पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री इशाक डार ने बुधवार को तालिबान से दोस्ती को देश के लिए महंगा बताया। उन्होंने अफगानिस्तान से जुड़े आतंकवाद के लिए पूर्व पीएम इमरान खान को जिम्मेदार ठहराया।
डार ने संसद में 2021 के एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब तत्कालीन ISI चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद काबुल गए थे। वहां चाय पीते हुए उन्होंने कहा था कि सब ठीक हो जाएगा।
डार ने कहा कि अफगानिस्तान की उस एक कप चाय की आज तक देश को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
डार बोले- हजारों आतंकी पाकिस्तान लौट आए
डार ने इमरान खान पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार ने तालिबान के सत्ता में आने के बाद बॉर्डर खोल दीं। इससे आतंकी वापस लौट आए। पाकिस्तानी-तालिबान, फित्ना अल-ख्वारिज और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे ग्रुप अफगानिस्तान से हमले कर रहे हैं।
डार ने कहा,
जब हम वहां जाते हैं तो वे कहते हैं कि हम एक कप चाय के लिए आए हैं… अल्लाह सबकी मुश्किलें कम करे, लेकिन उस कप चाय की कीमत हमें सबसे ज्यादा चुकानी पड़ी है।
डार ने कहा- उस चाय के प्याले ने पूरी सीमा फिर से खोल दी। 35-40 हजार तालिबानी जो यहां से भाग गए थे, फिर से वापस आ गए। इमरान सरकार ने उन आतंकियों को रिहा कर दिया जिन्होंने स्वात में पाकिस्तानी झंडे जलाए थे, लोगों को बेरहमी से मारा था। उस समय रिहा किए गए आतंकी आज बलूचिस्तान में हमलों के सरगना हैं। यह सब हमारे लिए एक सबक है।
तालिबान के सत्ता में आने के बाद काबुल गए थे फैज हामिद
तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को काबुल के साथ ही करीब-करीब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। दुनिया को पहले ही शक था कि पाकिस्तान फौज और ISI तालिबान की पूरी मदद कर रही है। सितंबर 2021 की शुरुआत में जनरल फैज हमीद चुपचाप काबुल पहुंचे। यहां एक ही फाइव स्टार सेरेना होटल है।
यहां वे तालिबान के आला नेताओं के साथ हाथ में चाय का प्याला लेकर कहकहे लगा रहे थे। संयोग से इसी होटल में ब्रिटेन की एक महिला जर्नलिस्ट मौजूद थी। उसने न सिर्फ फैज के फोटो लिए, बल्कि कुछ सवाल भी किए। इसके जवाब में फैज ने सिर्फ इतना कहा- ऑल इज वेल।
ISI चीफ की 1 महीने में ही चली गई नौकरी
तालिबानी नेताओं से मुलाकात की यह खबर आग की तरह फैल गई। फैज के काबुल दौरे और तालिबान नेताओं से मुलाकात बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन को नागवार गुजरी। अमेरिका को लगा कि जनरल फैज तालिबान नेताओं के साथ मिलकर अफगानिस्तान में अमेरिकी शिकस्त का जश्न मना रहे हैं।
अमेरिका और आर्मी चीफ जनरल बाजवा ने इमरान खान पर हामिद को हटाने का दबाव बनाया। ऐसे में काबुल के दौरे के एक महीने बाद ही हामिद को ISI चीफ के पद से हटा दिया गया। पाकिस्तान-अफगानिस्तान में कई दिनों झड़प चल रही
2021 में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से जाने के बाद तालिबान ने काबुल कब्जा लिया था। तब पाकिस्तान ने तालिबान का समर्थन किया था। इमरान खान ने इसे ‘गुलामी की जंजीरें तोड़ना’ कहा था।
हालांकि अब सीमा पर दोनों देशों की झड़पें बढ़ गई हैं। पिछले महीने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक्स में दर्जनों लोग मारे गए थे। इसके बाद तालिबान ने जवाबी कार्रवाई की थी। बाद में तुर्किये और कतर की मध्यस्थता से सीजफायर हुआ, लेकिन हिंसा पूरी तरह रुक नहीं है।
दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है, जबकि 2024 में यह चौथे स्थान पर था।
- TTP के हमलों में 90% की वृद्धि हुई है।
- बलूच आर्मी (BLA) के हमलों में 60% बढ़ोतरी हुई है।
- इस्लामिक स्टेट- खुरासान (IS-K) ने अब पाकिस्तानी शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित इलाके हैं। देश भर की कुल आतंकी घटनाओं में से 90% इसी इलाके में हुईं।
रिपोर्ट में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लगातार दूसरे साल पाकिस्तान का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन बताया गया। 2024 में इस ग्रुप ने 482 हमले किए, जिसकी वजह से 558 मौतें हुई थीं, जो 2023 के मुकाबले 91% ज्यादा हैं।