संसद का शीतकालीन सत्र, आज तीसरा दिन:सदन बिना हंगामे के चलाने पर विपक्ष राजी; चुनावी सुधार-वंदे मातरम् पर चर्चा अगले हफ्ते

संसद के शीतकालीन सत्र का बुधवार को तीसरा दिन हैं। पहले दिन दोनों सदनों में SIR और वोट चोरी के आरोप के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। दूसरे दिन भी विपक्ष ने संसद के मकर द्वार के सामने SIR के विरोध में प्रदर्शन किया।इसमें सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल हुए।

विपक्ष SIR और वोट चोरी के आरोप पर फौरन चर्चा की मांग पर अड़ा रहा था। दोनों सदनों की कार्यवाही चलने नहीं दी। ‘वोट चोर- गद्दी छोड़’ के नारे भी लगाए थे। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दोनों पक्षों को अपने मीटिंग रूम में बुलाया था। यहां सहमति बनी कि आज सदन बिना किसी हंगामे के चलेगा।

बिरला से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता के. सुरेश ने बताया- 9 दिसंबर को इलेक्टोरल रिफॉर्म्स यानी चुनावी सुधारों पर 10 घंटे बहस होगी। साथ ही इससे एक दिन पहले 8 दिसंबर को वंदे मातरम् पर भी 10 घंटे चर्चा होगी। पीए मोदी बहस की शुरुआत करेंगे। वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर सरकार सदन में इस पर चर्चा करा रही है।

कांग्रेस सांसद ने संचार साथी एप को लेकर स्थगन प्रस्ताव दिया

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन संचार साथी एप को लेकर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया।

उन्होंने कहा- गोपनीयता का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मूल अधिकार है। दूरसंचार विभाग का यह आदेश कि मोबाइल कंपनियां और आयातक ‘संचार साथी’ एप को फोन में पहले से इंस्टॉल करें और उसे हटाया भी न जा सके। यह लोगों की गोपनीयता पर सीधा हमला है।

रेणुका चौधरी ने आरोप लगाया कि ऐसा कदम निगरानी बढ़ाने का रास्ता खोलता है और इससे लोगों की हर गतिविधि, बातचीत और फैसले लगातार निगरानी में रहने का खतरा पैदा हो जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए न पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं और न ही कोई संसदीय निगरानी।

शीतकालीन सत्र में 10 नए बिल पेश होंगे

संसद के शीतकालीन सत्र में 10 नए बिल पेश होंगे। लोकसभा बुलेटिन में शनिवार (22 नवंबर) को इसकी जानकारी दी गई थी। इनमें सबसे अहम एटॉमिक एनर्जी बिल है, जिसके तहत पहली बार निजी कंपनियों (भारतीय और विदेशी) को न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

फिलहाल देश में सभी परमाणु संयंत्र सरकार के नियंत्रण वाली कंपनियां जैसे NPCIL ही बनाती और चलाती हैं। बिल पास होने पर निजी क्षेत्र को भी न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन में प्रवेश मिलेगा।

सत्र में आने वाला दूसरा बड़ा बिल ‘हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया’ बिल होगा। इसमें UGC, AICTE और NCTE जैसे अलग-अलग रेगुलेटरी संस्थानों को खत्म करके एक ही राष्ट्रीय कमीशन बनाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सुगम और प्रभावी होगी।

अहम बिल जो पेश होंगे, उनसे क्या बदलाव

  • न्यूक्लियर सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव: लोकसभा बुलेटिन के अनुसार एटॉमिक एनर्जी बिल भारत में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल, कंट्रोल एंड रेगुलेशन से जुड़े प्रावधानों को नया फ्रेमवर्क देगा। यह पहली बार होगा जब प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर क्षेत्र में एंट्री मिल सकेगी। अब प्राइवेट कंपनियां भी न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगा सकेंगी।
  • हॉयर एजुकेशन कमीशन बनाने वाला बिल भी तैयार: सरकार हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल भी पेश करेगी। इसका उद्देश्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी को अधिक फ्रीडम देना और सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। (UGC, AICTE, NCTE) को खत्म कर उन्हें एक ही कमीशन में जोड़ दिया जाएगा।
  • हाईवे भूमि अधिग्रहण तेज होगा: नेशनल हाईवे (संशोधन) बिल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाएगा, ताकि नेशनल हाईवे प्रोजक्ट्स में देरी कम हो सके।
  • कंपनी कानून और LLP कानून में बदलाव: सरकार कॉर्पोरेट लॉ (संशोधन) बिल, 2025 लाने की तैयारी कर रही है। जो कंपनी अधिनियम 2013 और LLP अधिनियम 2008 में बदलाव कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और सरल करेगा।
  • सभी बाजार कानून एक बिल में: सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल, 2025 का उद्देश्य सेबी एक्ट, डिपॉजिटरीज एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट को मिलाकर एक सरल कानून तैयार करना है।
  • संविधान में संशोधन से जुड़ा बिल: संविधान में 131वां संशोधन करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस बिल के तहत खासकर चंडीगढ़ यूनियन टेरेटरी को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाएगा। आर्टिकल 240 के तहत केंद्र सरकार केंद्रशासित प्रदेशों के लिए रेगुलेशन बना सकती है, जिन्हें कानून का दर्जा प्राप्त होता है।
  • कंपनियों के खिलाफ विवाद का जल्द निपटारा: कंपनियों और व्यक्तियों के बीच झगड़े अक्सर सालों कोर्ट में लटकते रहते हैं। ऑर्बिट्रेशन एंड कॉन्सीलिएशन (अमेंडमेंट) बिल, 2025 का उद्देश्य है कि मध्यस्थता फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया सरल हो और झगड़ों का समाधान तेजी से हो सके।
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