पंजाब यूनिवर्सिटी की तरफ से दाखिले के लिए एफिडेविट देने के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन तेज हो रहा है। बुधवार 29 अक्तूबर 2025 को पंजाब यूनिवर्सिटी में धरने पर बैठे छात्र नेता अभिषेक डागर की पूरी रात बिना कुछ खाए सड़क पर गुजरी है। वह वाइस चांसलर कार्यालय के समक्ष मरण व्रत पर बैठे हैं।
आज दूसरे छात्रों की तरफ से भी यहां पर प्रदर्शन शुरू किया जाना है। दूसरी तरफ राजनेताओं ने भी इस प्रदर्शन में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा व बरिंदर ढिल्लों का कहना है कि पंजाब यूनिवर्सिटी में इस तरह से संघर्ष पर किसी प्रकार की शर्त नहीं लगाई जा सकती। ये शर्तें बर्दाश्त नहीं की जा सकती हैं।
स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी के नेता अभिषेक डागर द्वारा शुरू किया गया मरण व्रत आज दूसरे दिन में शामिल हो गया है। प्रदर्शन की उनकी पहली रात सर्द रात के बीच सड़क पर गुजरी है। देर रात सर्दी की वजह से धरना स्थल पर रजाई मंगवानी पड़ी थी। आज सुबह से यहां पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में लॉ छात्र ने डागर ने ऐलान किया है कि यह प्रदर्शन पंजाब यूनिवर्सिटी की तरफ से एडमिशन से पहले लिए जा रहे एफिडेविट के खिलाफ शुरू किया गया है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्ट्डीज विभाग के स्टूडेंट अभिषेक डागर ने ऐलान किया है कि वह तब तक कुछ भी नहीं खाएंगे, जब तक एफिडेविट फाइल करने का फैसला वापस नहीं ले लिया जाता है।
समझें क्या है पूरा विवाद…
- छात्रों को हल्फनामा देने का आदेशः पंजाब यूनिवर्सिटी ने जून 2025 में आदेश दिया था कि यहां पर दाखिला लेने वाले छात्रों को एक हल्फिया बयान देना होगा। जिसमें 11 तरह की शर्तें दी गई हैं। इसमें यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह के प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेने के साथ साथ क्रिमिनल केस नहीं होने की बात कही गई है। अलग-अलग छात्र संघ के सदस्य इसके खिलाफ पहले से ही प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
- छात्र बोले- हमारे अधिकार छीने जा रहेः छात्रों का आरोप है कि यह उनके असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार को कुचलने का जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि व्यापक आलोचना और पिछले कुछ महीनों में कई छात्र प्रदर्शनों के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन हलफनामे को वापिस लेने या छात्र समुदाय के साथ पारदर्शी बातचीत नहीं की जा रही है।
- यूनिवर्सिटी पर लगाए ये आरोपः छात्रों ने याद दिलाया कि हलफनामे को चुनौती देने वाली एक याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी दायर की गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र विरोधी रुख अपनाया, जो लोकतांत्रिक जवाबदेही निभाने की उसकी अनिच्छा को दर्शाता है।
एफिडेविट में यह है रखी गई शर्तें
- रिहायशी इलाकों और यूनिवर्सिटी परिसर कॉलेज में प्रदर्शन नहीं किया जाएगा
- तय की गई डेसीबल से ज्यादा आवाज में नारेबाजी पर रोक रहेगी
- छात्रों को हमेशा आइडेंटी कार्ड पहनना होगा
- हथियार या हानिकारक वस्तुएं लाने पर रोक रहेगी
- उल्लंघन करने वाले छात्र को यूनिवर्सिटी कैंपस में एंट्री पर पाबंदी लगाई जाएगी
- नियमों को ना मानने वाले छात्र को परीक्षाओं में बैठने नहीं दिया जाएगा
- नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों का दाखिला रद्द किया जाएगा
- यूनिवर्सिटी की दीवारों पर पोस्ट या स्टिकर नहीं लगाने दिए जाएंगे
- अगर कोई पोस्ट या इश्तेहार संबंधी पोस्ट लगता है तो उसे हटाने का खर्च खुद देना होगा.
- कैंपस में वाहन चलाना और पार्किंग पर पाबंदी रहेगी
- प्रदर्शन करने के लिए आउटसोर्स लोगों को बुलाने की अनुमति नहीं होगी
- सभी स्टूडेंट फेडरेशन भी कर चुकी हैं प्रदर्शन का ऐलान
- स्टूडेंट फेडरेशन सथ के नेता अशमीत सिंह ने बताया कि विभिन्न छात्र दलों के प्रतिनिधियों, स्वतंत्र छात्रों और पंजाब विश्वविद्यालय कैंपस छात्र परिषद (पीयूसीएससी) के अलावा अन्य संगठन भी यहां पर प्रदर्शन शुरू करने जा रहे हैं। सभी की तरफ से वीरवार यानि 30 अक्तूबर 2025 को वाइस चांसलर कार्यालय के मरण व्रत करने का ऐलान किया हुआ है।