दिल्ली में रामलीला मैदान के पास मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से 6 जनवरी की देर रात करीब 1 बजे अतिक्रमण हटाया गया। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर एमसीडी ने 17 बुलडोजर से यहां बने बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर, दुकानों को ढहाया।
तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास जब इस कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा था, तब भीड़ ने कर्मचारियों और पुलिस पर पथराव किया। भीड़ बैरिकेडिंग तोड़ कर कार्रवाई रोकने पहुंची थी, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर उसे खदेड़ दिया।
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने कहा कि हालात कंट्रोल में हैं। पूरे इलाके को 9 जोन में बांटा गया है। हर जोन की जिम्मेदारी ADCP स्तर के अधिकारी को दी गई। संवेदनशील जगहों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात है। वीडियो के जरिए पत्थरबाजों की पहचान की जाएगी।
वहीं डीसीपी निधिन वलसन ने कहा कि एमसीडी ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की, जो अभी भी जारी है। भीड़ की पत्थरबाजी में 4-5 अधिकारियों को मामूली चोटें आईं हैं।
यह है पूरा मामला
फैज-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति ने दिल्ली एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसमें कहा गया कि मस्जिद के बाहर की 0.195 एकड़ जमीन पर बने ढांचे अवैध हैं। उन्हें हटाया जाएगा।
एमसीडी का कहना है कि अतिरिक्त जमीन पर मालिकाना या वैध कब्जे के दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं। एमसीडी का यह आदेश 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्देशों के आधार पर जारी किया गया था।
डिवीजन बेंच के आदेश में तुर्कमान गेट के पास रामलीला ग्राउंड से करीब 38,940 वर्ग फुट अतिक्रमण हटाने को कहा गया था, जिसमें सड़क, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग और एक निजी क्लिनिक शामिल हैं।
मस्जिद समिति का कहना है कि यह जमीन वक्फ संपत्ति है। वह इसके लिए वक्फ बोर्ड को लीज किराया देती है। हमें अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति नहीं है। बारात घर और क्लिनिक का संचालन बंद किया जा चुका है। मुख्य आपत्ति कब्रिस्तान को लेकर है।
6 जनवरी: हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
6 जनवरी को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से अतिक्रमण (बारात घर और डायग्नोस्टिक सेंटर) हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था।
कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम दिल्ली (MCD), शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली वक्फ बोर्ड समेत अन्य विभागों से जवाब मांगा है।
जस्टिस अमित बंसल ने कहा था कि मामला सुनवाई के योग्य है। सभी पक्षों को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।