ रुपये की 11 एफडी फर्जी हैं। अब जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि नगर निगम के अकाउंट से जुड़ी जानकारी और पासवर्ड आउटसोर्स कर्मचारी तक कैसे पहुंचे।

आईडीएफसी बैंक में करवाई गई 11 एफडी

28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 25 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026

28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 25 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026

28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026

28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 27 मार्च 2026

28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी

28 मार्च 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी

28 मार्च 2025 को 6 करोड़ 61 लाख 11 हजार 278 रुपये की एफडी

2 अप्रैल 2025 को 1 साल के लिए 10 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 1 अप्रैल 2026

2 अप्रैल 2025 को 1 साल के लिए 5 करोड़ रुपये की एफडी

6 अप्रैल 2025 को 1 साल के लिए 5 करोड़ रुपये की एफडी, मैच्योरिटी 5 अप्रैल 2026

6 अप्रैल 2025 को 22 लाख 90 हजार 386 रुपये 37 पैसे की एफडी

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