काशी में मणिकर्णिका घाट तोड़ा:लोग बोले- बिना बताए अहिल्याबाई की मूर्ति हटाई; DM ने कहा- मूर्तियां सुरक्षित हैं

काशी के मणिकर्णिका घाट को तोड़ा जा रहा है। यहां नए सिरे से घाट तैयार होगा, इसकी डिजाइन फाइनल है। मणिकर्णिका घाट को साल-1771 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया था। फिर 1791 में उन्होंने ही इसका जीर्णोद्धार कराया था। बुधवार को लोगों ने जब मलबे में अहिल्याबाई की मूर्ति देखी, तो विरोध शुरू कर दिया।

वहीं, लोगों के विरोध के बाद DM सत्येंद्र ने कहा- घाट की मूर्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्हें सुरक्षित रखा गया है। कुछ लोग AI से घाट के गलत वीडियो बनाकर जारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ट्रेस किया जा रहा है।

दरअसल, PM मोदी ने साल- 2023 में इस काम का शिलान्यास किया था। बाढ़ की वजह से करीब डेढ़ साल से काम बंद था। अब इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट को नए तरीके से तैयार किया जाएगा।

84 प्रमुख घाटों में शामिल है मणिकर्णिका

मणिकर्णिका काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। यह देवी अहिल्याबाई होल्कर के बनाए 5 घाटों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी जगह पर भगवान विष्णु की मणि गिरी थी, जिससे इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा।

घाट पर पारंपरिक स्थापत्य, ऐतिहासिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। देवी अहिल्याबाई ने यहां तीर्थयात्रियों के लिए कई सुविधाओं का विकास कराया था।

अब मणिकर्णिका महाश्मशान घाट के पुनर्विकास का कार्य चल रहा। कार्यदायी संस्था ने घाट पर निर्माण का कार्य शुरू किया है। इस बीच हाइड्रा की मदद से जो पक्के घाट हैं, उनके पत्थरों को तोड़ा जा रहा है। उन्हें बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा जा रहा।

वहीं, इस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद 300 साल पुरानी मणि (पत्थर की बनी हुई संरचना) भी हटाई गई है‌। लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन, प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर कर शांत कराया। विरोध की सूचना मिलने पर मौके पर डीसीपी, एसीपी, एडीसीपी और एडीएम सिटी भी पहुंचे।

बिना सूचना स्ट्रक्चर गिरा दिया

घाट पर बैठने वाले संजय मिश्रा ने कहा- हमारा परिवार इस मणि की देख-रेख करता है। लेकिन, प्रशासन ने बिना किसी सूचना के इसे गिरा दिया। इसमें अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति थी और एक शिवलिंग भी था। आज हम सभी यहां पर एकत्र हुए थे। हमारी प्रशासन से मांग है कि मणि को दोबारा हमें वापस दिया जाए।

मयंक बोले- मूर्तियां संरक्षित होनी चाहिए

मयंक पाल ने कहा- हम सभी पाल समाज से हैं। यहां जो मूर्ति तोड़ी गई, उसे दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए। नहीं तो हम लोग बड़ा आंदोलन करेंगे। आज हम सभी यहां एकत्र हो रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने हमें हटा दिया। यहां पर प्राचीन मूर्ति थी, जिसे तोड़ा गया है। लेकिन, कोई यह बात मानने के लिए तैयार नहीं है।

अजय राय बोले- बनारस की पहचान मिटा रही भाजपा

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी X पर पोस्ट किया। लिखा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, हमारी काशी में भाजपा सरकार ‘रिनोवेशन’ के नाम पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी (1771) की ऐतिहासिक धरोहर मणिकर्णिका घाट को तोड़ रही है। यह विकास नहीं, काशी की आत्मा और सनातन संस्कृति पर सीधा हमला है।

मणिकर्णिका घाट हो या वाराणसी की दालमंडी- भाजपा सरकार बनारस की विरासत, पहचान और इतिहास को मिटाने पर आमादा है।

उन्होंने कहा- भाजपा सरकार तत्काल मणिकर्णिका घाट और दालमंडी परियोजना को बंद करे। बनारस में चल रहे उन सभी प्रोजेक्ट्स को भी तुरंत रोके, जो काशी की विरासत, मंदिरों और ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

