राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा- भारत और हिंदू एक ही हैं। भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है। हमारी सभ्यता पहले से ही इसे जाहिर करती है।
गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा कि जो भी भारत पर गर्व करता है, वह हिंदू है। हिंदू सिर्फ धार्मिक शब्द नहीं बल्कि एक सभ्यता गत पहचान है, जो हजारों साल की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी है।
RSS चीफ सोमवार को तीन दिवसीय यात्रा के लिए असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे। आज बुधवार को भागवत एक युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसके बाद 20 नवंबर को मणिपुर के लिए रवाना होंगे।
भागवत बोले- सभी लोगों को मिलकर काम करना चाहिए
असम में डेमोग्राफिक चेंज पर मोहन भागवत ने कहा- हमें आत्मविश्वास, सतर्कता और अपनी जमीन-संस्कृति से मजबूत लगाव रखना चाहिए। साथ ही कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर निस्वार्थ भाव से काम करना चाहिए।
पूर्वोत्तर को उन्होंने भारत की एकता में विविधता का बेहतरीन उदाहरण बताया। कहा कि लचित बोरफुकन और श्रीमंत शंकरदेव जैसे व्यक्तित्व सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व रखते हैं। सभी भारतीयों को प्रेरित करते हैं।
- पहले लोग संघ के काम पर हंसते थे, आज डंका बज रहा है: भागवत ने 16 नवंबर को कहा था- पहले लोग संघ के काम पर हंसते थे। डॉ. हेडगेवार पर भी हंसते थे, कहते थे नाक साफ नहीं कर सकते। ऐसे बच्चों को लेकर यह राष्ट्र निर्माण करने चले हैं। इस तरह का उपहास होता था। विचार भी अमान्य था।
- निर्भरता मजबूरी न बने: मोहन भागवत ने 2 अक्टूबर को कहा था- पहलगाम हमले में आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं की हत्या की। हमारी सरकार और सेना ने इसका जवाब दिया। इस घटना से हमें दोस्त और दुश्मन का पता चला। पहलगाम घटना हमें सिखा गई कि भले ही हम सभी के साथ दोस्ती का भाव रखते हैं और रखेंगे, लेकिन हमें अपनी सुरक्षा के प्रति और अधिक सजग, समर्थ रहना पड़ेगा
3. ताकतवर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं: RSS चीफ ने 25 मई को कहा था कि भारत के पास शक्तिशाली होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हम अपनी सभी सीमाओं पर बुरी ताकतों की दुष्टता को देख रहे हैं। भागवत ने हिंदू समाज से एक होने और भारतीय सेना को ताकतवर बनाने की अपील की, ताकि कई शक्तियां एक साथ आने पर भी उसे जीत न सकें।