राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने प्रतापगढ़ में पुलिस हिरासत में बेरहमी से मारपीट और एक व्यक्ति को झूठे एनडीपीएस मामले में फंसाने की साजिश मामले में सख्ती के बाद इसका असर भी सामने आया है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रतापगढ़ एसपी ने आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर (तत्कालीन एसएचओ) दीपक बंजारा को सस्पेंड कर दिया है।
जस्टिस फरजंद अली की कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतापगढ़ को इस पूरे प्रकरण की ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ न्यायिक जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं। मामले में पीड़ित की ओर से सीनियर एडवोकेट धीरेंद्रसिंह और एडवोकेट रॉबिन सिंह ने पैरवी की।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह मामला शाकिर शेख (34) निवासी बजरंगगढ़, हाल अशोक नगर, प्रतापगढ़ की याचिका का है। शाकिर ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि प्रतापगढ़ एसएचओ दीपक बंजारा और उनकी टीम ने उसके पिता अब्दुल हमीद शेख हिरासत में न केवल जबरन घर में घुसकर बर्बरतापूर्वक प्रताड़ित किया, बल्कि उसे एनडीपीएस एक्ट के झूठे मामले में फंसाने के लिए फर्जी सबूत भी गढ़े।
हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार, पुलिस ने शाकिर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 59 (पुलिस अधिकारी द्वारा कर्तव्य में विफलता या मिलीभगत) और बीएनएस के तहत झूठे सबूत गढ़ने जैसे गंभीर अपराधों में उलझाने की कोशिश की, ताकि उसे 10 साल से ज्यादा की सजा हो सके। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने पीड़ित की चोटों के फोटो देखने के बाद टिप्पणी की थी कि यह “जानवरों जैसा बर्ताव” है।
मामले में इंस्पेक्टर बंजारा के अलावा ये भी हैं प्रतिवादी
इस याचिका में कुल 14 प्रतिवादी बनाए गए हैं। जिनमें मुख्य रूप से इंस्पेक्टर दीपक बंजारा के अलावा प्रतापगढ़ एसपी, उदयपुर आईजी, डीजीपी राजस्थान, सीएमएचओ प्रतापगढ़, पुलिस कर्मियों में कांस्टेबल राजवीर, कांस्टेबल रमेश उर्फ गजनी और कांस्टेबल सोनू यादव भी प्रतिवादी हैं। इनके अलावा, नर्सिंग कॉलेज प्रतापगढ़ के चार नर्सिंग छात्र इंद्रजीत उर्फ इंद्रराज पुत्र महिपाल कजला, यतन पुत्र रामनिवास, उत्सव ठाकुर पुत्र राजेंद्र सिंह और राहुल सेन भी इस मामले में प्रतिवादी हैं।
सरकार ने मानी गलती: SHO सस्पेंड, विभागीय जांच शुरू
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी इंस्पेक्टर दीपक बंजारा को 22 जनवरी को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी प्रतापगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है।
कोर्ट ने अपने आदेश में सुधार करते हुए स्पष्ट किया कि 20 जनवरी के आदेश में गलती से ‘गुलाब सिंह’ का नाम लिख दिया गया था, जिसे अब ‘दीपक बंजारा’ पढ़ा जाए।
मजिस्ट्रेट की ‘न्यायिक हिम्मत’ को सलाम
जस्टिस फरजंद अली ने प्रतापगढ़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस के खिलाफ संज्ञान लेकर ‘न्यायिक साहस’ (ज्यूडिशियल करेज) और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को बिना किसी दबाव के जांच पूरी करने की खुली छूट दी है। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
इंस्पेक्टर बंजारा पर संगीन केस: फर्जी ड्रग्स केस बनाकर 22 लाख वसूलने का भी आरोप
सस्पेंड हुए इंस्पेक्टर दीपक बंजारा का विवादों से पुराना नाता रहा है। एसीबी जयपुर में दर्ज एक अन्य एफआईआर में बंजारा और उनकी टीम पर फर्जी ड्रग्स केस बनाकर लाखों रुपये वसूलने का आरोप है।
मामा को उठाया, 2 किलो फर्जी ड्रग्स रखी: परिवादी सद्दाम हुसैन ने एसीबी को बताया कि 19 जनवरी 2025 को सीआई दीपक बंजारा ने उसके मामा अनवर अजमेरी को बस से उतारकर उनके बैग में 2 किलो फर्जी सामान (ड्रग्स) रख दिया।
जमीन बेचकर चुकाए 22 लाख: पुलिस ने अनवर को छोड़ने के बदले 50 लाख रुपये मांगे। परिवार ने डरकर जमीन बेची और 22 लाख रुपये की रिश्वत एएसआई महेंद्र सिंह को दी।
एसीबी की रेड: बाद में जब पुलिस ने 1 लाख रुपये और मांगे, तो सद्दाम ने एसीबी में शिकायत की। एसीबी ने ट्रेप का जाल बिछाया, लेकिन भनक लगते ही आरोपी बच निकले। हालांकि, एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया था।