1.भूमिका:फर्जी विश्वविद्यालय का बढ़ता खतरा
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई क्यों नहीं? यह सवाल आज भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह बन चुका है…
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फरबरी 2026 में देश में चल रहे फर्जी विश्वविद्यालयों की एक सूची जारी की है | इस सूची से पता चलता है कि भारत के 12 राज्यों में 32 फर्जी विश्वविद्यालय संचालित हैं | इनमें दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक फर्जी विश्वविद्यालय अस्तित्व में हैं |
यूजीसी ने छात्रों और अभिभावकों को चेताया है कि सूचीगत विश्वविद्यालय मान्यता प्राप्त नहीं हैं तथा इनके द्वारा प्रदान की जाने वाली डिग्री भी रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए कानूनी रूप से मान्य नहीं है |
भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई को लेकर यूजीसी ने लगातार छात्रों और अभिभावकों को फर्जी डिग्रियों के प्रति सचेत करने के लिए फर्जी विश्वविद्यालयों की अद्धतन सूची जारी करता रहा है |
लेकिन प्रश्न उठता कि फर्जी विश्वविद्यालयों की यूजीसी को जानकारी होने के बाद भी वे अस्तित्व में कैसे बने रहते हैं ? क्या इस गंभीर प्रश्न पर सभी शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और कानूनविदों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता नहीं है ?
2. फर्जी विश्वविद्यालयों पर कानून क्या कहता है?
भारत में उच्च शिक्षा का उचित संचालन और संवर्धन करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 को संसद द्वारा अनुमोदित किया गया | इसके तहत विश्वविद्यालय को परिभाषित किया गया है तथा कानूनी रूप से डिग्री देने का अधिकार किसे है तथा कौन डिग्री नहीं दे सकता हैं |
यदि किसी विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विधिवत मान्यता प्राप्त नहीं है तो वह विश्वविद्यालय फर्जी विश्वविद्यालय की श्रेणी में सुमार माना जाएगा तथा उसकी डिग्री का भी कोई कानूनी महत्व नहीं होता है |
यद्धपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के अधीन प्रावधानों में सीधे तौर पर फर्जी विश्वविद्यालय के सम्बन्ध में कोई प्रावधान नहीं किया गया है|
लेकिन प्रावधानों में यह जरूर प्रावधानित किया गया है कि अधिनियम का पालन न किये जाने पर विश्वविद्यालय या विश्वविद्यालय की रूप में स्थापित किसी अन्य उच्च शिक्षा संस्था को दण्डित किया जाएगा |
2.1 UGC Act 1956 के प्रमुख प्रावधान
UGC Act ,1956 के तहत विश्वविद्यालय तथा डिग्री देने का अधिकार किसे है, आदि के सम्बन्ध में प्रावधान निम्नवत हैं :
2.1.1.विश्वविद्यालय क्या होता है ?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 की धारा 2 (च ) अनुसार “विश्वविद्यालय” से किसी केंद्रीय अधिनियम ,प्रान्त अधिनियम या राज्य अधिनियम या उसके अधीन स्थापित या निगमित विश्वविद्यालय अभिप्रेत है, और इसके अंदर ऐसी संस्था भी है जो सम्बद्ध विश्वविद्यालय के परामर्श से, इस अधिनियम के अधीन इस निमित्त बनाये गए विनियमों के अनुसार आयोग से मान्यता प्राप्त हैं |
बशर्ते केंद्र सरकार या आयोग की सलाह पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषित कर सकती है कि विश्वविद्यालय से भिन्न उच्च अध्य्यन की उच्च शिक्षा संस्था इस अधिनियम के प्रयोजन से विश्वविद्यालय समझी जाएगी |
तथा ऐसी घोषणा किये जाने पर, इस अधिनियम के सभी उपबंध इस संस्था को इस प्रकार लागू होंगे मानो वह अधिनियम की धारा 2 (च ) के तहत विश्वविद्यालय हों |
2.2 क्या फर्जी विश्वविद्यालय को है डिग्री देने का कानूनी अधिकार ?
भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कानूनी रूप से डिग्रीयाँ देने का अधिकार सिर्फ उन विश्वविद्यालय को है जिन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अधिनियम की धारा 2 (च ) या 3 के तहत विश्वविद्यालय या अन्य उच्च शिक्षा संस्था स्थापित करने की विधिवत अनुमति प्राप्त की है |
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से बिना मान्यता के स्थापित फर्जी विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली डिग्रियां भी रोजगार और उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने के लिए उपयोगी नहीं होती हैं |
3.फर्जी विश्वविद्यालयों के बारे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की चेतावनी का अर्थ क्या है ?
उच्च शिक्षा में फर्जी विश्वविद्यालय के बारे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) समय -समय पर चेतावनी जारी करता रहता है | UGC की चेतावनी का सीधा अर्थ होता है कि संबंधित विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था कानूनी रूप से विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त नहीं है, फिर भी वह अवैध रूप से विश्वविद्यालय शब्द का उपयोग कर रही है तथा डिग्री प्रदान कर रहा है |
यह चेतावनी विशेष रूप से छात्रों और उनके अभिभावकों को फर्जी विश्वविद्यालय तथा डिग्री सम्बंधित धोखाधड़ी से बचाने के लिए दी जाती है | ऐसे संस्थानों की डिग्री किसी भी सरकारी नौकरी या शिक्षण संस्थान में मान्य नहीं होती है |
4.फर्जी विश्वविद्यालय की 2023 की सूची बनाम 2026 की नई सूची: तुलनात्मक विश्लेषण
4.1.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार March, 2023 को राज्यबार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची
Delhi
1.Commercial University Ltd. Daryaganj, Delhi
2.United Nations University, Delhi
3.Vocational University, Delhi
4. ADR-Centric Juridical University, ADR House, 8J, Gopala Tower, 25, Rajendra
Place, New Delhi – 110 008
5. Indian Institution of Science and Engineering, New Delhi
6. Viswakarma Open University for Self-employment, India, Rozgar Sewasadan,
672, Sanjay Enclave, Opp. GTK Depot, New Delhi – 110 033
7. Adhyatmik Vishwavidyalaya (Spiritual University), 351-352, Phase-1, Block-A,
Vijay Vihar, Rithala, Rohini, Delhi- 110 085
8. All India Institute of Public & Physical Health Sciences (AIIPPHS), State Government University, Office Kh. No. 608-609, 1st Floor, Sant Kripal Singh Public Trust Building Near BDO Office, Alipur, Delhi-36
Karnataka
9. Badaganvi Sarkar World Open University Education Society, Gokak, Belgaum
(Karnataka)
Kerala
10. St. John’s University, Kishanattam, Kerala
Maharashtra
11. Raja Arabic University, Nagpur, Maharashtra
West Bengal
12. Indian Institute of Alternative Medicine, 80, Chowringhee Road, Kolkata – 20
13. Institute of Alternative Medicine and Research, 8-A, Diamond Harbor Road Builtech inn, 2nd Floor, Thakurpukur, Kolkata- 700 063
Uttar Pradesh
14. Gandhi Hindi Vidyapith, Prayag, Allahabad Uttar Pradesh
15. National University of Electro Complex Homeopathy, Kanpur, Uttar Pradesh
16. Netaji Subhash Chandra Bose University (Open University), Achaltal, Aligarh
Uttar Pradesh
17. Bhartiya Shiksha Parishad, Bharat Bhawan, Matiyari Chinhat, Faizabad Road,
Lucknow, Uttar Pradesh – 227 105
Puducheery
18. Sree Bodhi Academy of Higher Education, No. 186, Thilaspet, Vazhuthavoor
Road, Puducheey – 605 009
Andhra Pradesh
19. Christ New Testament Deemed University, # 32-23-2003, 7th Lane. Kakumanuvarithota, Guntur, Andhra Pradesh – 522 002 or # fit No. 301, Grace Villa Apts., 7/5, Srinagar, Guntur, Andhra Pradesh – 522 002.
