मंत्री अशोक चौधरी की असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति से जुड़ा विवाद अब समाप्त हो गया है। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSSC) ने शिक्षा विभाग को डोजियर उपलब्ध कराते हुए स्पष्ट किया है कि नाम को लेकर उठी विसंगति पूरी तरह निराधार है और नियुक्ति पूरी तरह वैध है।
दरअसल, असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों में से कुछ में अशोक कुमार नाम लिखा है और कुछ में अशोक चौधरी, जिसके बाद मामले पर सवाल उठने लगे थे।
जांच में साफ हुआ- दोनों नाम एक ही व्यक्ति के
अब विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने जांच के बाद शिक्षा विभाग को स्पष्ट किया है कि अशोक कुमार का साक्षात्कार के बाद तैयार मेधा सूची के आधार पर अनुसूचित जाति कोटे में सिलेक्शन किया गया है। जांच में पाया गया कि संबंधित दोनों नाम अशोक कुमार और अशोक चौधरी एक ही व्यक्ति से संबंधित हैं।
आयोग ने की अशोक कुमार की नियुक्ति की अनुशंसा
जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद आयोग ने अशोक कुमार की नियुक्ति की अनुशंसा की है। इस पर आयोग का विधिवत अनुमोदन मिल गया है। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने यह पत्र दो दिन पहले विभाग को भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
1 जनवरी 2026 को शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा निदेशक एन.के. अग्रवाल ने बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग को पत्र लिखा था। उसमें कहा गया था कि अभ्यर्थी के नाम और प्राप्त डोजियर में उपलब्ध रिकॉर्ड विभिन्न प्रमाण पत्रों में अंकित अभ्यर्थी के नामों में समानता नहीं है।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने भी कहा था कि कुछ कागजातों में कमियां हैं। भास्कर ने यह खबर लाई थी कि अशोक चौधरी के पासपोर्ट और जाति प्रमाण पत्र में अशोक कुमार उर्फ अशोक चौधरी लिखा है।