इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने पाया कि पिछले लगभग 2 साल में प्रदेश से 1,08,300 लोग लापता हुए हैं, जिनमें से पुलिस केवल 9,700 का ही पता लगा सकी है।
न्यायालय ने इस स्थिति को अत्यंत चिंताजनक और गंभीर मानते हुए इसे ‘प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में’ शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को यानी आज होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने विक्रमा प्रसाद की याचिका पर दिया। शहर के चिनहट क्षेत्र निवासी याची ने न्यायालय को बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था।
मुख्य सचिव ने शपथपत्र में दी जानकारी
उसने चिनहट थाने में गुमशुदगी की सूचना भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने याची की सूचना पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रदेश में गुमशुदा हुए लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी देने का आदेश अपर मुख्य सचिव, गृह को दिया।
आदेश के अनुपालन में अपर मुख्य सचिव द्वारा दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 तक पुलिस के समक्ष दर्ज सूचनाओं के अनुसार 1,08,300 लोग लापता हुए हैं।
संबंधित अधिकारियों का कार्य संतोषजनक नहीं
शपथपत्र में यह भी बताया गया कि इन लापता व्यक्तियों में से मात्र 9,700 लोगों का ही पता चल सका है। न्यायालय ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि गुमशुदा लोगों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का कार्य संतोषजनक नहीं है।