20. Bible Open University of India, H.No. 49-35-26, N.G.O’s Colony,
Visakhapatnam, Andhra Pradesh-530016.
4.2.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार फरवरी, 2026 को राज्यबार फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही की सूची
दिल्ली
- आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस (ए. आई. पी.पी.
एच.एस.) स्टेट गवर्नमेंट यूनीवर्सिटी , आफस के एच नं. 608-609, प्रथम तल संन्त
कृपाल सिंह पब्लिक ट्रस्ट बिल्डिंग बी.डी.ओ. कायार्लय के पास अलीपुर दिल्ली -36 - कमर्सिअल यूनिवर्सिटी लिमिटेड दरियागंज ,दिल्ली
- यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी दिल्ली
- वोकेशनल यूनिवर्सिटी दिल्ली
- ए.डी.आर.- सेंट्रिक जुरिडिकल यूनिवर्सिटी, ए.डी.आर. हाउस, 8जे, गोपाल टॉवर, 25 राजेन्द्र
प्लेस, नई दिल्ली – 110008 - इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड इंजीनियरिंग ,नई दिल्ली
- विश्वकुमार ओप्पन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, इंडिया सेवा सदन, 672,
संजय एंक्लेव, अपोिजट जी.टी .के .डिपो, नई दिल्ली – 110033 - आध्याित्मक विश्वविद्यालय (स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी), 351-352, फे स-1, ब्लॉक-ए, विजय बिहार रिठाला ,रोहिणी दिल्ली – 110085
- वल्डर् पीस ऑफ़ यूनाइटेड नेशनस यूनिवर्सिटी (डब्लू.पी.यू.एन.यू), नंबर-201, द्वतीय तल,बेस्ट बिजनेश पाकर्, नेताजी सुभाष प्लेस, पीतमपुरा, नई दिल्ली -110034
- इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग , 1810/4, प्रथम तल, कोटला मुबारकपुर, दिल्ली
- माउंटेन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, 109, मधुबन बिल्डिंग क्रांति की स्थिति कम्युनिकेशन 55, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली -110019
- नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट सोलयूशन, बी-1/1, जनकपुरी नई दिल्ली -110058
केरल
- सेन्ट जॉन यूनिवर्सिटी कृष्णाटम्, केरल
- इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ प्रॉफेटिक मेडिसिन ( आई. आई. यू. पी. एम.),कुन्नामंगलम कोजीकोड, केरला 673 571
महाराष्ट्र
- राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर, महाराष्ट्र
- नेशनल बैकवडर् कृषि विद्यापीठ, तड़वाल, ताल। अक्कलकोट, िजला- सोलापरु, महाराष्ट
पिश्चम बंगाल
- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव मेडिसिन, 80, चौरंगी रोड़, कोलकाता-20
- इंस्टिट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, 8-ए, डायमंड हाबर्र रोड़ बिलटेक इन, 2 फ्लोर, ठाकुर पूकूर, कोलकता – 70006
उत्तर प्रदेश
- गाँधी हिन्दू विद्यापीठ, प्रयाग, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
- महामाया टैिक्नकल (प्राविधिक) विश्वविद्यालय, पी.ओ. महर्षि नगर, जिला जला-गौतम बुद्धनगर, सैक्टर-110 के पीछे, नोएडा- 201 304 उत्तर प्रदेश
- नेताजी सभाष चन्द्र बोस यूनीवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी) अचलताल, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
- भारतीय शिक्षा परिषद् भारत भवन,मटियारी चिनहट, फैजाबाद रोड़, लखनऊ , उत्तर प्रदेश 227105
पुण्डिचेरी
- श्री बोधि एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, नं. 186, थीलासपेट, वाजुथवर रोड़, पुडुचेरी -605009
- उषा लात्चुमनन कॉलेज ऑफ एजुके शन, टी.वी. मलाई रोड, वाझापीडयार नगर थिरुक्कनर,पुडुचेरी -605 501
आंध्र प्रदेश
- क्राइस्ट न्यूटेस्टामेंट डीम्ड यूनिवर्सिट, #32-23-2003,7वीं लेन, काकुमानुवरिहोट्टा , गुंटूर, आंध्र प्रदेश – 522002 व फिट नं. 301, ग्रेस विलाअपा., 7/5, श्रीनगर , गुंटूर, आंध्र प्रदेश- 522002.
