लुधियाना के ASI का डायमंड पोर्ट्रेट बनाने में वर्ल्ड रिकार्ड:साउथ अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ने दी डॉक्ट्रेट की उपाधि

पंजाब पुलिस का ASI डॉ. अशोक कुमार एक अनूठे तरीके से पोर्ट्रेट तैयार करता है। उसने पोर्ट्रेट करने की ऐसी नई विद्या तैयार की है, जो उसके बनाए पोर्ट्रेट देखता है, देखता ही रह जाता है। डॉ. अशोक कुमार जरकन से डायमंड पोर्ट्रेट तैयार करता है। अब तक वो दुनिया की कई बड़ी हस्तियों के पोर्ट्रेट तैयार कर चुका है और वर्ल्ड रिकार्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा चुका है।

पंजाबी सिंगर व एक्टर दिलजीत दोसांझ, वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज समेत कई हस्तियां अपने डायमंड पोर्ट्रेट देखकर उसके कायल हो चुके हैं। दिलजीत दोसांझ को डॉ. अशोक कुमार ने डायमंड पोर्ट्रेट गिफ्ट किया तो उन्होंने कहा कि वो वर्ल्ड टूर पर हैं इसलिए इसे लेने बाद में आएंगे। दिलजीत ने उन्हें कहा था कि इसे संभालकर रखना इसे लेकर जरूर जाउंगा।

तीन महीने पहले डॉ. अशोक कुमार अपनी मां के साथ वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज के पास पहुंचे। पोर्ट्रेट देखकर वो बेहद खुश हुए। अशोक कुमार ने जब उन्हें पोर्ट्रेट दिया तो प्रेमानंद जी ने कह दिया कि इसे आशीर्वाद के तौर पर अपने पास रखना।

दिलजीत दोसांझ को करूंगा गिफ्ट

डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि दिलजीत दोसांझ का डायमंड पोर्ट्रेट उन्होंने तैयार किया है। अब जब भी दिलजीत दोसांझ से उनका मिलना होगा तो वो उन्हें जरूर इसे गिफ्ट देंगे, क्योंकि उन्होंने तब कहा था कि इसे मेरी अमानत समझकर अपने पास संभालकर रखना। एक दिन इसे लेने जरूर आऊंगा।

गुरुनानक देव जी का 20 फीट ऊंचा पोर्ट्रेट बनाकर बनाया वर्ल्ड रिकार्ड

डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि 2021 में उन्होंने श्री गुरुनानक देव जी का 20 फुट ऊंचा पोर्ट्रेट तैयार किया था। जो एक वर्ल्ड रिकार्ड था। उन्होंने बताया कि उनका नाम वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया। इस तरह तीन बार उनका नाम वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल हो चुका है। इसके अलावा एशिया रिकार्ड व लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में भी उनका नाम दर्ज हुआ है।

दक्षिण अफ्रीका की वेबिक यूनिवर्सिटी घाना ने दी डॉक्ट्रेट की उपाधि

अशोक कुमार पंजाब पुलिस में ASI हैं और उनके नाम के आगे डॉक्टर लिखा जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बहुत से पोर्ट्रेट तैयार किए हैं और उनकी स्टोरी एक बुक में प्रकाशित की गई है। उसके बाद दक्षिण अफ्रीका की वेबिक यूनिवर्सिटी घाना ने उन्हें डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि दी है।

अशोक का किप्स मार्केट व सुकना लेक में स्केच बनाने से वर्ल्ड रिकार्ड तक का सफर

उत्तर प्रदेश में पैदा हुए, लुधियाना में पले- बढ़े: अशोक के माता पिता उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अशोक का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ और जब वो छह माह के थे तो उनके माता- पिता उन्हें लेकर लुधियाना आ गए। यहीं पर पले बढ़े। पिता फैक्ट्री में काम करते थे। दसवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद पुलिस में कॉन्स्टेबल बन गए।

किप्स मार्केट लुधियाना में बनाते थे स्केच: अशोक कुमार को पेंटिंग व स्केच बनाने का शौक बचपन से था। रेत व मिट्‌टी पर उंगली से आकृतियां व कोयले से दीवार पर चित्र बचपन से बनाते थे। दसवीं कक्षा पास करने के बाद किप्स मार्केट लुधियाना में जाकर लोगों के स्केच बनाते थे। लोग प्रति स्केच 200 से 300 रुपए देते थे। करीब छह महीने तक यहां पर स्केच बनाते रहे।

सुकना लेक चंडीगढ़ में भी बनाते थे स्केच: डॉ. अशोक ने बताया कि उन्हें पता चला कि चंडीगढ़ सुकना लेक के किनारे स्केच बनाने वालों को अच्छे पैसे मिल जाते हैं तो वो एक दिन वहां चले गए। वहां पर चार पांच स्केच बनाए और 2000 रुपए कमाकर आ गए। उसके बाद पुलिस में भर्ती होने तक वहां जाते रहे।

पुलिस में कॉन्स्टेबल भर्ती हुए : अशोक कुमार 2008 में पुलिस में बतौर कॉन्स्टेबल भर्ती हुए। पुलिस की नौकरी के साथ उन्होंने केनवस पर पेंटिंग व स्केच बनाने शुरू किए। इसी दौरान उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में शामिल हुआ।

कोरोना के दौरान शुरू की डायमंड पेंटिंग: डॉ. अशोक ने बताया कि उनके मन में नया करने की ललक थी। इसलिए उन्होंने डायमंड पेंटिंग शुरू की। इसे न तो उन्हें किसी ने सिखाया है और न ही उनसे पहले ऐसी पेटिंग कोई बनाता था। उन्होंने बताया कि उसके बाद उन्होंने कई महान लोगों के पोर्ट्रेट बना दिए।

2021 में वर्ल्ड रिकार्ड में नाम शामिल: डॉ. अशोक ने बताया कि 2021 में उनका नाम पहली बार वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल हुआ। अब तक 4 बार वर्ल्ड रिकार्ड में नाम शामिल हो चुका है। उनका लक्ष्य है कि वो इस विधा को लोगों को दिखाएं और इससे जोड़ें।

20 से 25 हजार में तैयार होता है डायमंड पोर्ट्रेट

डॉ. अशोक ने बताया कि एक पोर्ट्रेट तैयार करने में 20 से 25 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं। पुलिस की नौकरी के कारण उन्हें पोर्ट्रेट तैयार करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिलता है। फिर भी रात को काम करके वो करीब एक महीने में एक पोर्ट्रेट तैयार कर लेते हैं।

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