पंजाब का इंजीनियर किसान- खेती से लाखों की कमाई:पिता का मान रखने खेत में उतरे; सालाना 900 क्विंटल कच्ची हल्दी का उत्पादन

पंजाब के एक प्रयोगधर्मी किसान अतिंदर सिंह कट्टू ने हल्दी की खेती से अपनी किस्मत बदल दी है। बरनाला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर धनौला से चार किलोमीटर दूर स्थित कट्टू गांव के रहने वाले 35 वर्षीय अतिंदर सिंह ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कृषि विश्वविद्यालयों में शुमार लुधियाना स्थित पीएयू (पंजाब कृषि विश्वविद्यालय) से वर्ष 2015 में एमएससी (खेती विज्ञान) की डिग्री हासिल की।

अतिंदर सिंह के पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा बड़ा होकर खेतीबाड़ी की पढ़ाई करे और उसी के अनुरूप खेती करे। अपने पिता का मान रखते हुए अतिंदर सिंह ने खेती में जरूरी विविधीकरण अपनाया और आज वह सालाना करीब 900 क्विंटल कच्ची हल्दी का उत्पादन करते हैं। इससे वह लाखों रुपए कमाते हैं और अनेक किसानों को प्रेरित करते हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर से किसान तक का सफर

अतिंदर सिंह कट्टू ने एक कॉलेज में करीब दो साल बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर पढ़ाया। लेकिन उनका मन खेतों में रमता था, इसलिए वर्ष 2017 में उन्होंने पूरी तरह से खेती की राह पकड़ी। पहले वह पारंपरिक खेती ही कर रहे थे, लेकिन 2019 में हल्दी की जैविक खेती शुरू की। यह आज 9 एकड़ में फैल चुकी है। वह करीब 6 एकड़ में सरसों, कई तरह की दालें, सब्जियां और सौंफ भी उगाते हैं।

हल्दी की खेती में सफलता

अतिंदर सिंह बताते हैं कि पढ़ाई के दिनों में दोस्त की पीएचडी की हल्दी संबंधी स्टडी के दौरान मार्केटिंग के सिलसिले में कई उपयोगी बातें पता चलीं। बाद में उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से ही इस काम को शुरू किया। शुरू में वह 4-5 तरह की हल्दी उगाते थे- पंजाब-1, पंजाब-2, सेलम आदि। पिछले दो साल से आईआईएसआर प्रगति पर फोकस कर दिया। यह आईआईएसआर (भारतीय मसाले अनुसंधान संस्थान), कालीकट की किस्म है, जो 180 दिन में पककर तैयार हो जाती है। यह फसल अप्रैल में बोई जाती है।

कच्ची हल्दी को साफकर, उबाल, सुखा और पीसकर पाउडर बनाया जाता है। एक एकड़ में कच्ची हल्दी लगभग 100 क्विंटल पैदा होती है। सारे उत्पाद संबंधी लॉसेस निकालकर लगभग 15 क्विंटल हल्दी पाउडर तैयार होता है। वह आधा और एक किलोग्राम की पैकिंग तैयार करते हैं।

मार्केटिंग में आई परेशानी, अब घर से ले जाते हैं लोग

अतिंदर सिंह बताते हैं कि शुरू में तो मार्केटिंग में बड़ी परेशानी आई। वह पहली बार (2019 में) केवल आधा किलोग्राम हल्दी बेच पाए और इसके अगले हफ्ते 10-15 लोगों ने खरीदी। अब तो लोग घर से ही हल्दी ले जाते हैं। वह साल में औसतन 10-15 हफ्ते 10 से 15 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं।

किसानों को दिया संदेश

अतिंदर सिंह के अनुसार, खेतों में सब कुछ उग सकता है। किसानों को भी पारंपरिक फसल चक्र से बाहर निकलना होगा। वे मसालों, फलों, औषधीय पौधों की खेती का रुख करेंगे तो सरकार पर उनकी निर्भरता कम होगी और आमदनी भी कई गुणा बढ़ जाएगी। उनकी इस सोच से प्रेरित होकर करीब 20 किसान उनके साथ जुड़ चुके हैं।

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