- बाईबल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंडिया, मकान नं. 49-35-26 एन. जी. ओ. कॉलोनी,विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश- 530016
अरुणाचल प्रदेश
- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव मेडिसन, 130/A, सेक्रेटेरिएट एस.ओ., अरुणाचल प्रदेश -791111
हरियाणा
- मैिजक एंड आटर् यूनिवर्सिटी, 308ए, दशमेश प्लाजा, मथुरा रोड, फरीदाबाद, हरियाणा -121001
कनार्टक
- सर्व भारतीय विद्यापीठ, एस. के . चौल्टरी के पास, देवनूर मेन रोड, विजयानगर,तुमकुर-572102, कनार्टक
- ग्लोबल ह्यमन पीस यूनिवर्सिटी, #1035, चौथा ब्लॉक, गोल्डन हाइट्स के पास, डॉ.राजकुमार रोड, राजली नगर, बेंगलूरू – 560010 (कनार्टक)
राजस्थान
- राजीव गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेन्ट, मानसा चौक, भिवाड़ी, जिला अलवर (राजस्थान)
झारखण्ड
- दक्ष यूनिवर्सिटी (वोकेशनल और लाइफ स्किल एजुकेशन ), भास्कर पथ, न्य पुंदाग, मसिबाड़ी, रांची, झारखंड 834007विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी की गई 2023 की सूची तथा 2026 की सूची के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि नई सूची से केवल संख्या में वृद्धि नहीं दिखाई देती है, बल्कि यह संकेत भी मिलता कि फर्जी विश्वविद्यालयों का कारोबार पहले से अधिक राज्यों में फ़ैल चुका है |यह सही है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फर्जी यूनिवर्सिटीज की पहचान में तेजी दिखाई है | लेकिन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नाक के नीचे अर्थात दिल्ली जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फर्जी विश्वविद्यालयों या संस्थाओं की संख्या में बृद्धि हुई है |
इसके अतिरिक्त यह देखा जाना आवश्यक है कि वर्ष 2023 की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी की गई फर्जी विश्वविद्यालय की सूची बाले नाम उसके द्वारा वर्ष 2026 में जारी की गई सूची में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं |
इसका मतलब क्या समझा जाए | क्या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उनके विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही की गई ? यदि उनके विरुद्ध कार्यवाही की गई तो वे नई सूची में क्यों दिखाई दे रही हैं ?
यदि उनके विरुद्ध कार्यवाही की गई तो उनकी सूची जारी करने के अलावा तथा उन्हें चेतावनी के अलावा उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई ? यह कहीं देखने को नहीं मिलता है |
वर्ष 2026 की सूची से पता चलता है कि फर्जी विश्व विद्यालयों का जाल अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड तक फैल गया है | विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग फर्जी विश्वविद्यालयों के विस्तार पर प्रभावी लगाम लगा पा रहा है ?
