इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, 2026 से शुरू हो रही है। शक्ति की उपासना के इन नौ दिनों के दौरान, भक्त अपने घरों में देवी दुर्गा की चौकी स्थापित करते हैं। लेकिन अगर चौकी स्थापित करते समय दिशा या नियमों में कोई गलती हो जाती है, तो पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है। शास्त्रों में चौकी स्थापना को लेकर कुछ महत्वपूर्ण नियमों का उल्लेख किया गया है। आइए जानते हैं कौन से हैं वो नियम।
चौकी स्थापना नियम
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- देवी की चौकी हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थापित करना चाहिए। यदि आप इस दिशा में पूजा करते हैं, तो सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। यदि आप चौकी को गलत दिशा में रखते हैं, तो पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
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- कुछ लोग एक साथ कई मूर्तियां या चित्र रख देते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, एक ही स्थान पर तीन मूर्तियां रखना अशुभ माना जाता है। बेहतर यही है कि अधिकतम दो मूर्तियां ही रखी जाएं।
- नवरात्रि पूजा में काले रंग का उपयोग करना अशुभ माना जाता है। काले कपड़े पहनना या पूजा स्थल पर काले कपड़े बिछाना गलत है। इसके बजाय, लाल और पीले जैसे शुभ रंगों का उपयोग किया जाना चाहिए।
- कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश को देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र के दाईं ओर रखा जाना चाहिए। यदि इसे गलत स्थान पर रखा जाता है, तो पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है।
- कलश स्थापना शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए पहला शुभ मुहूर्त: प्रातः 06 बजकर 52 मिनट से प्रातः 07 बजकर 43 मिनट तक
चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दूसरा मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।चैत्र नवरात्र तिथियां
- 19 मार्च: मां शैलपुत्री पूजा और कलश स्थापना
- 20 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
- 21 मार्च: मां चंद्रघंटा की पूजा
- 22 मार्च: मां कूष्मांडा का पूजन
- 23 मार्च: मां स्कंदमाता की उपासना
- 24 मार्च: मां कात्यायनी की वंदना
- 25 मार्च: मां कालरात्रि की पूजा
- 26 मार्च: मां महागौरी (महाअष्टमी व्रत)
- 27 मार्च: मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)