देश में औसत महिला वेतनभोगी कर्मी की आय, औसत पुरुष वेतनभोगी कर्मचारी से लगभग 25% कम है। भारत में भी वेतनभोगियों का हिस्सा बढ़ रहा है, पर अब भी ये 23% ही है।
देश में नौकरीपेशा की औसत मासिक आय अन्य काम करने वालों के मुकाबले ज्यादा है।
2024 में एक औसत वेतनभोगी कर्मचारी की मासिक आय करीब ₹21 हजार रही, जबकि स्वरोजगार वाले की ₹13,200 और अस्थायी या दिहाड़ी श्रमिकों की ₹9 हजार थी।
यूं तो 2012 से 2024 के बीच नौकरीपेशा का औसत वेतन 90% बढ़ा, लेकिन महंगाई के साथ जोड़ें तो वेतन 4% घटा है।
- भारत में वेतनभोगियों की हिस्सेदारी दुनिया के औसत से लगभग आधी है।
- बांग्लादेश जैसे निम्न-मध्यम आय वाले देशों से लेकर चीन जैसे उच्च-मध्यम आय वाले देशों में वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
सोर्स: डेटा फाॅर इंडिया, वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडीकेटर्स (वर्ल्ड बैंक), पीएलएफएस सर्वे 2023-24 (एनएसओ), रोजगार-बेरोजगार सर्वे (2011-12)
- देश में 23% लोग वेतनभोगी हैं।
- पंजाब में वेतनभोगी कर्मियों का हिस्सा देश के औसत से दोगुने से भी ज्यादा है।
- दक्षिणी राज्यों में तमिलनाडु (34%) सबसे बेहतर। फिर कर्नाटक (26%), केरल (26%), तेलंगाना (25%) और आंध्र प्रदेश (22%) का नंबर आता है।
सोर्स: डेटा फाॅर इंडिया, वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडीकेटर्स (वर्ल्ड बैंक), पीएलएफएस सर्वे 2023-24 (एनएसओ), रोजगार-बेरोजगार सर्वे (2011-12)
- उच्च शिक्षित लोगों में 57% नौकरीपेशा हैं, जबकि अशिक्षितों में महज 6% हैं।
- बिना पढ़े-लिखे में 25% ऐसे हैं, जिन्हें काम करने का कोई पैसा नहीं मिलता है।
- 12वीं तक पढ़े लोगों में स्वरोजगार करने वाले सर्वाधिक हैं। इसमें दुकानदार, फ्रीलांसर और किसान आदि शामिल हैं।
स्रोत: डेटा फाॅर इंडिया, वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडीकेटर्स (वर्ल्ड बैंक), पीएलएफएस सर्वे 2023-24 (एनएसओ), रोजगार-बेरोजगार सर्वे (2011-12)।सोर्स: डेटा फाॅर इंडिया, वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडीकेटर्स (वर्ल्ड बैंक), पीएलएफएस सर्वे 2023-24 (एनएसओ), रोजगार-बेरोजगार सर्वे (2011-12)
सोर्स: डेटा फॉर इंडिया, वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडीकेटर्स (वर्ल्ड बैंक), पीएलएफएस सर्वे 2023-24 (एनएसओ), रोजगार-बेरोजगार सर्वे (2011-12)