सलमान खान के पिता और मशहूर स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान को ब्रेन हेमरेज के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। अब उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि आज उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज भी किया जा सकता है। इसी बीच सलमान खान के करीबी दोस्त संतोष शुक्ला ने बताया कि पिता की तबीयत खराब होने के बाद सलमान का क्या हाल है।
अमर उजाला से बातचीत में संतोष शुक्ला ने कहा, मैं उनके पास नहीं गया, बस दूर से ही देख पाया। यह बहुत निजी पल होता है। परिवार का समय होता है और ऐसे में किसी को डिस्टर्ब न करना ही बेहतर है। हम लोग बाहर से मिल रहे हैं। लोगों से भी यही कहूंगा कि कुछ कहने के बजाय बस दुआ करें, वही सबसे अच्छा है सोचिए, उनके घरवालों पर क्या गुजर रही होगी।
सलमान खान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, सलमान इस समय बिल्कुल शांत हैं। वह किसी को परेशान नहीं करना चाहते और खुद भी परेशान नहीं होना चाहते। कभी-कभी इंसान को थोड़ा स्पेस देना चाहिए और सलमान अभी वही कर रहे हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में सब कुछ बेहतर होगा।
संतोष ने यह भी बताया कि सलीम साहब की सेहत में अब सुधार है। उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया है, जो एक बड़ी राहत की बात है। ऊपर वाले का शुक्र है कि स्थिति अब बेहतर दिशा में जा रही है।
सलीम खान लीलावती अस्पताल में भर्ती
सलीम खान को 17 फरवरी को सुबह ब्रेन से जुड़ी दिक्कत के बाद लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें सुबह करीब 8:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम बनाई गई, जिसने उनकी स्थिति का आकलन किया।
18 फरवरी को लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पारकर ने जानकारी दी थी कि सलीम खान की डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की गई। डॉक्टरों के मुताबिक, यह ब्रेन सर्जरी नहीं है। DSA एक एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टेस्ट है, जिससे दिमाग की नसों की स्थिति और संभावित ब्लॉकेज को साफ तरीके से देखा जाता है।
डॉक्टरों ने बताया था कि प्रक्रिया के बाद सलीम खान की हालत स्थिर रही। उन्हें कुछ समय तक निगरानी में रखने का फैसला लिया गया। मेडिकल टीम लगातार उनकी रिकवरी पर नजर बनाए हुए है।
1960 के दशक में करियर शुरू हुआ था
सलीम खान 90 साल के हैं। उनका जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटरों में शुमार हैं।
सलीम खान ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की थी। 1960 के दशक में फिल्म बारात से करियर शुरू हुआ, लेकिन फिल्मों में उन्हें सीमित और छोटे किरदार ही मिले।लगभग दो दर्जन फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग नहीं, बल्कि राइटिंग असली ताकत है। इसके बाद उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और स्क्रिप्ट राइटर बन गए।