हरियाणा में रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में महिला सफाई कर्मियों के कपड़े उतरवाकर पीरियड्स चेक करने के मामले में कुछ नई बातें सामने आई हैं। एक पीड़ित महिला ने बताया है कि जब उन्होंने सुपरवाइजर को पीरियड्स के बारे में बताया था तो वह देरी का कारण का मान गया था, लेकिन उसी समय उसे किसी का कॉल आया।
महिला बताती है कि कॉल डिसकनेक्ट होने के बाद सुपरवाइजर ने कहा कि काम पर देरी से आने का कारण पीरियड्स हैं तो भी सबूत देना होगा। इसके बाद उसने एक अन्य महिला कर्मचारी को बुलाकर उनके सैनिटरी पैड्स चेक करवाए और उनके फोटो खिंचवाकर देखे। इस बात की छात्र नेता दिनेश ने भी पुष्टि की।
इसके अलावा, दो आरोपी सुपरवाइजरों में से एक का कहना है कि उसे तो केस में फर्जी फंसाया गया है। वह तो मौके से दूर बैठा फोन पर बात कर रहा था। उसकी गलती केवल इतनी है कि वह दूर बैठा इस मामले को देखकर हंस दिया था। इसी पर उसे भी मामले में घसीट लिया गया।
इस मामले की जांच के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक इंटरनल जांच कमेटी बनाई है, जिसे केमिस्ट्री विभाग की अध्यक्ष सपना गर्ग लीड कर रही हैं। उन्होंने गुरुवार को दोनों पक्षों को अपनी बात आमने-सामने रखने के लिए बुलाया है। उनकी रिपोर्ट के बाद ही इस केस में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, पीजीआई थाने में आरोपी सुपरवाइजर समेत 3 पर केस दर्ज हो गया है। SHO रोशनलाल ने बताया है कि सुपरवाइजर विनोद और वितेंदर समेत सुंदर लाल पर भी सैक्सुअल हैरेसमेंट का केस बना है।
- मासिक धर्म के कारण काम पर आने में देरी हुई: घटना के बाद 26 अक्टूबर को MDU की महिला सफाई कर्मचारियों से मिलने के लिए हरियाणा सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन कृष्ण कुमार पहुंचे थे। इस दौरान पीड़ित महिला कर्मियों ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई। महिलाओं ने बताया कि उन्हें मासिक धर्म की समस्या हो गई थी, जिसके कारण उन्हें यूनिवर्सिटी में काम पर आने में देरी हुई।
- सुपरवाइजर बोला- सबूत देना होगा: महिलाओं का कहना था कि उन्होंने इस बारे में सुपरवाइजर को बताया था, लेकिन सुपरवाइजर ने कहा कि ऊपर से आदेश है, उन्हें इसका सबूत देना होगा। सुपरवाइजर ने एक अन्य महिला कर्मचारी को उनकी जांच करने के लिए भेजा। इसके बाद उस महिला ने सफाई कर्मियों की जांच की।
- छात्र नेता बोले- सुपरवाइजर मान गया था, लेकिन ऊपर से फोन आ गया: छात्र नेता दिनेश भी बताते हैं कि महिला कर्मचारियों ने जब सुपरवाइजर को अपनी दिक्कत बताई तो सुपरवाइजर मान गया था, लेकिन कुछ देर बाद एक फोन आया, जिसके बाद सुपरवाइजर ने कहा कि ऊपर से आदेश है, जांच करवानी पड़ेगी कि वास्तव में जो वह कह रही हैं, वैसी कोई समस्या है भी या नहीं। तब एक अन्य महिला कर्मी को बुलाकर जांच करने को कहा गया।
- हमारा अपमान हुआ: पीड़ित महिलाओं ने हरियाणा सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन से कहा कि इस घटना से उनका अपमान किया गया है। ऐसा घिनौना आदेश देने वाले सुपरवाइजर और उसके अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। आयोग ने भी MDU प्रशासन को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
एक सुपरवाइजर बोला- मुझे फंसाया जा रहा
घटना के बाद सस्पेंड किए गए एक सुपरवाइजर विनोद ने कहा कि उसका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। उसने कहा- मैं तो वहां कर्मचारियों से दूर बैठकर फोन पर बात कर रहा था। इस दौरान फोन पर बात करते हुए हंस दिया तो महिला कर्मचारियों ने इसका गलत मतलब निकाल लिया। अब कर्मचारियों ने उसका नाम क्यों लिया, यह तो वही बता सकती है। मुझे इस मामले में फंसाया जा रहा है।
3 पॉइंट्स में जानिए, क्या है पूरा मामला…
- गौरतलब है कि 26 अक्टूबर को MDU में राज्यपाल अशीम घोष की विजिट के दौरान महिला सफाई कर्मियों के लेट काम पर पहुंचने पर सैनिटरी सुपरवाइजर भड़का था। उसने महिला कर्मियों से देरी से आने का कारण पूछा तो उन्होंने पीरियड्स की समस्या बताई।
- इसके बाद सुपरवाइजर ने महिलाओं से समस्या का सबूत मांग लिया। इतना ही नहीं, उसने एक अन्य महिला कर्मी को बुलाकर सफाईकर्मी महिलाओं के कपड़े उतरवाकर सैनिटरी पैड चेक करवाए थे। इससे भड़की महिलाओं ने हंगामा किया। मौके पर छात्र भी पहुंच गए, जिन्होंने सुपरवाइजर के साथ धक्कामुक्की की।
- सूचना मिलने पर कुलपति प्रो. राजवीर सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने तत्काल प्रभाव से सैनिटरी सुपरवाइजर विनोद कुमार और वितेंदर कुमार को सस्पेंड कर दिया और यूनिवर्सिटी की एक जांच कमेटी नियुक्त कर दी। आज यह कमेटी दोनों पक्षों से पूछताछ कर मामले की गहराई को जानेगी।
महिला आयोग ने लेटर जारी कर वीसी से मांगी रिपोर्ट
झधर, हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने भी मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वीसी व एसपी के नाम एक लेटर जारी किया गया, जिसमें 5 दिन के अंदर पूरे मामले की रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया। महिला आयोग ने पत्र में लिखा कि महिला सफाई कर्मचारियों के कपड़े उतरवाना गंभीर मामला है, इसे गंभीरता से लिया जाए।