गयाजी में बिहार प्रदेश कांग्रेस एक बार फिर अपने सबसे कठिन दौर से गुजरती नजर आ रही है। शीर्ष नेतृत्व के तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि पार्टी राज्य में अपनी सबसे कमजोर स्थिति में खड़ी है।
कांग्रेस के अंदर ही जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ चेहरों की कार्यशैली को इस बदहाली की बड़ी वजह मानी जा रही है, जो वर्षों से संगठन की दिशा तय कर रहे हैं। यह बातें खगड़िया के पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने गयाजी के सर्किट हाउस में मीडिया के समक्ष कहीं।
खगड़िया के पूर्व विधायक ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद यह असंतोष और गहरा गया। चुनाव के दौरान और बाद में हुई कथित गड़बड़ियों की चर्चा आज भी आम कांग्रेसजनों के बीच होती है।
कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर समय रहते संगठनात्मक सुधार किए जाते, तो हालात इतने खराब नहीं होते। लेकिन आलाकमान तक बात पहुंचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से निराशा बढ़ती चली गई। इसी नाराजगी और उपेक्षा के माहौल के बीच अब समर्पित कांग्रेसियों ने एकजुट होने का फैसला किया है। संगठन को नई दिशा देने और अपनी आवाज को मजबूती से शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी तक पहुंचाने के लिए 17 मार्च 2026 को पटना में एक महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके लिए 7 फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जनसंपर्क अभियान की शुरुआत कर दी गई है।
बिहार के प्रभारी रहे कृष्णा वलरू और कांग्रेस के प्रदेश के अध्यक्ष राजेश राम पर आरोप
इस अभियान में एआईसीसी सदस्य नागेंद्र पासवान विकल, पूर्व युवा अध्यक्ष, पूर्व महासचिव प्रदेश कांग्रेस सहित कई वरिष्ठ नेता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यह महासम्मेलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संगठन को बचाने और कांग्रेस की खोई साख लौटाने की पहल है।
उन्होंने कहा कि पटना में आयोजित होने वाले सम्मेलन की आवाज किसी षड्यंत्र की वजह से नहीं पहुंचती है तो दिल्ली में पुराने कांग्रेसी अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस मौके पर पूर्व विधायक ने बिहार के प्रभारी रहे कृष्णा वलरू व कांग्रेस के प्रदेश के अध्यक्ष राजेश राम पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप खुलकर लगाया। कहा कि पार्टी को डुबोने में इन दो लोगों का अहम हाथ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर इस महासम्मेलन के जरिए पार्टी के भीतर दबे असंतोष को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में बिहार कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल सबकी निगाहें 17 मार्च पर टिकी हैं। जब पटना में जुटने वाले समर्पित कांग्रेसी यह तय करने की कोशिश करेंगे कि पार्टी की आगे की राह क्या हो।