5.फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई क्यों नहीं: कानूनी नजरिया
भारत में फर्जी विश्वविद्यालय के विरुद्ध कार्यवाही का ढांचा मुख्य रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम ,1956 तथा उसके अधीन स्थापित वैधानिक संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग पर निर्भर है | यद्यपि क़ानून मौजूद होने के बाबजूद फर्जी विश्वविद्यालयों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही पिछले कुछ वर्षों में कम ही दिखाई दी है | जिसके पीछे कई कानूनी और प्रक्रिया सम्बन्धी कारण विधमान हैं |
(1). फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही की सीमित दंडात्मक शक्ति
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही के सम्बन्ध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 के तहत सिर्फ फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची, चेतावनी और उन्हें नोटिस भेजने तक सीमित है | उसे फर्जी विश्वविद्यालयों के विरुद्ध सीधे दंडात्मक कार्यवाही करने की शक्ति प्राप्त नहीं है |
(2). फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही का स्वरुप -नियामक बनाम आपराधिक
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 के तहत फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही को पहले नियामक उल्लंघन के रूप में देखा जाता है जिसके कारण अक्सर आपराधिक कार्यवाहियों में बहुत देरी होती है और अक्सर आपराधिक कार्यवाही शुरू ही नहीं हो पाती है |
(3).फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही के सम्बन्ध में राज्य सरकार की भूमिका
भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों का जाल अलग अलग राज्यों में फैला हुया है | फर्जी विश्वविद्यालयों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए राज्य सरकार की भूमिका अभियोजन के रूप में महत्वपूर्ण होती है |राजस्थान भर्ती घोटाले में 108 फर्जी डिग्रियां मिलने का मामला सामने आया था.जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में फिरोजाबाद के JS विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द कर दी थी
उच्च शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में होने के कारण कार्रवाई में राज्य पुलिस, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की भागीदारी जरूरी होती है | जब तक यह समन्वय फर्जी विश्वविद्यालयों के विरुद्ध उचित कार्यवाही करने का मन न बनाये तब तक फर्जी विश्वविद्यालयों को समाप्त करने की दिशा में कोई प्रगति संभव नहीं है |
(4). शिकायतों और साक्ष्यों की कमी
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही से अक्सर ठगे गए छात्र और अभिभावक अक्सर बचने का प्रयास करते हैं | कुछ लोग जो ठगे जाते हैं वह भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से शिकायत करने की जगह उपभोक्ता आयोग में चले जाते हैं और फर्जी डिग्री बाँट रहे संस्थाओं का सही पता नहीं चल पाता है | बिना शिकायत के राज्यों की ओर से अभियोजन की नीब कमजोर रहती है |
(5). लम्बी और उबाऊ कानूनी प्रक्रिया
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही के सम्बन्ध में धोखाधड़ी, जालसाजी और उपभोक्ता क़ानून के तहत अलग -अलग कानूनी कार्यवाहियां चलती हैं जिनके फैसले आने में बहुत समय लग जाता है | इस लिए भी छात्र और अभिभावक फर्जी विश्वविद्यालयों के विरुद्ध कार्यवाही से बचने का प्रयास करते हैं |
(6).फर्जी विश्वविद्यालय सिद्ध होने पर नाम मात्र का आर्थिक दंड
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही के अनुक्रम में किसी विश्वविद्यालय के फर्जी सिद्ध होने पर या उसके द्वारा फर्जी डिग्रीयां प्रदान किये जाने पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 की धारा 24 के अनुसार अर्थ दंड से दण्डित किया जाएगा | अधिनियम की धारा 24 निम्नवत है |
“24 .शास्तियां —जो कोई धारा 22 या धारा 23 का उल्लंघन करेगा, वह जुर्माने से जो 1000 रूपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा और यदि उल्लंघन करने वाला कोई संगम है या व्यष्टियों का कोई निकाय है तो, ऐसे संगम या निकाय का प्रत्येक ऐसा सदस्य जो जानते हुए या जानबूज कर ऐसे उल्लंघन को प्राधिकृत करेगा या अनुज्ञात करेगा, जुर्माने से, जो 1000 रूपये तक हो सकेगा, दंडनीय होगा |
