बरेली में आजाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने रामभद्राचार्य का नाम लिए बिना उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। कहा- मेरठ में एक संत की कथा चल रही थी। यहां एक व्यक्ति ने संत बनकर कथा की। वो खुद को संत बताता है। कहता है कि बचपन से मेरी आंखें नहीं हैं।
सनातन के हिसाब से उन्होंने पूर्व जन्म में कितने पाप किए होंगे कि कुदरत ने उन्हें आंखें नहीं दीं। दुनिया को देखने का अधिकार छीन लिया। उस अपराधी से जनता ज्ञान ले रही है। वो कर्मयोगियों की धरती मेरठ को मिनी पाकिस्तान बता रहा हैं।
चंद्रशेखर बुधवार को संजय कम्युनिटी हॉल में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। दरअसल, मेरठ में 8 से 14 सितंबर तक रामभद्राचार्य की कथा थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पश्चिमी यूपी में आकर मिनी पाकिस्तान जैसा महसूस होता है। चंद्रशेखर ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय भीम, जय भारत, जय मंडल, जय जुहार, आदाब, शास्त्रीयकाल’ के नारों से की।
उन्होंने साफ किया कि प्रबुद्धजन सम्मेलन इसलिए किया जा रहा, जिससे समाज में फैली भेदभाव और जातिवादी मानसिकता को चुनौती दी जा सके। पहले ऐसे सम्मेलनों में केवल एक ही जाति के लोगों को मंच पर बैठाकर बाकी को ‘बुद्धू’ समझा जाता था।
1- बचपन से आंखें नहीं, कितने बड़े-बड़े पाप किए होंगे
चंद्रशेखर ने कहा- मेरठ किसानों की धरती है, 1857 की क्रांति की धरती है। वाल्मीकि की धरती है। उस धरती को वो मिनी पाकिस्तान बता रहे हैं। आप महसूस करके देखो कि जो ये बोलता हो कि मेरी आंखें नहीं हैं, मुझे दिखता नहीं है। तो सनातन के हिसाब से उन्होंने पूर्व जन्म में कितने पाप किए होंगे कि कुदरत ने उन्हें आंखें नहीं दीं।
ये मैं नहीं कहता। वो खुद कहते हैं कि क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाएंगे? जैसा कर्म करोगे, वैसा फल मिलेगा। तो अब सोचो, उन्होंने कितने बुरे कर्म किए होंगे, कितने बड़े-बड़े पाप किए होंगे। जिन्होंने इतने बड़े अपराध किए, उससे जनता को आज ज्ञान लेना पड़ रहा है। ये बहुत चिंता का विषय है।
2- यूपी सरकार की संवेदनाएं खत्म हो गईं
चंद्रशेखर ने कहा- आज सुबह बनारस की खबर पढ़ी। एक अस्पताल से 2 घंटे पहले पैदा हुए बच्चे और उसकी मां को निकाल दिया गया। कहा गया कि इसको हायर सेंटर ले जाओ। अब आप खुद सोचिए कि एक मां के लिए डिलीवरी का समय कितना पीड़ादायक होता है?
लेकिन, इस सरकार में इतनी संवेदनाएं खत्म हो गईं कि उस मां को बाहर निकाल दिया गया। उस 2 घंटे के बच्चे के जीवन की परवाह नहीं की गई। अब अधिकारी कह रहे हैं कि इस मामले में कार्रवाई करेंगे। ये कार्रवाई तब करेंगे, जब हम लोग वहां जाकर आंदोलन करेंगे, प्रदर्शन करेंगे।
3- महापुरुषों का कारवां आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करता रहूंगा
उन्होंने कहा- 2013 से 2025 तक 12 साल हो गए। मैंने इन 12 सालों में जो किया, आपके सामने है। 16 महीने जेल काटी। पैरों के नाखून खींचे गए। दांत तोड़ दिए गए। 2023 में गोली चला दी। लेकिन, आपके प्यार और आशीर्वाद से मैं बच गया। जब तक इस शरीर में लहू का आखिरी कतरा रहेगा, महापुरुषों का कारवां आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करता रहूंगा।
4- न मस्जिदें सेफ न कब्रिस्तान
कहा- मुसलमानों को कब तक लूटते रहोगे। न मस्जिदें सेफ न कब्रिस्तान। न आपका कारोबार सेफ है, सब कुछ लूट जाएगा। संविधान पर खतरा मंडरा रहा है। हम संविधान की वजह से ही सुरक्षित हैं। यह संविधान ही है कि एक हेडमास्टर का बेटा आज आपके सामने खड़ा है।
उन्होंने मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। जसपुर कांड का उदाहरण देते हुए कहा कि 12 साल की बेटी को दरिंदों ने रेप करके मार डाला। लेकिन, सरकार क्या कर रही है? मेनस्ट्रीम मीडिया की बजाय अब पढ़े-लिखे नौजवान गांव की समस्याएं उठा रहे हैं। ग्रामीण मीडियाकर्मियों को सम्मान देते हुए उन्होंने बिहार की घटना का जिक्र किया, जहां एक पत्रकार ने मंत्री से सवाल पूछा, तो उसके दांत तोड़ दिए गए।
5- जातिगत जनगणना कराना जरूरी
चंद्रशेखर ने कहा कि 1931 के बाद से देश में संपूर्ण जातिगत जनगणना नहीं हुई। आजादी के 75 साल बाद भी सरकार चांद पर जाने का दावा करती है। लेकिन, हकीकत में गरीबी और असमानता बरकरार है। हमारी मांग है, जातिगत जनगणना के साथ आर्थिक गणना भी होनी चाहिए।
सरकार दावा करती है कि 80 करोड़ लोग राशन पर निर्भर हैं। लेकिन, असल में धन का बंटवारा जरूरी है। समय आ गया है कि धन-धरती में बंटवारा हो।