भाजपा और उनके ‘गुजरात मॉडल’ के अफसर जान लें- अगर काशी की धरोहर से खिलवाड़ नहीं रुका तो बनारस की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसा उग्र, व्यापक और निर्णायक जनआंदोलन खड़ा करेंगे कि उसे कोई भी प्रशासन संभाल नहीं पाएगा।

हम पहले भी सड़क से लेकर सदन तक लड़े हैं और अब भी सड़क से लेकर लोकसभा, विधानसभा और हर छोटे-बड़े मंच तक आवाज उठाएंगे।

वहीं, कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा- काशी पवित्र और प्राचीन है। भगवान शिव की नगरी, मोक्ष का द्वार है। काशी का उल्लेख वेदों, पुराणों, प्राचीन ग्रंथों में है। उसी वाराणसी में विकास के नाम पर धर्म की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, विनाश किया जा रहा है। मणिकर्णिका घाट पर प्राचीन मूर्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है, मंदिर ढहाए जा रहे हैं। लोग आहत हैं, मुखर हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।

पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के लिए सैकड़ों प्राचीन मंदिर और मूर्तियों को तोड़ दिया गया, अब फिर से बुलडोजर चल रहा।

लेकिन, जब प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में आस्था पर इस तरह से हमला किया जा रहा है, तब हिंदू धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों के मुंह में दही जम गया है।

अब जानिए क्या है प्रोजेक्ट

18 करोड़ से मिलेगा नया स्वरूप

मणिकर्णिका का पुनर्विकास कार्य CSR फंड से 18 करोड़ रुपए में किया जाना है। इससे नगर निगम की देख-रेख में कार्यदायी संस्था बना रही है। संस्था के अधिकारियों के अनुसार, 29 हजार 350 वर्गमीटर एरिया में काम कराया जाना है। यहां की मिट्‌टी दलदली है। इसलिए 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है। सख्त मिट्टी तक पाइलिंग का काम किया गया है। जिससे बाढ़ में यहां के निर्माण में किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

जानिए कैसा दिखेगा घाट

25 मीटर ऊंची चिमनी, जिससे लोगों के घरों तक न पहुंचे राख

इस श्मशान घाट पर 25 मीटर ऊंची चिमनी लगाई जाएगी। जिससे चिता की रखा हवा के साथ उड़ जाए और आसपास रहने वाले लोगों के घरों में न जाए। कायाकल्प में शवों के स्नान के लिए पवित्र जलकुंड, अपशिष्ट ट्रॉलियां, मुंडन क्षेत्र होंगे।

चारों तरफ से कवर दाह संस्कार क्षेत्र में पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था, सीढ़ियां, वेटिंग एरिया, भूतल पर पंजीकरण कक्ष, खुले में दाह संस्कार के लिए 18 प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षाकक्ष, दो सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। यहां पूरा निर्माण कार्य चुनार और जयपुर के पत्थरों से किया जाएगा।

DM बोले- मंदिर को नुकसान नहीं, भ्रम फैलाया जा रहा

डीएम सत्येंद्र कुमार ने कहा- मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए हर साल लाखों लोग आते हैं। जगह की कमी रहती है और सफाई व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई आती है। उन समस्याओं को देखते हुए परियोजनाओं को विकसित किया गया है। उन्होंने कहा-

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो AI से भी बनाकर जारी किए जा रहे। लेकिन वहां जो मणि थी, उसमें मूर्तियां थीं। उन्हें संस्कृत विभाग के साथ मिलकर संरक्षित किया गया है।

डीएम ने कहा- जब निर्माण कार्य पूरा होगा, तो उन मूर्तियों को भी उसी स्थान पर लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका का घाट पर जो मूल मंदिर है उन मंदिरों को किसी तरह से छाती नहीं पहुंचाई जाएगी वह मंदिर जिस प्रकार से हैं उसी प्रकार से रहेंगे। जिन कलाकृतियां के क्षति पहुंचाने की बात है उन्हें संरक्षित कराया गया है किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो इसको लेकर भ्रम फैला रहे हैं उनको चिह्नित किया जा रहा है आवश्यकता पड़ने पर उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।

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