निष्कर्ष
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही क्यों नहीं दिखाई दे रही है ? इसका सरल और सीधा उत्तर है कि समस्या क़ानून की अनुपलब्ध्ता नहीं, बल्कि उपलब्ध कानून के प्रभावी अनुपालन की कमी के साथ- साथ केंद्र तथा राज्य के बीच तालमेल का अभाव भी है |
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा समय -समय पर फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई की सूची जारी की जाती है, लेकिन राज्यों द्वारा त्वरित आपराधिक कार्यवाही में हीला- हवाली और सख्त प्रवर्तन का अभाव भी फर्जी विश्वविद्यालयों को फलने -फूलने का अवसर प्रदान करता है |
फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई के सम्बन्ध में जब तक छात्र -अभिभावक जागरूकता नहीं बढ़ेगी तब तक फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या इसी तरह बढ़ती रहेगी तथा समस्या का पूरी तरह समाप्त होना संभव नहीं है |
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की वर्ष 2026 की सूची में कुछ एक को छोड़कर वर्ष 2023 की सूची में दिए गए विश्वविद्यालय या संस्थान अभी भी मौजूद हैं |
वास्तविक तथ्य दर्शाते हैं कि फर्जी विश्वविद्यालयों पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पा रही है, इसका मुख्य कारण प्रभावी शिकायत तंत्र का अभाव, लम्बी न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय का अभाव है | इसलिए इस समस्या का समाधान क़ानून के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रबल प्रशासनिक इच्छा शक्ति में निहित है |
फर्जी विश्वविद्यालयों से छात्रों के मानव अधिकारों को सुरक्षित करना राज्य का दायित्व है | समय रहते केंद्र और राज्य सरकारों को इस बुराई से लड़ने के लिए समन्वित प्रयास करने होंगे | स्पष्ट है कि भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई तेज हुई है, लेकिन जागरूकता अभी भी सबसे बड़ा हथियार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) :
प्रश्न 1. फर्जी विश्वविद्यालयों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती है ?
उत्तर : फर्जी विश्वविद्यालयों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती है, इसका असली कारण कानूनों का सही ढंग से लागू न हो पाना है, लम्बी और उबाऊ कानूनी प्रक्रिया तथा केंद्र -राज्य के बीच समन्वय का अभाव आदि हैं |
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग समय -समय पर फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची जारी करता रहता है | लेकिन फर्जी विश्वविद्यालयों पर आपराधिक कार्यवाही राज्य सरकार पर निर्भर करती है |
प्रश्न 2. भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों की पहचान का क्या तरीका है ?
उत्तर : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वेबसाइट पर फर्जी विश्व विद्यालयों की सूची देख कर तथा विश्वविद्यालय का स्थापना विवरण/ अधिनियम की जांच करके फर्जी विश्वविद्यालयों की पहचान आसानी से की जा सकती है |
प्रश्न 3. फर्जी विश्वविद्यालयों से डिग्री लेने से क्या नुक्सान है ?
उत्तर : फर्जी विश्वविद्यालयों से ली गई डिग्री कानूनी रूप से मान्य नहीं होती है तथा नौकरी तथा उच्च शिक्षा में स्वीकार्य नहीं है | इसके अतिरिक्त छात्र का समय और धन दोनों की बर्बादी होती है |
प्रश्न 4. फर्जी विश्वविद्यालय के खिलाफ शिकायत कहाँ करें?
उत्तर : फर्जी विश्वविद्यालय के खिलाफ शिकायत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अलावा राज्य के उच्च शिक्षा विभाग तथा पुलिस को भी की जा सकती है |
प्रश्न 5. क्या फर्जी विश्वविद्यालय का संचालन अपराध है ?
उत्तर : हाँ, नई विधि संहिता बीएनएस के तहत यह धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित अपराध निर्मित करता है और प्रावधानों के तहत आपराधिक कार्यवाही संभव है |
प्रश्न 6 : भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही कौन करता है ?
उत्तर: फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्यवाही मुख्य रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राज्य सरकारें करती हैं |अस्वीकरण :
यह लेख केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |