राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसला सुनाते हुए एकलपीठ द्वारा 27 मई को पारित आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि सिंगल जज ने बिना नोटिस जारी किए और बिना सुनवाई का मौका दिए ही फैसला सुना दिया, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामला बाड़मेर जिले की तहसील चौहटन के भोजारिया गांव से जुड़ा है। राज्य सरकार ने नया राजस्व गांव ‘आंबपुरा’ मौजूदा राजस्व गांव ‘छोटा भोजारिया’ से बनाया था। इसके खिलाफ भोजारिया निवासी जुगताराम ने पिटीशन दायर की थी।
एकलपीठ ने गांव बनाना रद्द किया था
एकलपीठ ने 27 मई को याचिकाकर्ता जुगताराम की पिटीशन स्वीकार करते हुए नए गांव ‘आंबपुरा’ बनाने के फैसले को रद्द कर दिया था। लेकिन इस फैसले में रेस्पोंडेंट ग्राम पंचायत भोजारिया के सरपंच को कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही सुनवाई का मौका दिया गया। इस पर सरपंच ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की।
- अपीलकर्ता सरपंच की ओर से वकील प्रीतम सोलंकी ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया कि मूल रिट कार्यवाही में वे रेस्पोंडेंट संख्या 5 थे, लेकिन उन्हें नोटिस जारी किए बिना और सुनवाई का कोई मौका दिए बिना ही फैसला सुना दिया गया।
- वकील ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता कार्यवाही में एक जरूरी पक्षकार है और उन्हें सुनवाई का मौका देना जरूरी था, क्योंकि 27 मई के आदेश से रेस्पोंडेंट संख्या 5 के अधिकार प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि अपील स्वीकार की जाए और उस आदेश को रद्द किया जाए।
- इसके विपरीत, रेस्पोंडेंट संख्या 1 (जुगता राम) के वकील ने अपीलकर्ता के तर्कों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता-रेस्पोंडेंट संख्या 5 को सुनवाई का मौका देने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वर्तमान अपील के साथ दाखिल दस्तावेज अनुबंध-ए1 एक झूठा और जाली दस्तावेज है। उन्होंने यह भी कहा कि यह दस्तावेज 27 मई के आदेश पारित होने के बाद तैयार किया गया है।
- जुगताराम के वकील ने कहा कि अपीलकर्ता के अधिकार सिंगल जज द्वारा पारित आदेश से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं हुए हैं, क्योंकि राज्य सरकार ने गलत तरीके से नया राजस्व गांव ‘आंबपुरा’ ‘छोटा भोजारिया’ से बनाया था। यह तहसीलदार और ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत भोजारिया द्वारा 17 फरवरी और 24 फरवरी के पत्राचार के अनुसार था। उन्होंने कहा कि इस अपील को स्वीकार करने में कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
डिवीजन बेंच का निर्णय
डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों के तर्क सुने और 27 मई 2025 के आदेश सहित मामले के प्रासंगिक रिकॉर्ड का अध्ययन किया। कोर्ट ने कहा कि रिट पिटीशन में पक्षकारों की सूची का सरसरी अवलोकन यह दर्शाता है कि वर्तमान अपीलकर्ता रिट कार्यवाही में रेस्पोंडेंट संख्या 5 है।
अपील के साथ संलग्न अनुबंध-ए1 के अनुसार, ग्राम सभा भोजारिया का प्रस्ताव संकल्प संख्या 7 के अनुसार मौजूदा राजस्व गांव ‘छोटा भोजारिया’ से नया गांव ‘आंबपुरा’ बनाने के लिए भेजा गया था। अपीलकर्ता के वकील ने कहा कि संकल्प संख्या 7 राज्य सरकार को ‘छोटा भोजारिया’ से नए राजस्व गांव ‘आंबपुरा’ के निर्माण के लिए भेजे गए दस्तावेजों के साथ संलग्न था, और सही तरीके से नया राजस्व गांव ‘अंबापुरा’ ‘छोटा भोजारिया’ से बनाया गया था, लेकिन बिना नोटिस के सिंगल जज ने गांव बनाने के निर्णय को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा सुनवाई जरूरी थी
डिवीजन बेंच ने अपने विचारोपरांत फैसला सुनाते हुए कहा कि चूंकि रिट पिटीशन का निर्णय उत्तरदाता संख्या 5-अपीलकर्ता को सुनवाई का मौका दिए बिना किया गया है और उसमें पारित आदेश उत्तरदाता संख्या 5-अपीलकर्ता के अधिकारों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है, इसलिए उत्तरदाता संख्या 5 को अपने मामले का बचाव करने के लिए सुनवाई का मौका दिया जाना आवश्यक है।
- कोर्ट ने अपने विचारशील मत में कहा कि चूंकि उत्तरदाता संख्या 5-अपीलकर्ता को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया गया था, इसलिए सिंगल जज द्वारा 27 मई 2025 को पारित आदेश टिकाऊ नहीं है।
- उपरोक्त चर्चा के मद्देनजर, डिवीजन बेंच ने विशेष अपील को स्वीकार कर लिया। 27 मई के आदेश को रद्द और निरस्त कर दिया गया और मामले को वर्तमान अपीलकर्ता-रेस्पोंडेंट संख्या 5 को सुनवाई का उचित मौका देने के बाद इसे नए सिरे से तय करने के लिए सिंगल जज को वापस भेज दिया गया।
- मामले में तात्कालिकता को देखते हुए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिट पिटीशन को जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए, अधिमानतः अगले सप्ताह में।