राजस्थान में कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सूची जारी होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। बगावत का बिगुल किसी विरोधी गुट ने नहीं, बल्कि गहलोत के सबसे विश्वासपात्र माने जाने वाले पूर्व जिलाध्यक्ष सईद अंसारी ने फूंका है।
सोशल मीडिया पर अंसारी के विस्फोटक आरोपों के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुपारस भंडारी मैदान में उतरे हैं, जिन्होंने एक भावुक खुला खत लिखकर पुरानी वफादारी याद दिलाने की कोशिश की है।
“खुद जीतने के लिए मुस्लिम को हरा देते हैं” – अंसारी का सनसनीखेज आरोप
सईद अंसारी, जो दशकों तक जोधपुर कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे, ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा, “अशोक गहलोत ने हमेशा मुस्लिम समाज का सिर्फ वोट लेने के लिए उपयोग किया है। अपना चुनाव जीतने के लिए मुस्लिम को टिकट देते हैं और फिर खुद जीत जाते हैं और मुस्लिम को हरा देते हैं।”
अंसारी का दर्द यहीं नहीं रुका। उन्होंने अपनी तीन हार का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे तीन बार टिकट देकर सहयोग नहीं दिया। मैं 425 वोट से हारा, किसी भी एजेंट को मतगणना में नहीं भेजा। कोर्ट से मैं चुनाव जीत गया था। फिर सुप्रीम कोर्ट में चला गया, वहां फैसला नहीं हुआ। दूसरी बार सूरसागर से भी बहुत कम मतों से हारा, उस समय भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को एक जुट नहीं किया गया।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गहलोत के करीबियों ने उनके खिलाफ पैसे बांटे और हराने का काम किया, फिर भी उन्हें सजा देने के बजाय टिकट देकर इनाम दिया गया
सुपारस भंडारी का जवाब: “दोस्ती का वास्ता और भाग्य का खेल”
अंसारी के आरोपों की आग ठंडी करने के लिए कांग्रेस नेता सुपारस भंडारी ने एक लंबा पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया। भंडारी ने अंसारी को “पुरानी पीढ़ी के मूल्यों” और गहलोत के साथ उनकी “प्रगाढ़ दोस्ती” की याद दिलाई।
भंडारी ने लिखा, “प्रिय अंसारी जी, आपका संदेश पढ़कर ताज्जुब हुआ। आप अक्सर कहते थे कि मेरी पहचान बनाने का श्रेय अशोक जी को ही जाता है। वे मेरे स्वभाव और स्वाभिमान का ख्याल रखते हैं।”
“कैंसर डिटेक्ट होते ही गहलोत ने टिकट की जगह इलाज को चुना”
भंडारी ने 2018 के विधानसभा चुनाव का एक बहुत ही भावुक किस्सा साझा किया, जो अब तक जनता की नजरों से ओझल था। उन्होंने दावा किया कि 2018 में सूरसागर से अंसारी का टिकट लगभग फाइनल हो गया था। गहलोत ने दिल्ली से फोन पर खुशी जताई थी और कहा था-
लेकिन ठीक उसी दिन अंसारी के दांत में दर्द हुआ और जांच में कैंसर का पता चला। भंडारी के अनुसार, जब गहलोत को यह पता चला, तो उन्होंने तुरंत कहा, “पहले स्वास्थ्य है, बताओ कहां इलाज कराना है।” गहलोत ने टिकट की चिंता छोड़ अंसारी के इलाज की व्यवस्था करवाई। भंडारी ने इसे “भाग्य का खेल” बताते हुए कहा कि इसमें गहलोत की कोई गलती नहीं थी।
“मेरा भी टिकट कटा, लेकिन मैं नाराज नहीं हुआ”
सुपारस भंडारी ने खुद का उदाहरण देते हुए लिखा कि 2018 में उनकी तैयारी जबरदस्त थी और “गोल्डन पीरियड” आने वाला था, लेकिन “एक सेकेंड में टिकट कट गया।” उन्होंने लिखा, “मेरा नाराज होना बनता था, लेकिन मैं रत्तीभर भी नाराज नहीं हुआ। मनीषा पंवार का नाम आते ही बधाई देने गया और अपनी सारी तैयारी उन्हें सौंप दी।”
भंडारी ने अंसारी से अपील की-
आपसे गुजारिश है कि भूल सुधार कर अशोक जी की मित्रता को कायम रखें। आपको पार्टी में रहना नहीं, उसे सशक्त बनाना है।
अंसारी के विरोध के सवाल को टाल गए गहलोत जोधपुर सर्किट हाउस में सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया ने अंसारी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सवाल पूछा, तो वे इसे टाल गए। गहलोत ने हंसते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि – ‘यार… कुछ कमी मेरे से रही होगी’।
पूर्व जिलाध्यक्ष सईद अंसारी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पूछे जाने पर कहा –
ना तो अशोक गहलोत के प्रति विरोध है, ना अध्यक्ष प्रति विरोध है। अध्यक्ष का हम सम्मान करते हैं, उसको बधाई देते हैं। यह मेरी भावना है, जो मैंने व्यक्त की है। व्यक्तिगत है मेरी। ये मैंने अपनी बात कही है।
अंसारी की पायलट के साथ कवर फोटो
जोधपुर की राजनीतिक चर्चाओं में एक रोचक पहलू है कि पूर्व जिलाध्यक्ष सईद अंसारी के फेसबुक पेज पर लगी कवर फोटो। दशकों से अशोक गहलोत के अजीज रहे अंसारी की फेसबुक आईडी के कवर फोटो में वे पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ नजर आ रहे हैं। यह फोटो 5 सितंबर को अपडेट किया गया था।
इतना ही नहीं, कुछ महीने पहले पायलट गुट के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता करण सिंह उचियारड़ा के साथ भी उनकी फोटो सोशल मीडिया पर सामने आई थी।