दावा- ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई रूस भागने की फिराक में:सत्ता गंवाने का डर, बेटे और साथियों के साथ 20 लोग भी तैयार

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच रूस भागने की योजना तैयार कर ली है। अगर प्रदर्शनों को रोका नहीं जा सका, तो खामेनेई देश छोड़ देंगे।

ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ को मिली एक खुफिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 86 साल के खामेनेई अपने बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा समेत करीब 20 लोगों के छोटे दल के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं।

ईरान में आठ दिन से खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 78 शहरों के 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हो चुके हैं। इनमें कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। वहीं 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

देश छोड़ने के लिए पहले से तैयार खामेनेई

खामेनेई कई चैरिटेबल फाउंडेशनों के जरिए अरबों डॉलर की संपत्ति पर नियंत्रण रखते हैं। इनमें ‘सेताद’ नाम की संस्था प्रमुख है, जिसकी वैल्यू पहले भी कई अरब डॉलर आंकी गई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शासन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदार पहले से ही अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में रह रहे हैं।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत विदेशों में संपत्तियां, प्रॉपर्टी और कैश पहले से सुरक्षित कर लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत देश छोड़ा जा सके।

ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी

देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

प्रदर्शनकारियों को लेकर हमले की चेतावनी दे चुका अमेरिका

पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की गई तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, हम पूरी तरह तैयार हैं। अगर ईरान ने पहले की तरह लोगों को मारना शुरू किया, तो उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRAI और ओस्लो स्थित हेंगाव ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने आम नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें बच्चों को भी नहीं बख्शा गया।

देशभर में फैले इन प्रदर्शनों की शुरुआत ईरानी मुद्रा के गिरने और महंगाई बढ़ने के बाद हुई। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और शासन परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।

वहीं, ईरान की सरकारी फर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रदर्शनों में 250 पुलिसकर्मी और बसीज बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं।

ईरान की ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ भी कमजोर पड़ी

ईरान के सहयोगी देशों और गुटों की स्थिति कमजोर हुई है। 2023 में शुरू हुए इजराइल-हमास युद्ध के बाद हमास को भारी नुकसान हुआ है। लेबनान की हिजबुल्ला के कई शीर्ष नेता मारे गए हैं। दिसंबर 2024 में सीरिया के राष्ट्रपति को सत्ता से हटाया गया। यमन के हूती विद्रोहियों पर भी हवाई हमले किए हैं।

‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ ईरान के नेतृत्व वाला एक अनौपचारिक गठजोड़ है। इसमें वे देश और संगठन शामिल हैं जो अमेरिका और इजराइल के विरोध में खड़े माने जाते हैं। इस गठजोड़ का मकसद मध्य-पूर्व में अमेरिका और इजराइल के प्रभाव को चुनौती देना है।

इसमें मुख्य रूप से ईरान के अलावा हमास (गाजा), हिजबुल्ला (लेबनान), हूती विद्रोही (यमन) और पहले सीरिया की सरकार शामिल रही है। ईरान इन गुटों को राजनीतिक समर्थन के साथ-साथ हथियार, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद भी देता रहा है।

भारत की एडवाइजरी- गैर जरूरी यात्रा से बचें

भारत सरकार ने ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए अपने नागरिकों को वहां गैर जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को यह एडवाइजरी जारी की। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जो भारतीय नागरिक ईरान में रेजिडेंट वीजा पर रह रहे हैं और अब तक दूतावास में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कराएं।

खामेनेई 35 साल से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज

आयतुल्लाह अली खामेनेई 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज हैं। ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाया गया तो खामेनेई ने क्रांति में बड़ी भूमिका निभाई थी।

इस्लामिक क्रांति के बाद खामेनेई को 1981 में राष्ट्रपति बनाया गया। वह 8 साल तक इस पद पर रहे। 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया।

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अयातुल्ला धर्मगुरू की एक पदवी है। ईरान के इस्लामिक कानून के मुताबिक, सुप्रीम लीडर बनने के लिए अयातुल्ला होना जरूरी है।

यानी कि सुप्रीम लीडर का पद सिर्फ एक धार्मिक नेता को ही मिल सकता है। लेकिन जब खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाने के लिए कानून में संसोधन किया गया था क्योंकि वे धार्मिक नेता नहीं थे।

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